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Diabetes Risk: टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज, क्या है इन दोनों में अंतर? यहां जानिए सबकुछ विस्तार से

Tue, 05 Aug 2025 07:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • जिन दो प्रकार के डायबिटीज की सबसे ज्यादा चर्चा होती है, वह है  टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज। आइए समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है, कैसे पहचानें कि आपको टाइप-1 डायबिटीज है या फिर टाइप-2? और किन लोगों में इसका खतरा रहता है।
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसका जोखिम सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। हमारी बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान और तनाव ने इस बीमारी को आम बना दिया है। आमतौर पर हम सभी लोगों के डायबिटीज को एक ही मान लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज केवल एक नहीं, बल्कि मुख्यरूप से चार प्रकार की होती है। टाइप-1, टाइप-2, गर्भावधि मधुमेह और डायबिटीज 1.5 लाडा।

जिन दो प्रकार के डायबिटीज की सबसे ज्यादा चर्चा होती है, वह है टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज। आइए समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है, कैसे पहचानें कि आपको टाइप-1 डायबिटीज है या फिर टाइप-2? और किन लोगों में इसका खतरा रहता है।
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डायबिटीज और इसका जोखिम - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज और इसका खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डायबिटीज एक मेटाबॉलिक बीमारी है जिसमें शरीर ब्लड में शुगर (ग्लूकोज) के स्तर को बेहतर तरीके से नियंत्रित नहीं कर पाता है। हमारे शरीर में पैंक्रियाज, इंसुलिन नामक हार्मोन बनता है, वही ब्लड शुगर को शरीर की कोशिकाओं में भेजने में मदद करता है। जब हमारा शरीर इंसुलिन बनाना बंद कर देता है तो इसके कारण आपको डायबिटीज हो सकता है।

टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज दोनों में यही दिक्कत होती है, फिर दोनों में क्या अंतर है? आइए इस बारे में समझते हैं।
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डायबिटीज और इसके प्रकार - फोटो : Freepik.com
टाइप-2 डायबिटीज के बारे में जानिए

डायबिटीज के जिस प्रकार को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा रहती है वह है टाइप-2 डायबिटीज। इसके मामले सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। यह लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारी है।

इसमें शरीर या तो पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता या शरीर का सिस्टम उस पर प्रतिक्रिया देना बंद कर देता है। इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। यह 40 साल से ऊपर की उम्र में ज्यादा देखी जाती है, लेकिन अब युवा भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। डाइट, व्यायाम और दवाइयों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

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टाइप-2 डायबिटीज और इसका जोखिम - फोटो : Freepik.com
टाइप-1 डायबिटीज

टाइप-2 डायबिटीज से इतर टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून रोग है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाओं पर हमला कर देता है, जिससे इंसुलिन बनना पूरी तरह बंद हो जाता है। इसका मतलब है, मरीज को बाहर से इंसुलिन लेना अनिवार्य हो जाता है। यह ज्यादातर बच्चों, किशोरों या युवाओं में पाई जाती है। कई बच्चों में जन्म के साथ भी ये दिक्कत हो सकती है।इसे रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन कंट्रोल किया जा सकता है।

जिन मरीजों को टाइप-1 डायबिटीज की दिक्कत होती है उन्हें नियमित रूप से इंसुलिन इंजेक्शन लेने की आवश्कता होती है। 
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डायबिटीज को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Adobe stock
क्या होते हैं लक्षण और क्या है विशेषज्ञों की सलाह?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हर साल 15 लाख से अधिक मौतें डायबिटीज से जुड़ी बीमारियों से होती हैं। भारत में 2024 तक 10 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से ग्रस्त थे जिनमें 90% टाइप-2 का शिकार हैं। दोनों प्रकार के डायबिटीज के लक्षण एक जैसे ही होते हैं। 

डायबिटीज के लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, बहुत अधिक प्यास लगना, अचानक वजन घटना, थकान और कमजोरी, कम दिखने की समस्या, घाव या चोट धीरे भरने की दिक्कत देखी जाती रही है। अगर आपको भी इसमें से कोई दिक्कत कुछ समय से बनी हुई है तो तुरंत किसी चिकित्सक से इसका निदान कराएं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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