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Eye Tuberculosis: फेफड़े ही नहीं आंखों में भी हो सकती है टीबी की बीमारी, इन लक्षणों से करिए पहचान

Tue, 28 Apr 2026 08:18 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Aankho Me TB Ke Lakshan: फेफड़ों के अलावा आंखों में भी टीबी हो सकती है, इसे ऑक्यूलर ट्यूबरकुलोसिस या आई टीबी कहा जाता है। यह स्थिति नजर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। आइए जानते हैं कि आंखों में टीबी की बीमारी का कैसे पता लगाया जाता है, ये दिक्कत होती क्यों है?
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आंखों में टीबी की बीमारी - फोटो : Amarujala.com/AI
ट्यूबरक्लोसिस यानी टीबी एक गंभीर बीमारी है जिसका खतरा दुनियाभर में देखा जा रहा है। ये बीमारी हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण भी बनती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों के अनुसार, इस संक्रामक बीमारी के कारण साल 2024 में 1.23 मिलियन (12 लाख) से अधिक लोगों की मौत हुई। ये बीमारी रोकी जा सकती है और इसका इलाज भी संभव है, बावजूद इसके कई देशों में ये गंभीर समस्या बनी हुई है। ज्यादातर मौतें कम और मध्यम आय वाले देशों खासकर दक्षिण-पूर्व एशिया, अफ्रीका और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में होती हैं।

भारत भी लगातार टीबी की समस्या से परेशान है। साल 2025 में देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया था हालांकि अब तक इसपर विजय हासिल नहीं की जा सकी है।

टीबी का कारण बनने वाला माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस बैक्टीरिया सबसे पहले फेफड़ों को प्रभावित करता है, ऐसे में माना जाता रहा है कि टीबी सिर्फ फेफड़ों की बीमारी है। पर क्या आप जानते हैं कि शरीर के कई अन्य अंगों जैसे किडनी, हड्डियों यहां तक कि आंखों में भी टीबी हो सकती है?
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फेफड़ों की टीबी आंखों के लिए भी खतरनाक - फोटो : Adobe Stock
आंखों में टीबी की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, फेफड़ों के बाहर के अंगों में होने वाली टीबी को एक्स्ट्रापल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस कहा जाता है। सभी प्रकार के टीबी के 15-25% मामले एक्स्ट्रापल्मोनरी ट्यूबरकुलोसिस वाले होते हैं।

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने हड्डियों में होने वाली टीबी के बारे में जानकारी दी थी। आइए अब आंखों में टीबी की समस्या को समझते हैं।
 
  • आंखों में होने वाली टीबी को ओकुलर ट्यूबरकुलोसिस या आई टीबी कहा जाता है। 
  • विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को पहले से टीबी है या उसकी इम्युनिटी कमजोर है, तो आंखों में टीबी का खतरा बढ़ सकता है।
  • अगर इसकी समय पर पहचान न हो पाए तो आंखों की रोशनी तक जाने का खतरा रहता है।
  • समय पर जांच और दवाओं के जरिए इसका इलाज संभव है। 
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आंखों की समस्या - फोटो : Freepik.com
आंखों में टीबी होने का क्या कारण है?

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार फेफड़ों में टीबी का कारण बनने वाले बैक्टीरिया ही आंखों में भी टीबी का खतरा बढ़ाते हैं। अक्सर लोग आंखों में टीबी से अनजान होते हैं। ऐसे में अगर समय पर समस्या का पता लगाकर टीबी का इलाज न हो पाए तो इससे रोशनी जाने या अंधेपन तक का खतरा हो सकता है।
 
  • जब टीबी के बैक्टीरिया खून के जरिए से आंखों तक पहुंच जाते हैं तो इसका खतरा होता है।
  • इसका रेटिना, कोरॉयड और ऑप्टिक नर्व पर भी असर हो सकता है।
  • एचआईवी के मरीजों, डायबिटीज रोगी, कमजोर इम्युनिटी वालों या पहले से टीबी के शिकार लोगों में इसका खतरा ज्यादा होता है।

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आंखों में टीबी की क्या पहचान है? - फोटो : Adobe Stock Photo
क्या होते हैं इसके लक्षण?

आंखों में टीबी से पीड़ित कई लोगों में अक्सर शुरुआत में कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते। आमतौर पर इसके कुछ लक्षण आंखों की सूजन से जुड़े होते हैं, जिसे आंख की अन्य समस्या मानकर अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। टीबी बढ़ने के साथ आपको कई अन्य तरह की दिक्कतें होने लगती हैं।
 
  • आंखों का अक्सर लाल रहना और दर्द बने रहना
  • रोशनी के प्रति संवेदनशीलता
  • धुंधला दिखाई देना
  • रोशनी की चमक दिखाई देना
  • आंखों के सामने कुछ तैरता हुआ दिखाई देना

यदि संक्रमण रेटिना या ऑप्टिक नर्व तक पहुंच जाए, तो स्थायी रूप से रोशनी जाने तक का खतरा बढ़ जाता है। जोखिमों को देखते हुए पहले से टीबी के मरीजों को नियमित आंखों की जांच कराते रहना चाहिए।
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आंखों की समय पर कराएं जांच - फोटो : Freepik.com
ओकुलर ट्यूबरकुलोसिस हो जाए तो क्या करें?

डॉक्टर कहते हैं, आंखों में टीबी के मामले वैसे तो बहुत कम होते हैं और ये फेफड़ों की तरह संक्रामक भी नहीं होती। लेकिन, अगर आपको आंखों की टीबी के साथ-साथ फेफड़ों की टीबी भी है, तो दूसरों में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।

इस प्रकार की टीबी में भी एंटी-ट्यूबरकुलर थेरेपी दी जाती है। इसका इलाज आमतौर पर 6 से 9 महीने या डॉक्टर की सलाह के अनुसार अधिक समय तक भी चल सकता है। अधूरा इलाज संक्रमण को दोबारा बढ़ा सकता है। यदि आंखों में बार-बार सूजन या धुंधलापन हो, तो इसे सामान्य कमजोरी मानकर नजरअंदाज न करें, तुरंत विशेषज्ञ से जांच कराएं।



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स्रोत:
Ocular Tuberculosis (TB)


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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