फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Health Tips: थायराइड रोगी भूलकर भी न करें इन चार चीजों का सेवन..! वरना बढ़ जाती है परेशानी

Wed, 26 Nov 2025 02:32 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Thyroid Diet Tips: थायराइड एक ऐसी समस्या है, जिसे अगर समय रहते ध्यान देकर इलाज किया जाए तो उसे ठीक किया जा सकता है। डॉक्टर इन रोगियों को अक्सर दवा के साथ डाइट में भी कुछ बदलाव करने का सुझाव देते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
थायरॉइ़ड - फोटो : Adobe Stock
Foods to Avoid In Thyroid: थायराइड की समस्या आजकल एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है, जिससे हमारे देश की एक बड़ी आबादी प्रभावित है। थायराइड गर्दन में एक छोटी तितली जैसी ग्रंथि होती है, जो थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन करती है। यह हार्मोन हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा और शारीरिक तापमान को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब यह ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाती तो इस स्थिति को हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं और जब हार्मोन का उत्पादन बहुत ज्यादा होता है इस स्थिति को हाइपरथायरायडिज्म कहते हैं।

हमारे देश में ज्यादातर लोगों को हाइपोथायरायडिज्म की समस्या रहती है इसलिए आज हम विशेष रूप से हाइपोथायरायडिज्म की बात करेंगे। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे वजन बढ़ना, थकान और सुस्ती जैसी परेशानियां होती हैं। थायरॉइड के रोगियों के लिए दवाओं के साथ-साथ अपने आहार पर नियंत्रण रखना जरूरी है।

कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जो थायरॉइड हार्मोन के उत्पादन में बाधा डालते हैं या आपकी दवाओं के अवशोषण को कम करते हैं, जिससे आपकी परेशानी और इलाज अप्रभावी हो सकता है। अगर कोई हाइपोथायरायडिज्म से परेशान है, तो उसे कुछ चीजों के सेवन से परहेज करना चाहिए। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
ब्रोकली - फोटो : Freepik.com
गोइट्रोजेन युक्त क्रूसिफेरस सब्जियां
गोइट्रोजेन ऐसे कंपाउंड होते हैं जो थायरॉइड ग्रंथि द्वारा आयोडीन के उपयोग में बाधा डालते हैं, जिससे हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है। हाइपोथायरायडिज्म में यह स्थिति और बिगड़ जाती है। इसलिए ऐसे मरीजों को पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, केल और मूली जैसी क्रूसिफेरस सब्जियों के सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए और अच्छे से पकाकर ही करना चाहिए। ध्यान रखें अच्छी तरह से पकाकर ही खाएं क्योंकि पकाने से गोइट्रोजेन यौगिकों का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।

ये भी पढ़ें- Health Tips: अंडा या पनीर किसमें होता है अधिक प्रोटीन, जानें सेहत के लिए कौन-सा है अधिक फायदेमंद?
विज्ञापन

3 of 5
थायरॉइ़ड - फोटो : Adobe Stock
सोया उत्पाद
सोयाबीन और इससे बने उत्पादों (जैसे टोफू, सोया मिल्क, सोया सॉस) में आइसोफ्लेवोन्स नामक कंपाउंड होते हैं। ये कंपाउंड थायरॉइड की दवा के अवशोषण में बाधा डालते हैं। इसलिए हाइपोथायरायडिज्म के रोगियों को अपनी दवा लेने के कम से कम चार घंटे बाद ही सोया उत्पाद खाने चाहिए।

ये भी पढ़ें- Health Tips: विटामिन डी की कमी से पुरुषों में बढ़ जाता है प्रोस्टेट कैंसर का जोखिम, समझ लें इसके पीछे का साइंस

4 of 5
थायराइड में शुगर से परहेज करें - फोटो : Freepik.com
अत्यधिक चीनी और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स
हाइपोथायरायडिज्म की वजह से मेटाबॉलिज्म धीमा होता है और वजन आसानी से बढ़ जाता है। ऐसे में अत्यधिक चीनी (मिठाई, सोडा) और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स का सेवन करने से परहेज करना चाहिए। ये खाद्य पदार्थ न सिर्फ आपका वजन तेजी से बढ़ाते हैं, बल्कि शरीर में सूजन भी पैदा करते हैं। यह सूजन थायरॉइड की समस्याओं को बढ़ा सकती है और मरीज को और अधिक थका हुआ महसूस करा सकती है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
कॉफी पीने के फायदे - फोटो : Freepik.comAl
कैफीन का सीमित सेवन
हाइपोथायरायडिज्म के मरीजों को चाय और कॉफी जैसे पेय पदार्थों में मौजूद कैफीन का सेवन सीमित करना चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दवा लेने के बाद कम से कम एक घंटे तक कैफीन वाले पेय पदार्थों का सेवन न करें।

शराब से पूरी तरह बचें
हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों को शराब का सेवन पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए। शराब का सीधा प्रभाव लिवर पर पड़ता है, जो थायरॉइड हार्मोन (T3 और T4) को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शराब थायरॉइड हार्मोन के उत्पादन और उनके सही तरह से काम करने में गंभीर बाधा डालती है। इससे आपकी पहले से मौजूद थकान, वजन बढ़ने और सुस्ती जैसी समस्याएं बहुत अधिक बिगड़ सकती हैं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें