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जानना जरूरी: कहीं थायरॉइड की समस्या तो नहीं बन रही प्रेग्नेंसी में बाधा? तुरंत करा लें इसकी जांच

Sun, 18 Oct 2026 05:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Thyroid Imbalance and Pregnancy: थायरॉइड हार्मोन का असंतुलन महिलाओं में पीरियड्स और ओव्यूलेशन को प्रभावित कर सकता है, जिससे गर्भधारण में परेशानी हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड की समस्या से कुछ जटिलताओं का खतरा भी बढ़ता है। सही समय पर जांच, डॉक्टर की सलाह जोखिम कम करने में मदद मिलती है।
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थायरॉइड की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आप भी प्रेग्नेंसी की प्लानिंग कर रही हैं? अगर हां तो इससे पहले एक बार अपनी सेहत की अच्छे से जांच जरूर करा लें, मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कई प्रकार की स्वास्थ्य स्थितियां गर्भधारण में बाधा बन सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, गर्भधारण करने के लिए पीरियड्स का नियमित होना और ओव्यूलेशन बहुत जरूरी है। लेकिन कई बार सबकुछ ठीक दिखने के बाद भी कई लोगों को प्रेग्नेंसी में दिक्कतें हो सकती हैं। अगर आपमें थायरॉइड हार्मोन का संतुलन ठीक नहीं है तो इसके कारण भी प्रेग्नेंसी में मुश्किलें हो सकती हैं। यही कारण है कि गर्भधारण की प्लानिंग से पहले डॉक्टर से मिलकर थायरॉइड की जांच जरूर करा लेनी चाहिए।

आइए समझते हैं कि थायरॉइड का प्रेग्नेंसी से क्या लिंक है? 
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गर्भावस्था के लिए थायरॉइड संतुलन जरूरी - फोटो : Freepik.com
थायरॉइड गर्दन में पीछे की ओर मौजूद एक छोटी ग्रंथि होती है, जो मेटाबॉलिज्म के साथ प्रजनन से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी प्रभावित करती है। जब यह ग्रंथि कम हार्मोन बनाती है, तो इसे हाइपोथायरॉइडिज्म और ज्यादा हार्मोन बनाती है, तो हाइपरथायरॉइडिज्म कहते हैं। दोनों ही स्थितियों में कुछ महिलाओं के पीरियड्स और ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकते हैं। यही कारण है कि समय पर थायरॉइड की जांच और हार्मोनल संतुलन को ठीक करने के उपाय करके स्वास्थ्य संबंधित जटिलताओं को कम किया जा सकता है।


प्रेग्नेंसी के लिए क्यों जरूरी है थायरॉइड हार्मोन?

थायरॉइड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म के अलावा प्रजनन संबंधी हार्मोन के संतुलन में भी भूमिका निभाते हैं। इनका स्तर बिगड़ने पर पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। 

ओव्यूलेशन वह प्रक्रिया है, जिसमें अंडाशय से अंडा निकलता है और उसके निषेचित होने पर गर्भधारण की संभावना बनती है। लंबे समय तक अगर हाइपोथायरॉइडिज्म पर ध्यान न दिया जाए या फिर इसका इलाज न हो तो गर्भधारण में परेशानी हो सकती है।
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थायरॉइ़ड के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
कहीं आपको भी तो नहीं है थायरॉइड की समस्या?

थायरॉइड हार्मोन्स का कम या ज्यादा बनना दोनों ही सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है।
 
  • हाइपोथायरॉइडिज्म में थायरॉइड हार्मोन कम बनता है। इससे पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और ओव्यूलेशन प्रभावित हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान अगर इसकी दिक्कत होती है तो इससे गर्भपात और समय से पहले प्रसव जैसी जटिलताओं का भी खतरा बढ़ सकता है।
  • इसी तरह हाइपरथायरॉइडिज्म इसमें शरीर में थायरॉइड हार्मोन जरूरत से ज्यादा बनता है। इससे मासिक धर्म में बदलाव और गर्भधारण से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। गर्भावस्था के दौरान इसका नियंत्रण जरूरी है, क्योंकि इससे मां और बच्चे दोनों की सेहत पर असर हो सकता है।
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थायरॉइड की समस्या - फोटो : Freepik.com
प्रेग्नेंसी से पहले थायरॉइड है तो क्या करें?

प्रेग्नेंसी से पहले थायरॉइड की समस्या आपके लिए गर्भधारण को मुश्किल बना सकती है, यही कारण है कि इसकी जांच जरूरी है। अगर पीरियड्स अनियमित हैं या गर्भधारण में परेशानी हो रही है तो इस बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। 
 
  • प्रेग्नेंसी की प्लानिंग पहले थायरॉइड हार्मोन की जांच कराएं। अगर इसमें कोई समस्या है तो इसका इलाज कराएं।
  • थायरॉइड की समस्या के साथ प्रेग्नेंसी प्लान कर रही हैं तो पहले डॉक्टर की सलाह ले लें। 
  • महिलाओं को खानपान पर भी ध्यान देना चाहिए। आयोडीन थायरॉइड हार्मोन बनाने के लिए जरूरी है।
  • खाने में सामान्य मात्रा में आयोडीन युक्त नमक इस्तेमाल करें। हालांकि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी सप्लीमेंट न लें।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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