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इन चीजों में भी होती है बहुत अधिक शक्कर, मधुमेह के मरीज न करें सेवन 

Sat, 17 Apr 2021 03:37 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लो-शुगर के नाम पर कई सारे उत्पाद आजकल मिलने लगे हैं - फोटो : Social Media

 

Medically Reviewed by Dr. Manjari Chandra

कंसल्टिंग न्यूट्रीशनिस्ट, मैक्स हेल्थकेयर, नई दिल्ली

डिग्री- डायबिटीज एजुकेटर कोर्स

         मास्टर्स इन फूड एंड न्यूट्रीशियन 

         पीजी डिप्लोमा- हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन

अनुभव- 20 वर्ष

बहुत सारे लोगों को मीठा खाना बहुत पसंद होता है लेकिन सेहत के लिए बहुत अधिक मीठा खाना बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। यदि वैश्विक स्तर पर किसी खाद्य पदार्थ को विरोध झेलना पड़ता है तो वह है शक्कर। मधुमेह एक ऐसा रोग है, जिसने भारत में कई लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रखा है। बाजार में लो-शुगर के नाम पर कई सारे उत्पाद आजकल मिलने लगे हैं लेकिन फिर भी रोज की खाने वाली चीजों में ऐसी कई सारी चीजें हैं जिनमें अधिक मात्रा में शक्कर पाई जाती है। अगली स्लाइड्स से जानिए किन चीजों में छिपी हुई है शक्कर। 





 

 

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शक्कर और फ्लेवर्ड सिरप डालकर तैयार किया जाता है - फोटो : Social media

फ्लेवर्ड टी
फ्लेवर्ड टी को शक्कर और फ्लेवर्ड सिरप डालकर तैयार किया जाता है। बाजार में मिलने वाली आइस टी के 340 एमएल में 33 ग्राम शुगर हो सकती है। यानी कोक की एक केन के बराबर। वहीं लेमन फ्लेवर्ड आइस टी की एक बॉटल मेें 32 ग्राम तक शक्कर हो सकती है।

 

 

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ब्राउन ब्रेड में भी अतिरिक्त शक्कर हो सकती है - फोटो : social media

ब्रेड
केवल वाइट ब्रेड ही नहीं, मल्टीग्रेन और गेहूं की ब्रेड और ब्राउन ब्रेड में भी अतिरिक्त शक्कर हो सकती है। यदि आपको मधुमेह है तो ब्रेड खरीदने से पूर्व एक बार लेबल की जांच जरूर करें। प्रोसेस्ड ब्रेड की एक स्लाइस में 3 ग्राम तक की शक्कर हो सकती है।

 

 

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मफिन्स केवल केक का दूसरा रूप होते हैं - फोटो : सोशल मीडिया

मफिन्स
कुछ ब्रैंड मफिन्स के अंदर और बाहर कुछ ओट्स का छिड़काव कर देते हैं, इसका अर्थ यह नहीं है कि मफिन स्वास्थ्यवर्धक है। कुछ मफिन्स केवल केक का दूसरा रूप होते हैं जिनमें अधिक शक्कर, कैमिकल्स और ट्रांस फैट हाेते हैं।

 

 

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फलों से फाइबर की मात्रा घट जाती है - फोटो : amar ujala

पैकेज्ड फल
कई जगह फलों को छीलकर शक्करयुक्त सिरप में प्रिजर्व किया जाता है। इस प्रक्रिया में फलों से फाइबर की मात्रा घट जाती है अनावश्यक शक्कर उनमें बढ़ जाती है। वहीं पैकेजिंग के कारण विटामिन सी भी खत्म हो जाता है। ऐसे फल स्वास्थ्य को लाभ नहीं नुकसान पहुंचाते हैं। 

 

 

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1 कप चॉकलेट आइसक्रीम के बराबर है - फोटो : Pixabay

फ्रोजन योगर्ट
बेशक योगर्ट से अच्छी मात्रा में कैल्शियम और प्रोटीन प्राप्त होता है, किंतु 230 एमएल लो फैट योगर्ट में 17 से 33 ग्राम शक्कर मौजूद हो सकती है जो कि1 कप चॉकलेट आइसक्रीम के बराबर है।

 
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शक्कर के साथ ही कैफीन से भी भर देंगे - फोटो : सोशल मीडिया

एनर्जी ड्रिंक और फ्रूट जूस
एनर्जी ड्रिंक्स दावा करते हैं कि ये आपको ऊर्जा से भर देंगे, किंतु साथ ही आपको शक्कर के साथ ही कैफीन से भी भर देंगे। प्रति 200 एमएल में करीब 25 ग्राम तक शक्कर हो सकती है। पैकेज्ड फ्रूट जूस या दुकानाें पर मिलने वाले फलों के रस में मिठास बढ़ाने के लिए ऊपर से शक्कर डाला जाना आम है।

 

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25 ग्राम शक्कर का सेवन किया जा सकता है - फोटो : social media
करना चाहिए इतनी शक्कर का सेवन
भारतीय राष्ट्रीय पोषण संस्थान ने अतिरिक्त शक्कर की सीमा 20 से 25 ग्राम प्रतिदिन निर्धारित की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सामान्य बॉडी मास इंडेक्स वाले व्यक्ति द्वारा अधिकतम 6 छोटे चम्मच यानी 25 ग्राम शक्कर का सेवन किया जा सकता है।
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100 ग्राम- 59 ग्राम शक्कर - फोटो : social media

इनमें होती है इतनी शक्कर-

मूसली
400 ग्राम- 9 छोटे चम्मच शक्कर

बिस्किट
250 ग्राम- 13 चम्मच शक्कर

केचप
1 बड़ा चम्मच- 4 ग्राम शक्कर

किशमिश
100 ग्राम- 59 ग्राम शक्कर

चॉकलेट मिल्क
230 एमएल- 2 चम्मच

पास्ता सॉस
375 ग्राम -9 ग्राम शक्कर 

कोल्डड्रिंक
एक बॉटल- 40 ग्राम यानी 10 चम्मच शक्कर

पैक ऑरेंज जूस
150 एमएल- 13 ग्राम शक्कर

अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

नोट- यह लेख मैक्स हल्थकेयर की डॉक्टर मंजरी चंद्रा कंसल्टिंग न्यूट्रीशनिस्ट से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर मंजरी चंद्रा को पिछले 20 सालों का अनुभव है। उन्होंने अपनी डिग्रियां जी.बी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एवं टेक्नोलॉजी, पंतनगर और अपोलो हॉस्पिटल, हैदराबाद से ली है। 

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