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ढाई साल से नहीं देखा परिवार को, दिन-रात कोरोना मरीजों की कर रही हैं देखभाल

Thu, 13 May 2021 08:28 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना में कर रही हैं दिन-रात सेवा - फोटो : अमर उजाला

जिंसी सारा जेकब, नर्स

उजाला सिग्नस हॉस्पिटल

अनुभव- 20 वर्ष 

कोरोना से युद्ध लड़ने में जिन योद्धाओं का महत्वपूर्ण योगदान है, उसमें एक बड़ा हिस्सा नर्सों का है। भारत में नर्सों को सिस्टर कहा जाता है। अपने इसी संबोधन को नर्स कोरोनाकाल में पूरे समय सार्थक कर रही हैं। वे दिन-रात एक करते हुए पिछले एक साल से अधिक समय से परिवार की तरह मरीजों की देखभाल कर रही हैं। नर्स मरीजों की छोटी-छोटी बातों का जहां ध्यान रखती हैं, वहीं इन दिनों उनके आत्मबल को बढ़ाने में भी कोई कमी नहीं छोड़ रही हैं। अगली स्लाइड्स में उजाला सिग्नस हॉस्पिटल की नर्स से जानिए कोरोनाकाल के उनके अनुभव। 

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उन्हें संभालना जरूरी होता है - फोटो : Pixabay

-पैनिक कर रहे मरीजों की देखभाल आप किस तरह से करते हैं? 
कोरोना की दूसरी लहर में अधिकांश मरीज पैनिक कर रहे हैं। ऐसे में हमें ही उन्हें संभालना होता है। कई बार मरीज अन्य मरीज की स्थिति देखकर भी घबरा जाता है। ऐसे में हम उन्हें समझाते हैं कि सब का शरीर अलग होता है। वो मरीज को पहले से कोई बीमारी होगी या अन्य समस्या होगी इसलिए उसका ऑक्सीजन लेवल गिर रहा है या अन्य समस्या हो रही है। यदि मरीज घबराएंगे तो उनका स्वास्थ्य और भी बिगड़ेगा इसलिए उन्हें संभालना जरूरी होता है।


 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock

-आप अपने परिवार से कब से नहीं मिली हैं?
मेरा परिवार केरल में है, फोन पर बात होती रहती है पर पिछले ढाई वर्ष से मैं अपने परिवार से नहीं मिल सकी हूं। पिछले वर्ष घर जाने के बारे में सोचा था लेकिन सभी दूर कोरोना के फैल जाने से जाना संभव नहीं हो सका। अब जब सब ठीक हो जाएगा, तभी अपने घर जाऊंगी। ऐसे समय अस्पताल में हमारी आवश्यकता है। 

       

 

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कोरोना से डर नहीं लगता - फोटो : iStock

-इतने लंबे समय से आप कोरोना के मरीजों को देख रही हैं, क्या आपको कभी डर लगता है?
नहीं, हमें कोरोना से डर नहीं लगता क्योंकि हम ऐसा ख्याल ही नहीं लाते हैं कि हमें कोरोना हो जाएगा। पिछले एक साल में कई बार मुझे भी ऐसा लगा कि जुकाम हो रहा है बुखार आ रहा है लेकिन एक गोली खाकर हम अस्पताल चले गए, वहां अपना काम करने लगे। काम करते वक्त अपना व टीम की सेहत का पूरे ध्यान रखते हैं। पूरे समय पीपीई किट पहनकर रखते हैं। 

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हमें खूब दुआएं मिलती हैं - फोटो : Pexels.com

-ऐसा पल जब आपको महसूस हुआ कि आपका इस पेशे को चुनना सफल हो गया है?
जब से कोरोना आया है, तब से ऐसे कई सारे पल आए हैं। मरीज जब आता है तब वह बहुत परेशान होता है। अस्पताल में जब उसको इलाज मिलता है, उसकी देखभाल की जाती है तो वह जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं। कई मरीजों की जब छुट्टी की जाती है तो वे हमारे हाथ जोड़ने लगते हैं। हमारी खूब तारीफ करते हैं, हमें खूब दुआएं मिलती हैं। इन सबसे हमें बहुत शक्ति मिलती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock

-कोरोनाकाल के दौरान कोई ऐसा अनुभव जिसने आपको परेशान किया हो?
कई बार जब गंभीर मरीज आते हैं और हम किसी कारण से उन्हें बचा नहीं पाते हैं या फिर इलाज के लिए कोई आवश्यक दवा उन्हें मिल नहीं पाती है तो ऐसे समय हमें बहुत बुरा लगता है। बाकी तो कभी मैं परेशान नहीं होती हूं क्योंकि हम हमारा काम अच्छे से जानते हैं। यदि हम ही परेशान होकर बैठ गए तो मरीजों को कैसे ठीक कर सकेंगे। 

 

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पीपीई किट जरूर पहनकर रखती हूं - फोटो : Pixabay
-खुद की सुरक्षा के लिए क्या करते हैं?
वैसे तो मैं अकेली रहती हूं तो आइसोलेशन की ऐसे कोई दिक्कत नहीं है। फिर भी बाहरी लोगों से सामाजिक दूरी बनाकर रखती हूं। गर्मी हो, चाहे कुछ भी हो पीपीई किट जरूर पहनकर रखती हूं। खाने में लापरवाही नहीं करती हूं। समय पर पौष्टिक आहार लेती हूं। 
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