कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने लोगों के मन में एक डर का माहौल बना दिया है। पहली लहर के विपरीत इस बार स्वस्थ लोग भी संक्रमित हो रहे हैं। इतना ही नहीं संक्रमितों के लक्षणों में भी तेजी से गिरावट देखी जा रही है, जो फिलहाल सबसे ज्यादा चिंता का विषय है। खांसी या बुखार के अलावा इस बार लोग कई असामान्य और अपेक्षाकृत कहीं अधिक जटिल लक्षणों के शिकार हो रहे हैं। कोरोना संक्रमितों में न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं भी काफी ज्यादा देखने को मिल रही हैं।
यदि आपके परिवार या जानने में कोई भी कोरोना से संक्रमित है और उनमें इस तरह के लक्षण ज्यादा दिनों तक बने रहते हैं तो आपको सावधान हो जाने की जरूरत है।
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तंत्रिका संबंधी लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं कोरोना संक्रमित
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अब तक के तमाम अध्ययनों के आधार पर विशेषज्ञों ने बताया है कि सार्स-सीओवी-2 वायरस और इसके म्यूटेशन के कारण संक्रमितों के मस्तिष्क और न्यूरोलॉजिकल गतिविधियों पर भी बुरा प्रभाव देखने को मिल रहा है। इसका असर कम समय या फिर लंबे वक्त के लिए भी हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक कोविड-19 संक्रमित एक तिहाई रोगियों ने कई तरह के तंत्रिका संबंधी लक्षणों का अनुभव किया। इसके दीर्घकालिक प्रभाव के तौर पर भविष्य में लोगों को स्ट्रोक जैसी दिक्कतों का खतरा बढ़ जाता है।
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स्वाद और गंध न आना कोरोना का हो सकता है संकेत
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स्वाद और गंध न आना
गंध और स्वाद न आना, कोरोना के सामान्य लक्षणों में से एक है, लेकिन इसका असर गंभीर भी हो सकता है। पहले इसे ऊपरी श्वसन पथ के लक्षण के रूप में देखा जा रहा था हालांकि नए शोधों से पता चला है कि यह दिक्कत वायरस के मस्तिष्क तक पहुंचने के कारण भी हो सकती है। उदाहरण के लिए घ्राण इंद्रियों और मस्तिष्क के बीच किसी विकृति के कारण सूंघने की शक्ति प्रभावित हो सकती है। संभव है कि यह वायरस इस तरह की दिक्कतें पैदा कर रहा हो।
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कोरोना के कारण लोगों को हो सकती है ब्रेन फॉग या फिर याददाश्त में कमजोरी
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ब्रेन फॉग और भ्रम की स्थिति
अध्ययनों से संकेत मिला है कि कोविड-19 मस्तिष्क पर काफी प्रभाव डाल सकता है, जिसका रोगियों में अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह का असर देखा जा सकता है। ब्रेन फॉग इसी तरह की एक समस्या है। दुनियाभर में 81 फीसदी से अधिक कोविड के रोगियों में ब्रेन फॉग या फिर याददाश्त में कमजोरी से संबंधित दिक्कतें देखी गई हैं। कोविड के गंभीर संक्रमण वाले रोगियों में इसका खतरा अधिक हो सकता है।
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कोरोना में चिंता, घबराहट और चिड़चिड़ापन होना सामान्य
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चिड़चिड़ापन और घबराहट
एक नए नैदानिक विश्लेषण के अनुसार, कोविड-19 के 11 फीसदी से अधिक लोगों को संक्रमण के दौरान चिंता, घबराहट और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं का अनुभव होता है। इसके अलावा जो लोग पहले से ही मानसिक या न्यूरोलॉजिकल रोगों से ग्रसित हैं उनमें लक्षणों के बिगड़ने का जोखिम भी बढ़ जाता है।
कोविड के हल्के या गंभीर लक्षण वाले बरतें विशेष सावधानी
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किन लोगों को न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का ज्यादा खतरा
कोरोना संक्रमण, न्यूरोलॉजिकल जटिलताओं को कैसे जन्म देता है, इस बारे में विशेषज्ञों को पूर्ण जानकारी नहीं है। ऐसे समय में आपके लिए जागरूक रहना सबसे आवश्यक होता है। कई अध्ययनों से पता चला है कि जिन लोगों को कोविड के हल्के या गंभीर लक्षण हों उन्हें न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
------- नोट: यह लेख एम्स की डॉ. रिचा अस्थाना से बातचीत और दुनियाभर में कोरोना को लेकर किए गए तमाम अध्ययनों और मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।