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विशेषज्ञ से जानिए: कोरोना की दूसरी लहर से कैसे अलग हैं तीसरी लहर के लक्षण? संक्रमितों को हो रही हैं ऐसी दिक्कतें

Mon, 17 Jan 2022 02:11 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ओमिक्रॉन संक्रमण के बढ़ते मामले - फोटो : iStock
Medically Reviewed by-
डॉ सौरभ अवस्थी
(श्वांस रोग विशेषज्ञ, इंटेंसिव केयर यूनिट)
नोएडा


भारत सहित दुनियाभर में पिछले दो साल से कोरोना संक्रमण का कहर जारी है। ओमिक्रॉन वैरिएंट, देश में कोरोना की तीसरी लहर का कारण बन रहा है। इससे पहले मई-जून 2021 में डेल्टा वैरिएंट के कारण आई दूसरी लहर में लोगों को कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा था। अध्ययनों में डेल्टा की तुलना में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट को अधिक संक्रामक जरूर माना जा रहा है, हालांकि इस संक्रमण के कारण लोगों में लक्षण हल्के-मध्यम स्तर के ही देखे जा रहे हैं। चूंकि डेल्टा और ओमिक्रॉन की प्रकृति अलग है, यही कारण है कि  कोरोना की दूसरी लहर के मुकाबले तीसरी लहर में अलग तरह के लक्षण देखे जा रहे हैं।

वर्तमान में, दुनिया कोरोनावायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट का संक्रमण झेल रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, इस वैरिएंट से संक्रमण की स्थिति में वैसे तो रोगियों में डेल्टा संक्रमण के जैसे ही लक्षण देखे जा रहे हैं, हालांकि कुछ लोगों में पहले से बिल्कुल अलग लक्षणों के बारे में भी पता चला है। खास बात यह है कि जहां स्वाद-गंध न आने की समस्या डेल्टा से संक्रमितों में मुख्य लक्षण मानी जा रही थी वहीं इस बार लोगों को यह दिक्कत नहीं हो रही है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि कोरोना की इस तीसरी लहर के लक्षण दूसरी लहर से किस तरह से अलग हैं, जिसको लेकर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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ओमिक्रॉन के लक्षण - फोटो : iStock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ सांस रोग विशेषज्ञ डॉ सौरभ अवस्थी बताते हैं, कोरोना की दूसरी और तीसरी लहर, वायरस के दो अलग-अलग वैरिएंट के कारण आई थी, जिनकी प्रकृति एक दूसरे से काफी हद तक भिन्न है। यही कारण है कि इस बार संक्रमितों में पहले से कुछ अलग लक्षण भी देखने को मिल रहे हैं। कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट अपेक्षाकृत अधिक संक्रामक है, यही कारण है कि इससे लोग डेल्टा की तुलना में ज्यादा तेजी से संक्रमित हो रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि जहां डेल्टा वैरिएंट मुख्यरूप से फेफड़ों को लक्षित करता था, वहीं ओमिक्रॉन गले को लक्षित कर रहा है। ऐसे में स्वाभाविक रूप से लक्षण अलग हो जाते हैं।
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डेल्टा संक्रमण का फेफड़ों पर असर - फोटो : iStock
दूसरी लहर का संक्रमण और लक्षण
देश में आई दूसरी लहर के लिए मुख्यरूप से कोरोना के डेल्टा वैरिएंट को जिम्मेदार माना जाता रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि डेल्टा वैरिएंट स्वाभाविक रूप से अधिक गंभीर लक्षण और जटिलताएं पैदा कर सकता है। दूसरी लहर के दौरान लोगों को फेफड़ों से संबंधित समस्याएं अधिक हो रही थीं। इस दौरान संक्रमण की चपेट में आए लोगों को बुखार के साथ सिर और बदन दर्द, नाक बहने, गले में खराश, लगातार खांसी आने और स्वाद-गंध न आने की समस्या हो रही थी।

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ओमिक्रॉन संक्रमण की समस्याएं - फोटो : iStock
तीसरी लहर के लक्षण और गंभीरती
ओमिक्रॉन वैरिएंट को देश में तीसरी लहर का कारण माना जा रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि डेल्टा की तुलना में कोरोना का यह वैरिएंट अधिक संक्रामक तो जरूर है पर यह गंभीर समस्याओं का कारण नहीं बन रहा है। इससे संक्रमण की स्थिति में सिर्फ उन्हीं लोगों में गंभीर लक्षण देखे जा रहे हैं जिनकी इम्युनिटी काफी कमजोर है या जो पहले से ही कोमोरबिडिटी के शिकार हैं। ओमिक्रॉन संक्रमण में कुछ विशिष्ट लक्षणों के बारे में भी पता चला है। इस बार लोगों को बुखार, सिर और बदन दर्द, नाक बहने की दिक्कतों के साथ गले में खरोंच जैसा दर्द, रात को अधिक पसीना आने की समस्या हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक लोगों को इस संक्रमण में स्वाद-गंध न आने जैसी दिक्कत ज्यादा नहीं हो रही।
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तीसरी लहर के लक्षण क्या हैं - फोटो : iStock
ओमिक्रॉन के इन लक्षणों के बारे में भी जानना जरूरी
चूंकि भारत ही नहीं दुनियाभर में इस समय कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट तेजी से बढ़ता जा रहा है, ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को इससे बचाव के उपाय करते रहने की सलाह देते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि ओमिक्रॉन संक्रमितों को त्वचा में चकत्ते और खुजली जैसी समस्या के साथ डेलिरम जैसी मानसिक भ्रम की समस्या भी हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक भले ही तमाम रिपोर्ट्स में ओमिक्रॉन को ज्यादा खतरनाक नहीं बताया जा रहा है, हालांकि इससे भी उसी तरह से बचाव करते रहना चाहिए जैसा कि दूसरी लहर के समय में किया गया था। ओमिक्रॉन के कारण भी संक्रमितों के मौत के मामले सामने आ रहे हैं, ऐसे में इसे हल्के में लेने की गलती भारी पड़ सकती है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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