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Sugar Craving: क्या आपको भी सताती है बार-बार मीठा खाने की तलब? कहीं ये किसी छिपी बीमारी का संकेत तो नहीं

Sat, 18 Apr 2026 07:56 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कुछ लोगों के अचानक से ही बहुत मीठा खाने की तलब लगती है, भले ही थोड़ी मात्रा में, लेकिन मीठा मिल जाने पर ही मन को चैन आता है, लेकिन इसके पीछे के कारण क्या हैं, यह आयुर्वेद में छिपा है।
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मीठा खाने की क्रेविंग? - फोटो : Amarujala.com/AI
अच्छी सेहत चाहते हैं तो डॉक्टर मीठी चीजें, चीनी वाली चीजें कम से कम खाने की सलाह देते हैं। पर क्या कभी आपने गौर किया है कि अचानक आपका मन बहुत ज्यादा मीठा खाने का करने लगता है? खाना खाने के बाद इस तरह की क्रेविंग कुछ ज्यादा ही होने लगती है। मीठी चीजें खाने की बहुत ज्यादा क्रेविंग कहीं किसी स्वास्थ्य समस्या की तरफ संकेत तो नहीं है?

मीठा खाना सभी को पसंद है और खाना खाने के बाद अचानक मीठा खाने की क्रेविंग बढ़ जाती है। इस क्रेविंग को लोग सामान्य समझते हैं, लेकिन यह सामान्य नहीं बल्कि शरीर के भीतर की समस्या और हार्मोन असंतुलन की तरफ संकेत हो सकती है।

मेडिकल साइंस और आयुर्वेद दोनों ने इसे सेहत के लिए नुकसानदायक सिग्नल माना है। अगर आपको भी बार-बार मीठे की क्रेविंग होती है तो थोड़ा सावधान हो जाने की जरूरत है।
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ज्यादा मीठी चीजें खाने की इच्छा - फोटो : Freepik.com
मीठा खाने की बहुत ज्यादा तलब

मीठा खाने की इच्छा बार-बार होना सिर्फ आदत नहीं है, यह शरीर की गड़बड़ियों को दिखाता है। इसमें थोड़ी मात्रा भी मीठी चीज मिल जाए तो इससे मन को शांति मिल जाती है। अगर बार-बार ऐसी इच्छा हो रही है, तो यह शरीर के असंतुलन के संकेत हैं। 
 
  • जब शरीर के भीतर सभी हार्मोन संतुलित रहते हैं, तो किसी भी स्वाद की तलब नहीं लगती है, चाहे वह मीठा हो या फिर खट्टा। 
  • शरीर और मन भूख लगने पर खाने के संकेत देते हैं, किसी एक निश्चित स्वाद के नहीं।

अध्ययनों में पाया गया है कि बार-बार मीठा खाने की इच्छा कभी-कभी शरीर में शुगर लेवल के असंतुलन, हार्मोनल बदलाव या यहां तक कि कुछ बीमारियों का संकेत भी हो सकती है। अगर आपको दिन में कई बार मीठा खाने का मन करता है और आप इसे कंट्रोल नहीं कर पा रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है।
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प्री-डायबिटीज का खतरा - फोटो : Adobe Stock
आखिर क्या हैं इसके कारण?

अध्ययनों से पता चलता है कि प्री-डायबिटीज की स्थिति में इस तरह की दिक्कत अधिक देखी जाती है। ब्लड शुगर का उतार-चढ़ाव के कारण आपको मीठी चीजें खाने की तेज इच्छा हो सकती है।  
 
  • जब आप ज्यादा देर तक भूखे रहते हैं या हाई कार्ब डाइट लेते हैं, तो ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है, जिससे शरीर तुरंत मीठा मांगता है।
  • इसके अलावा जब आप तनाव में होते हैं, तो शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है। इसके कारण भी शुगर और जंक फूड्स खाने की इच्छा बढ़ने लगती है।
  • नींद की कमी के कारण भूख बढ़ाने वाले हार्मोन घ्रेलिन बढ़ जाते हैं और मीठी चीजें खाने की इच्छा काफी बढ़ने लगती है। 

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मीठी चीजें खाने का क्यों मन करता है? - फोटो : Adobe stock
क्या कहता है आयुर्वेद

आयुर्वेद में इसे वात और पित्त का असंतुलन माना जाता है। शरीर में जब दोनों दोष असंतुलित हो जाते हैं, तो मीठे खाने की इच्छा प्रबल होती है।
 
  • यह शरीर की कमजोरी का कारण भी बनता है, क्योंकि रोजाना मीठा खाने से मन तो शांत रहता है लेकिन शरीर धीरे-धीरे कमजोर महसूस करने लगता है। शरीर में ऊर्जा की कमी या बीपी कम होने पर मीठा खाने की इच्छा बढ़ने लगती है।
  • मीठा शरीर को ऊर्जा देता है और भूख को कम करता है। इसके साथ ही मैग्नीशियम की कमी भी इसके पीछे का बड़ा कारण है।
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मीठे की क्रेविंग क्यों होती है? - फोटो : Freepik.com
कैसे कंट्रोल करें मीठा खाने की आदत

मीठा खाने की आदत को कंट्रोल करना जरूरी है क्योंकि शुगर की ज्यादा क्रेविंग आपके लिए कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ाने वाली हो सकती है।
 
  • अपनी डाइट में सुधार करें। प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स शामिल करने से ब्लड शुगर स्थिर रहता है और क्रेविंग कम होती हैं।
  • दिनभर में छोटे-छोटे मील्स लें, ताकि भूख ज्यादा न लगे। लंबे समय तक खाली पेट रहने से मीठा खाने की इच्छा बढ़ जाती है।
  • मीठा खाने की इच्छा होने पर आप हेल्दी विकल्प जैसे फल, खजूर या डार्क चॉकलेट खा सकते हैं।
  • अगर ये समस्या आपके कंट्रोल से बाहर जा रही है तो समय रहते डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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