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Intermittent Fasting: क्या जानलेवा हो सकती है इंटरमिटेंट फास्टिंग? अध्ययन की रिपोर्ट ने खड़े किए कई सवाल

Mon, 08 Jul 2024 10:12 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्वस्थ आहार - फोटो : istock
वजन घटाने, कोलेस्ट्रॉल-शुगर को कंट्रोल रखने के लिए दुनियाभर में कई तरह की फास्टिंग  का चलन तेजी से बढ़ा है। बड़ी संख्या में लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग का रुख कर रहे हैं। ये उपवास का ऐसा तरीका है जिसमें  निश्चित समय के दौरान पौष्टिक चीजों का सेवन करना होता है। उदाहरण के लिए अगर आप इंटरमिटेंट फास्टिंग कर रहे हैं तो 24 घंटे के दौरान 16 घंटे उपवास करने और करीब 8 घंटे में कुछ हल्का खाने की सलाह दी जाती है। हालांकि सभी लोगों के लिए इस तरह की फास्टिंग फायदेमंद हो ऐसा जरूरी नहीं है। हालिया अध्ययन में इंटरमिटेंट फास्टिंग को लेकर शोधकर्ताओं ने बड़ा दावा किया है।

शोध में वैज्ञानिकों ने कहा, वैसे तो इंटरमिटेंट फास्टिंग को कई प्रकार से लाभकारी माना जाता रहा है, हालांकि यदि आपको हृदय रोग है और आप इस तरह का उपवास करते हैं तो ये जानलेवा जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है कि खुद से ही किसी प्रकार की फास्टिंग न शुरू करें। अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए डॉक्टर की सलाह पर ही किसी उपवास विधि को अपनाना चाहिए।
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Heart - फोटो : istock
इंटरमिटेंट फास्टिंग को लेकर शोध

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के सम्मेलन में प्रस्तुत शोधपत्र ने इंटरमिटेंट फास्टिंग को लेकर कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। समाचार विज्ञप्ति में बताया गया है कि जिन लोगों को हार्ट की समस्या है उनके लिए इस तरह का उपवास करना हृदय संबंधी मृत्यु खतरे को 91% तक बढ़ा देता है। 

इंटरमिटेंट फास्टिंग को लेकर किए गए अब तक के अध्ययनों के रिपोर्ट काफी विरोधाभासी प्रतीत होती है। पहले के शोध में कहा जाता रहा था कि फास्टिंग का ये तरीका इंसुलिन संवेदनशीलता, सूजन, मोटापा और कोलेस्ट्रॉल जैसे हृदय रोगों के कारकों को कम करने में लाभकारी है, हालांकि हालिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इस तरह की फास्टिंग हृदय रोगों से मौत के जोखिमों को बढ़ा सकती है। 
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हृदय स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : istock
एएचए के रिपोर्ट की मुख्य बातें

सम्मेलन में प्रस्तुत शोध पत्र के निष्कर्षों पर नजर डालें तो पता चलता है कि पहले से ही कुछ प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के शिकार लोगों के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग के नुकसान हो सकते हैं। अध्ययन के मुताबिक ये हृदय रोग या कैंसर से पीड़ित लोगों में हृदय संबंधी मृत्यु का जोखिम भी बढ़ाने वाली ही सकती है। हृदय रोग से पीड़ित लोगों में फास्टिंग का ये तरीका हार्ट अटैक या स्ट्रोक से मृत्यु का जोखिम 66% तक बढ़ाने वाली हो सकती है। 

हालांकि अध्ययन की इस रिपोर्ट पर कई विशेषज्ञों ने आपत्ति भी जताई है।

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इंटरमिटेंट फास्टिंग - फोटो : istock
विशेषज्ञों ने जताई आपत्ति

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में चिकित्सा के प्रोफेसर और पोषण विशेषज्ञ क्रिस्टोफर गार्डनर पीएचडी कहते हैं कि ये निष्कर्ष समय से पहले और भ्रामक हैं। अध्ययन समूह में जिन लोगों को शामिल किया गया था उनमें पुरुषों, अफ्रीकी अमेरिकियों और धूम्रपान करने वालों की संख्या अधिक थी, जिनमें पहले से ही हृदय रोग और इससे मौत का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। 

प्रो. गार्डनर कहते हैं, इसके अलावा, जांचकर्ताओं के पास शिफ्ट वर्क, तनाव और अन्य डेटा की भी कमी है। ऐसे में सिर्फ इंटरमिटेंट फास्टिंग को ही मृत्यु के लिए जोखिम कारक नहीं माना जा सकता है। 
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Diet, eating - फोटो : istock
शोध की प्रमाणिकता पर सवाल

कनाडा के प्रसिद्ध नेफ्रोलॉजिस्ट और इंटरमिटेंट फास्टिंग पर किताब लिखने वाले डॉ जेसन फंग ने भी अध्ययन की रिपोर्ट पर प्रश्नचिन्ह लगाए हैं। वह कहते हैं, किसी खास आबादी के परिणामों के आधार पर ये निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता है। इसकी पुष्टि के लिए और अधिक अध्ययनों की आवश्यकता है। 

हालांकि एक बात जरूर है कि किसी फास्टिंग का तरीका सभी लोगों पर फिट हो ऐसा भी जरूरी नहीं है इसलिए बिना पूरी जांच और डॉक्टरी सलाह के ऐसे तरीकों को अपनाने से बचा जाना चाहिए। 


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स्रोत और संदर्भ
8-hour time-restricted eating linked to a 91% higher risk of cardiovascular deat

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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