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अध्ययन में दावा: संक्रमण के कारण कम उम्र में ही हो सकती हैं बुढ़ापे वाली समस्याएं, रोग से ठीक होने का रफ्तार भी काफी धीमा

Sat, 07 May 2022 07:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के कारण तेजी से बढ़ सकती है उम्र - फोटो : iStock
वैश्विक स्तर पर पिछले दो साल से अधिक समय से जारी कोरोना संक्रमण के चलते लोगों को कई तरह की सामाजिक और सेहत से संबंधित परेशानियां झेलनी पड़ी हैं। महामारी की शुरुआत में जहां वायरस को सांस की बीमारी से जोड़कर देखा जा रहा था, वहीं समय के साथ सामने आए कोरोना के तमाम वैरिएंट्स ने जिस तरह से शरीर के कई अंगों पर प्रभाव डाला है, उसने विशेषज्ञों की चिंता जरूर बढ़ा दी है। कोरोना संक्रमण के कारण लोगों को मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा। अध्ययनों में इसके दीर्घकालिक गंभीर प्रभावों के बारे में भी पता चलता है। वहीं हाल ही में हुए एक शोध में वैज्ञानिकों ने कोरोना संक्रमण के कारण बढ़ती एक और गंभीर समस्या को लेकर लोगों को आगाह किया है। 

यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज के वैज्ञानिकों द्वारा संक्रमण के दुष्प्रभाव और इससे जनित दीर्घकालिक समस्याओं को जानने के लिए अध्ययन किया गया। इस शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि कोरोना का संक्रमण लोगों में तेजी से उम्र बढ़ने का कारण बन सकता है। इस आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि यह लोगों में कम उम्र में ही बुढ़ापे के लक्षणों को प्रकट करने का कारण बन सकती है। आइए आगे इस शोध के बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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कोविड-19 बढ़ा सकती है तेजी से उम्र - फोटो : iStock
कम उम्र में ही बुढ़ापे जैसी समस्याएं

क्लिनिकल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि सार्स-सीओवी-2 वायरस के कारण उम्र बढ़ने की प्रक्रिया काफी तेज हो गई है। इसके अलावा वायरस ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इसका असर लोगों को आईक्यू लेवल पर भी देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि तमाम हालिया अध्ययन इस बात की तरफ संकेत करते हैं कि कोरोना वायरस को सीमित रूप से वर्णित नहीं किया जा सकता है। यह संक्रमण, के अलावा इंसानों को कई तरह से प्रभावित कर रहा है।  
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कोविड-19 की समस्याओं को जानिए - फोटो : PTI
अध्ययन में क्या पता चला?

यूनिवर्सिटी ऑफ कैंब्रिज और इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा किए गए अध्ययन में 46 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। कई स्तर पर किए गए इस शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि प्रतिभागियों में संज्ञानात्मक हानि और कई उस तरह की मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं भी देखी गईं जो आमतौर पर  50 से 70 वर्ष की आयु वाले लोगों में देखा जाता रहा है। शोधकर्ताओं ने पाया कि संक्रमितों में यह वायरस आईक्यू लेवल में गिरावट का भी कारण बन रहा है। ज्यादातर प्रतिभागियों में अपने उम्र की तुलना में 10 आईक्यू प्वाइंट्स की कमी देखी गई। 

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कॉगनेटिव समस्याओं के बढ़ते मामले - फोटो : istock
क्या कहते हैं शोधकर्ता

अध्ययन के बारे में प्रमुख शोधकर्ता और इंपीरियल कॉलेज लंदन के प्रोफेसर एडम हैम्पशायर कहते हैं, इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि संक्रमण के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं के अलावा कोरोना वायरस लोगों के कॉगनेटिव समस्याओं का भी कारण बन रहा है। यह समस्या उन प्रतिभागियों में भी देखी जा रही है जिनको संक्रमण के दौरान अस्पताल में भर्ती होने की भी आवश्यकता नहीं पड़ी थी। इस खतरे को ध्यान में रखते हुए हमें तत्काल इस बारे में प्रयास करने की आवश्यकता है जिससे ऐसे लोगों की मदद की जा सके। 
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कोविड-19 और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं - फोटो : Pixabay
न्यूरोलॉजिकल रोगों के संकेत

अध्ययन के एक अन्य लेखक  प्रोफेसर डेविड मेनन कहते हैं, इसके पहले के शोध में भी इस बात के संकेत मिले थे कि कोरोना वायरस मानसिक स्वास्थ से संबंधित और कई तरह की न्यूरोलॉजिकल स्वास्थ्य की समस्याओं को बढ़ा रहा है। मस्तिष्क संबंधी इन विकारों  की  एक विस्तृत श्रृंखला हो सकती है। अगर समय रहते इन पर ध्यान न दिया जाए तो कम उम्र में ही लोगों में अल्जाइमर जैसे न्यूरोलॉजिकल रोगों के मामले देखने को मिल सकते हैं, जो आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होते रहे हैं। 
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कोविड-19 की गंभीरता को समझिए - फोटो : Pixabay
 क्या है अध्ययन का निष्कर्ष

अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों का कहना है कि ज्यादातर प्रतिभागी करीबन 10 माह पहले कोरोना संक्रमित रह चुके हैं। हालांकि अब भी उनमें रोग से ठीक होने की रफ्तार काफी कम ही देखने को मिल रही है। जिस तरह के संकेत मिल रहे हैं उससे यह भी आशंका है कि कई लोगों को ठीक होने में बहुत लंबा समय भी लग सकता है। फिलहाल इस अध्ययन से यह समझ में आता है कि कोरोना संक्रमण के कारण लोगों में कम उम्र में ही बुढ़ापे जैसी कई तरह की समस्याओं का जोखिम बढ़ गया है।  


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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