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सलाह: कोरोना ने बढ़ा दी है अवसाद की समस्या? अध्ययन आधारित इन खाद्य पदार्थों से मिलेगा शीघ्र लाभ

Mon, 21 Jun 2021 08:08 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अवसाद की बढ़ती समस्या (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दुनियाभर में अवसाद के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं जोकि गंभीर चिंता का विषय है। कोरोना की विपरीत परिस्थियों के चलते इस गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या के मामले भी तेजी से बढ़े हैं। दूसरी लहर में संक्रमण के कारण फेफड़ों और हृदय संबंधी रोगों में बढ़ोतरी के साथ कई लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर देखा जा रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में मौत के काफी ज्यादा मामले देखे गए। अपने आसपास लोगों को मरते देख और चारो तरफ फैली नकारात्मकता का असर स्पष्टतौर पर लोगों में तनाव, अवसाद और चिड़चिड़ेपन के रूप में देखा जा रहा है।
अवसाद को मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए डब्ल्यूएचओ ने इसके उपचार और नियंत्रण के उपायों पर जोर दिया है। अवसाद, व्यक्ति के जीवन को कई तरह से प्रभावित कर सकता है। कई चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से इसका उपचार किया जा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक रोगी में अवसाद के कारणों और उसकी गंभीरता को देखते हुए उपचार के तरीकों को प्रयोग में लाया जाता है। इस लेख में हम अध्ययन आधारित ऐसे ही खाद्य पदार्थों के बारे में जानेंगे जिनका सेवन आपको इस समस्या से छुटकारा दिला सकता है।
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चिकन खाने के फायदे - फोटो : Social media
चिकन
डिप्रेशन को दूर करने में मांसाहार, विशेषरूप से चिकन का सेवन लाभदायक माना जाता है। पबमेड सेंट्रल में "डाइटरी सेलेनियम एंड मेजर डिप्रेशन" नाम से प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, शरीर में सेलेनियम की कमी अवसाद के जोखिमों को बढ़ा देती है। चिकन और अन्य प्रकार के लीन मीट के माध्यम से इसकी आसानी से पूर्ति की जा सकती है। जिन लोगों को डिप्रेशन की शिकायत है उन्हें चिकन का सेवन जरूर करना चाहिए।
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जामुन, अवसाद को कम करने में सहायक - फोटो : getty images
जामुन
जामुन को एंटीऑक्सिडेंट का एक समृद्ध स्रोत माना जाता है। एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन डिप्रेशन कारकों को कम करने में मददगार है। जर्नल ऑफ न्यूट्रिशनल एंड एनवायरनमेंटल मेडिसिन में "चिंता और अवसाद के लक्षणों पर एंटीऑक्सीडेंट का प्रभाव'' नाम से प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक एंटी-ऑक्सीडेंट मूड को ठीक करने के साथ तनाव और अवसाद के लक्षणों के नियंत्रित करने में काफी मददगार हो सकते हैं।

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रोजाना करें दूध का सेवन - फोटो : iStock
दूध 
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों में विटामिन डी की कमी या अपर्याप्तता होती है उनमें अवसाद होने का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोगों के लिए रोजाना दूध पीना फायदेमंद हो सकता है। पबमेड सेंट्रल में प्रकाशित अध्ययन में दूध को अवसाद रोगियों के लिए काफी फायदेमंद बताया गया है। अध्ययन में बताया गया है कि दूध एक सुपरफूड और विटामिन डी का अच्छा स्रोत है। अवसाद के शिकार लोगों को इसे आहार में जरूर शामिल करना चाहिए।
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सी फूड के लाभ - फोटो : social media
सी फूड
सी फूड को ओमेगा-3 फैटी एसिड का अच्छा स्रोत माना जाता है, यह पोषक तत्व अवसाद के शिकार लोगों के लक्षणों को कम करने में सहायक हो सकता है। इसी से संबंधित नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार ओमेगा-3 पॉलीअनसेचुरेटेड फैटी एसिड अवसाद के उपचार और इसके लक्षणों को नियंत्रित करने में काफी सहायक माना जाता है। अवसाद के शिकार लोगों को आहार के माध्यम से ओमेगा-3 फैटी एसिड प्राप्त करने के उपायों पर जोर देना चाहिए।

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नोट: यह लेख अवसाद को कम करने के उपायों पर हुए तमाम अध्ययनों के आधार पर तैयार किया गया है। अध्ययन संलग्न हैं।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
 
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