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अलर्ट: स्कूलों में बढ़ते कोरोना के मामले डराने वाले, विशेषज्ञों की सलाह- इन बातों का खास ख्याल रखें माता-पिता

Thu, 14 Apr 2022 08:54 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बच्चों में कोरोना संक्रमण के मामले (सांकेतिक) - फोटो : i stock
दिल्ली-एनसीआर के कई स्कूलों में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। एक समय जब ऐसा लगने लगा था कि अब स्थिति सामान्य होने लगी है, इसी बीच नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों का संक्रमित पाया जाना कई स्तर पर मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले तीन दिनों में नोएडा के चार स्कूलों में 23 से ज्यादा बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। ऐसी ही खबरें गाजियाबाद और दिल्ली के कुछ स्कूलों से भी मिल रही हैं। एहतियात के तौर पर कई स्कूलों ने कुछ दिनों की छुट्टी, जबकि कुछ में दोबारा से ऑनलाइन क्लास शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

वैश्विक स्तर पर कोरोना संक्रमण की खबरों के बीच देश में भी दोबारा से बढ़ते केस ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं बच्चों को स्कूल भेजते समय माता-पिता को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों में बढ़ते संक्रमण के मामले दूसरे राज्यों के लिए भी अलार्मिंग हैं, सभी अभिभावकों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। आइए जानते हैं कि इन दिनों बच्चों को स्कूल भेजते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
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बच्चों में गंभीर संक्रमण का जोखिम कम - फोटो : istock
बच्चों में कोरोना संक्रमण का जोखिम
संक्रमण के जोखिमों के बारे में अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने बच्चों में कोविड-19 के जोखिम को लेकर बड़ा दावा किया है। जामा पीडियाट्रिक्स जर्नल में प्रकाशित एक शोध में विशेषज्ञों ने बताया कि 5 साल से कम आयु वाले बच्चों में डेल्टा वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन से संक्रमण की स्थिति में गंभीरता का खतरा कम पाया गया है। बच्चे अगर संक्रमित हो भी जाते हैं तो इनमें रोग की गंभीरता का जोखिम कम देखा गया है। हालांकि, बच्चे संक्रमण का वाहक हो सकते हैं, ऐसे में माता-पिता को इनकी सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
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कोविड-19 से सुरक्षा बहुत जरूरी - फोटो : पिक्साबे
बच्चों को सिखाएं संक्रमण से बचाव के तरीके
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह हर माता-पिता की विशेष जिम्मेदारी है कि इस समय वह स्कूल भेजते समय बच्चों को कोरोना संक्रमण से बचाव के तरीकों के बारे में विस्तृत जानकारी दें। स्कूल में मास्क कैसे पहनना है, सोशल डिस्टेंसिंग, हाथों की साफ-सफाई की जरूरत और फायदों के बारे में बच्चों को जरूर सिखाया जाना चाहिए। स्कूल प्रशासन भी सुनिश्चित करे कि बच्चों के बीच आपसी दूरी बनी रहे और किसी भी तरह से कोरोना के संभावित खतरों से बचाव किया जा सके। 

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बच्चों में कोरोना संक्रमण के लक्षण - फोटो : iStock
लक्षण हैं तो न भेजें स्कूल
विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि आपके बच्चे में सर्दी-खांसी, बुखार या कोरोना संक्रमण के कोई भी संभावित लक्षण हैं तो उन्हें स्कूल न भेजें। लगातार लक्षणों की बारीकी से निगरानी करते रहें, अगर समस्या बढ़ रही है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए यह कदम बहुत आवश्यक है। चूंकि बच्चे स्वयं से ख्याल नहीं रख पाते हैं, ऐसे में मास्क और हाथों की स्वच्छता को लेकर विशेष जागरूकता दिखाने की आवश्यकता है।
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किन स्थितियों में गंभीर संक्रमण का जोखिम - फोटो : iStock
इन स्थितियों में रहे विशेष सावधान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिन बच्चों को पहले से ही अस्थमा, सांस की दिक्कत या कमजोर इम्युनिटी की दिक्कत है, उन्हें कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच स्कूल न भेजें। ऐसे बच्चों में संक्रमण का खतरा अन्य की तुलना में अधिक हो सकता है। इसके अलावा ये स्वास्थ्य स्थितियां रोग की गंभीरता का भी कारण बन सकती हैं, ऐसे में इन बच्चों की सेहत को लेकर माता-पिता को खासा ध्यान देते रहने की आवश्यकता है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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