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Summer Health: 8-10 घंटे एसी में रहते हैं तो जरूर जान लें ये बातें, कहीं बीमार न हो जाएं आप

Fri, 23 May 2025 09:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, एसी हवा में मौजूद नमी को सोख लेती है जिससे वातावरण शुष्क हो जाता है। लगातार इस तरह के वातावरण में रहने से त्वचा-आंखों, सांस सहित कई तरह की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। 
 
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एसी में रहते हैं तो जान लीजिए ये बातें - फोटो : Freepik.com
देश के ज्यादातर राज्य इन दिनों भीषण गर्मी-लू का प्रकोप झेल रहे हैं। कई राज्यों में पारा 40 के ऊपर बना हुआ है, मौसम विभाग ने आशंका जताई है कि आने वाले दिनों में नौतपा के कारण तापमान 45 से भी ऊपर जा सकता है। इस तरह की भीषण गर्मी से बचे रहना बहुत जरूरी है। तेज धूप या गर्मी में रहना आपकी सेहत को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है।

गर्मी से बचे रहने के लिए एयर कंडीशनर (एसी) के इस्तेमाल को एक प्रभावी तरीका माना जाता है। ये न सिर्फ आपके कमरे के तापमान को ठीक रखने में मदद करता है, साथ ही आपको लू से भी बचाता है।

पर क्या आप जानते हैं कि एसी का भी बहुत ज्यादा इस्तेमाल आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है?
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एसी वातावरण को बना देता है शुष्क - फोटो : Adobe Stock
एसी में लंबे समय तक रहना नुकसानदायक

भीषण गर्मी के दिनों में  एसी हमें आरामदायक वातावरण प्रदान करता है, लेकिन अगर आप भी दिनभर एसी में ही रहते हैं तो इसके दुष्प्रभावों को भी जरूर जान लीजिए। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, एसी हवा में मौजूद नमी को सोख लेती है जिससे वातावरण शुष्क हो जाता है। लगातार इस तरह के वातावरण में रहने से त्वचा-आंखों, सांस सहित कई तरह की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इतना ही नहीं जिन लोगों को पहले से ही इससे संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं हैं उनके लिए एसी का अधिक इस्तेमाल और भी दिक्कतें बढ़ाने वाला हो सकता है।
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ड्राई आइज की दिक्कत - फोटो : Freepik.com
त्वचा और आंखों के लिए नुकसानदायक

गर्मी के दिनों में एसी आपके शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने में जरूर सहायक है, पर एसी में लंबे समय तक रहने के कारण त्वचा और आंखों से संबंधित समस्याएं बढ़ सकती हैं। 

एसी के कारण वातावरण में हुई शुष्की के कारण त्वचा और आंखों में ड्राइनेस का खतरा बढ़ सकता है। जर्नल ऑफ इंन्वायरमेंटल हेल्थ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, एसी वाले स्थान या शुष्क वातावरण में लगातार रहने से त्वचा की नमी में 30-40% की कमी आ सकती है। 

अक्सर एसी में ही रहने वालों को त्वचा में खुजली-जलन, आंखों में जलन और सूखापन (ड्राई आइज की दिक्कत) हो सकती है।

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अस्थमा-सांस की समस्या - फोटो : Adobe Stock
सिरदर्द और सांस की समस्या

ठंडी और कृत्रिम हवा से शरीर की प्राकृतिक तापमान-संतुलन प्रक्रिया प्रभावित होती है। इससे रक्तसंचार धीमा हो सकता है और सिरदर्द या थकान महसूस हो सकती है। जिन लोगों को पहले से माइग्रेन की दिक्कत रही है, अगर वो ज्यादा समय तक एसी में रहते हैं तो इससे माइग्रेन ट्रिगर हो सकता है।

इसके अलावा एसी में ज्यादा देर तक रहना, शुष्क वातावरण के कारण सांस की समस्याओं जैसे अस्थमा-ब्रोंकाइटिस को ट्रिगर कर सकती है। अगर एसी की नियमित सफाई न हो तो उसमें फफूंदी, धूल और बैक्टीरिया पनप सकते हैं जो सांस की दिक्कतें बढ़ा देते हैं। 
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एसी में रहते हैं ये जान लीजिए ये बातें - फोटो : Freepik
कुछ सावधानियां जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, एसी में लंबे समय तक रहने से जोड़ों और मांसपेशियों में जकड़न बढ़ने का भी खतरा रहता है। इसके अलावा लगातार कृत्रिम वातावरण में रहने से शरीर का तापमान नियंत्रण तंत्र कमजोर होता है, जिससे इम्यून सिस्टम पर असर पड़ता है। अगर गर्मी से बचे रहने के लिए आप एसी में रह रहे हैं तो कुछ सावधानियां जरूर बरतें। 
  • कमरे में ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें।
  • एलोवेरा प्लांट रखें जो नमी बनाए रखने में मदद करता है।
  • AC का आदर्श तापमान 24-26°C होना चाहिए।
  • हर 1-2 घंटे में ब्रेक लें, बाहर निकलें या कम से कम कमरे की खिड़की खोलें।
  • एसी की की नियमित सफाई कराएं। 
  • इसके अलावा दिनभर खूब पानी पिएं। डिहाइड्रेशन आपकी समस्याओं को और बढ़ाने वाली हो सकती है।


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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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