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Health Alert: क्या कॉटन वाले ईयरबड्स से कान साफ करना सुरक्षित है? ईएनटी विशेषज्ञ ने दी सारी जानकारी

Sun, 08 Mar 2026 06:49 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बहुत से लोग कानों की सफाई के लिए रोजाना कॉटन वाले प्लग यानी ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं।  हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि कान के अंदर कॉटन प्लग डालना आपके लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है। आइए इस बारे में जान लेते हैं।
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कानों की साफ-सफाई के लिए कॉटन वाले प्लग - फोटो : Freepil.com
हमारे शरीर का मैकेनिज्म ऐसा है कि वह खुद ही अपनी देखभाल कर लेता है। शरीर में कोई अपशिष्ट जमा न होने पाए इसके लिए मल-मूत्र के माध्यम से गंदगी बाहर निकालता रहता है। हालांकि शरीर की बाहरी साफ-सफाई को लेकर हमें अलर्ट रहना चाहिए। कानों की साफ-सफाई का हम सभी को ध्यान रखना चाहिए ताकि इस नाजुक और संवेदनशील अंग में संक्रमण न हो या इसे किसी तरह का कोई नुकसान न होने पाए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो हमारे कान खुद को साफ रखने की प्राकृतिक क्षमता रखते हैं। हालांकि कई लोग अक्सर कानों की सफाई के लिए कॉटन वाले प्लग यानी ईयरबड्स का इस्तेमाल करते हैं। इसकी मदद से कान में बनने वाला ईयरवैक्स निकालते हैं। पर क्या ये तरीका सुरक्षित है, क्या इस तरह के ईयर प्लग का इस्तेमाल करना सुरक्षित है? 

आइए इस बारे में विशेषज्ञों से समझ लेते हैं।
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कानों को साफ रखने के लिए ईयर प्लग का इस्तेमाल - फोटो : Adobe Stock
कान की साफ-सफाई को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
 
दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ ईएनटी विशेषज्ञ डॉ कमलेश अवस्थी बताते हैं, कान में बनने वाले ईयरवैक्स को भले ही हम गंदगी समझते रहते हैं, पर असल में ये कानों के लिए सुरक्षाकवच जैसा है जो गंदगी, बैक्टीरिया और धूल को अंदर जाने से रोकता है। 
 
  • जब हम कॉटन प्लग से कान साफ करने की कोशिश करते हैं तो अक्सर गंदगी को बाहर निकालने के बजाय उसे और अंदर धकेल देते हैं। 
  • इतना ही कान बेहद संवेदनशील होते हैं, ऐसे में कानों में किसी भी तरह की नुकीली या कॉटन वाली चीज डालना नुकसानदेह हो सकता है। 
  • इससे जाने-अनजाने कान के नाजुक हिस्सों में चोट या कट लग सकता है, इससे कान में संक्रमण का भी खतरा हो सकता है।
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कॉटन प्लग से कान साफ करने की आदत - फोटो : Freepil.com
कॉटन प्लग के बार-बार इस्तेमाल से क्या दिक्कतें हो सकती हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कॉटन प्लग से कान साफ करने की आदत कई मायनों में ठीक नहीं है। इससे कई तरह के खतरे हो सकते हैं। 
  • डॉक्टर कहते हैं, जब हम कॉटन वाले प्लग से कान साफ करते हैं तो अक्सर वैक्स बाहर निकलने के बजाय कान के अंदर की ओर चला जाता है।
  • इससे वैक्स जमा होकर ब्लॉकेज बना सकता है।
  • ब्लॉकेज होने पर कान बंद-बंद लगने, सुनाई कम देने जैसी कई समस्याएं हो सकती हैं।

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कान में होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepil.com
कान के नाजुक हिस्सों में चोट लगने का खतरा

डॉ कमलेश बताते हैं, कान सिर्फ सुनने में ही मदद नहीं करते, ये हमारे शरीर का बैलेंस बनाए रखने के लिए भी जरूरी हैं। यही कारण है कि कानों में किसी तरह की चोट या दिक्कत होने की वजह से कभी-कभी चक्कर आने और संतुलन से संबंधित समस्याएं हो सकती है। ईयरवैक्स निकालने के चक्कर में अक्सर हम सभी ये समस्या मोल ले लेते हैं।
 
  • कान के अंदर की त्वचा बहुत पतली और संवेदनशील होती है। कॉटन प्लग डालते समय हल्की सी गलती भी अंदर खरोंच या चोट पैदा कर सकती है।
  • यदि कान में चोट या कट लग जाए तो वहां बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
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कान का रखें खास ध्यान - फोटो : Adobe Stock Images
इन बातों को जानना भी जरूरी 
 
  • कानों की साफ-सफाई करते समय अगर कॉटन प्लग ज्यादा अंदर चला जाए तो यह कान के पर्दे को नुकसान पहुंचा सकता है। 
  • डॉ कमलेश बताते हैं, कई मामलों में यह देखा गया है कि ईयरबड्स के इस्तेमाल के दौरान गलती से कोई ठोकर लग जाए तो पर्दा फटने तक का खतरा हो सकता है।
  • जब हम बार-बार कॉटन प्लग इस्तेमाल करते हैं तो इससे कान में सूखापन, खुजली और बार-बार वैक्स बनने की समस्या हो सकती है।

डॉक्टर कहते हैं, कानों की सफाई के लिए कॉटन वाले प्लग इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। कानों को असल में इस तरह से साफ करने की जरूरत भी नहीं होती है। अगर कान में वैक्स ज्यादा जमा हो जाए, दर्द हो या सुनाई कम दे तो बेहतर है कि किसी डॉक्टर से सलाह ले लें। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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