फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

असुरक्षित यौन संबंध से होती है ये बीमारी, लक्षणों पर नहीं दिया ध्यान तो हो सकते हैं गंभीर परिणाम

Sun, 01 Dec 2019 07:02 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एमजी वो संक्रामक यौन बीमारी है, जिस पर अगर ध्यान न दिया गया तो यह अगला सुपरबग साबित हो सकती है। दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ ये चेतावनी दे रहे हैं। आम तौर पर माइकोप्लाज़्मा जेनिटेलियम (एमजी) के कोई शुरुआती लक्षण नहीं होते, लेकिन इससे महिलाओं और पुरुषों, दोनों के जननांगों में संक्रमण हो सकता है। ये इतना ख़तरनाक है कि इससे औरतों में बांझपन भी हो सकता है।
विज्ञापन

2 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एमजी के शुरुआती लक्षण आसानी से समझ में नहीं आते इसलिए इसका इलाज भी मुश्किल है और अगर इलाज ठीक से न हो तो इस पर एंटीबायोटिक्स भी बेअसर हो सकता है। 'ब्रिटिश असोसिएशन ऑफ़ सेक्शुअल हेल्थ ऐंड एचआईवी' ने हालात की गंभीरता को देखते हुए बीमारी के बारे में नई सलाहें जारी की हैं।
विज्ञापन

3 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
एमजी क्या है?

माइकोप्लाज़्मा जेनिटेलियम एक जीवाणु है जिससे पुरुषों को पेशाब के रास्ते में सूजन हो सकती है। इससे जननांग से स्राव होता है और पेशाब करने में तकलीफ़ होती है। औरतों के जननांगों (गर्भाशय और फ़ैलोपियन ट्यूब) में एमजी की वजह से सूजन हो सकती है। इसका नतीजा दर्द, रक्तस्राव और बुखार के रूप में देखने को मिल सकता है।

4 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
असुरक्षित यौन संबंध एमजी का सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है। कंडोम इस संक्रमण को रोकने में कारगर साबित हो सकते हैं। इसका पहली बार पता 1980 के दशक में ब्रिटेन में चला और माना गया कि एक से दो फ़ीसदी आबादी इससे प्रभावित रही। एमजी के लक्षण हमेशा पता नहीं चल पाते और हमेशा इसके इलाज की ज़रूरत भी नहीं पड़ती, लेकिन ये नज़रअंदाज़ हो सकता है या फिर इससे क्लमेडिया जैसी दूसरी यौन संक्रमण वाली बीमारी होने का भ्रम भी हो सकता है।
विज्ञापन

5 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
इलाज

एमजी की जांच के लिए हाल में कुछ टेस्ट किए गए हैं, लेकिन ये सभी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं हैं। इसका इलाज दवाइयों और एंटीबायोटिक्स से मुमकिन है, लेकिन कई मामलों में बीमारी पर दवाइयों का असर नहीं होता।
विज्ञापन

6 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
कंडोम से बेहतर रोकथाम

एमजी के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली एंटीबायोटिक्स 'मैक्रोलिड्स' का असर दुनिया भर में कम हुआ है। ब्रिटेन में लोगों पर इसके असर में तक़रीबन 40% कमी आई है। राहत की बात ये है कि दूसरी एंटीबायोटिक 'एज़िथ्रोमाइसिन' अब भी ज़्यादातर मामलों में कारगर है। ब्रिस्टल में डॉक्टर पीटर ग्रीनहाउस का का कहना है कि लोगों में एमजी को लेकर जितनी जागरूकता होगी, इसकी रोकथाम में उतनी ज़्यादा मदद मिलेगी। उन्होंने लोगों से कंडोम इस्तेमाल करने और सुरक्षित यौन संबंध बनाने की सलाह दी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
पैडी हॉर्नर एमजी की रोकथाम के लिए नए दिशा-निर्देश लिखने वाले स्वास्थ्य विशेषज्ञों में से एक हैं। उन्होंने कहा, "नए दिशा-निर्देश इसलिए जारी किए गए हैं क्योंकि 15 साल पुराने ढर्रे पर नहीं चल सकता। अगर हम पुराना तरीका अपनाते रहे तो इसमें कोई शक़ नहीं है कि सुपरबग जैसी बड़ी समस्या हमारे सामने होगी जो 'हेल्थ इमरजेंसी' से कम नहीं होगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें