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कोरोनावायरस के ये चार लक्षण हैं बहुत गंभीर, न करें नजरअंदाज

Sat, 29 May 2021 02:50 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कुछ लक्षण बहुत सामान्य हैं - फोटो : pixabay

Medically reviewed by Dr. Deepak Mahavar

डॉ दीपक माहवर, श्वास रोग विशेषज्ञ

सेंटर पॉइंट हॉस्पिटल, नागपुर

डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.डी, डी.एन.बी

अनुभव- 10 वर्ष

कोरोनावायरस के वैसे तो कई सारे लक्षण हैं। कुछ लक्षण बहुत सामान्य हैं जो कि घर पर ही उपचार और देखरेख करने से खत्म हो जाते हैं लेकिन कुछ लक्षण ऐसे भी हैं जो कि यदि बढ़ गए तो मरीज के लिए और भी समस्याएं खड़ी कर देते हैं। चिकित्सक बताते हैं कि बीमारी के लक्षणों के प्रति मरीज की लापरवाही ही कुछ मामलों में उन्हें बेहद गंभीर स्थिति तक लेकर चली जाती है। अगली स्लाइड्स से जानिए कोरोना के मरीजों को बीमारी के दौरान किन लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। 




 

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श्वास नली ठीक से अपना काम नहीं कर पाती है - फोटो : iStock

सीने में कफ का होना
सीने में यदि बहुत अधिक कफ जम गया है तो फेफड़े सही से काम करना बंद करने लगते हैं। ऐसे में सीने में दर्द, दबाव, जलन आदि समस्याएं महसूस होने लगती हैं। श्वास नली ठीक से अपना काम नहीं कर पाती है। ऐसे में यदि सीने में कफ होने लगता है तो पहले ही चिकित्सक को सूचित करें नहीं तो आगे चलकर स्थिति ऐसी होने लगती है कि मरीज की समस्याएं और भी बढ़ जाती है।
 

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निमोनिया भी हो सकता है - फोटो : social media

खांसी
खांसी होने पर अक्सर हम नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन कोरोना होने पर लंबे समय तक खांसी चलना सेहत के लिए अच्छा संकेत नहीं है। बिना कफ वाली खांसी है तब तो और भी जरूरी है कि आप चिकित्सक को बताएं नहीं तो आगे चलकर आपको सांस लेने में समस्या, सीने में दर्द, चुभन और जलन की समस्या भी हो सकती है। समय रहते ध्यान नहीं दिया तो निमोनिया भी हो सकता है और आगे स्थितियां इतनी भी बिगड़ सकती है कि जान पर बन सकती है। 

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तापमान यदि 100 से ऊपर है तब मरीज को घर पर न रखें - फोटो : freepik

बार-बार बुखार आना
कोरोना होने पर बार-बार बुखार आना-जाना चलता रहता है लेकिन यदि ये बुखार लंबे समय बना हुआ रहता है और तापमान भी बहुत अधिक रहता है तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। यदि बुखार 6-7 दिन तक बना हुआ है तो स्थिति आगे जाकर हाथों से निकल सकती है और तापमान यदि 100 से ऊपर है तब मरीज को घर पर न रखें। 

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घर पर रहने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए - फोटो : istock

ऑक्सीजन लेवल गिरना 
ऑक्सीजन लेवल गिरना कोई अच्छी बात नहीं है, ये खतरे की घंटी है। ऐसे मरीज को घर पर रहने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए। ऑक्सीजन लेवल यदि 92 से ऊपर नहीं जाता है तो आपको चिकित्सक की देखरेख में रहना चाहिए नहीं तो आगे चलकर यह और भी कम हो सकती है। मरीज को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है और सांस बैठने लगती है इसलिए ऑक्सीजन लेवल को लेकर लापरवाही न करें। 

नोट- यह लेख सेंटर पॉइंट हॉस्पिटल के डॉक्टर दीपक माहवर से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर दीपक महावर पिछले 10 सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी डिग्री एम.बी.बी.एस गवर्नमेंट कॉलेज एंड हॉस्पिटल, नागपुर से ली है।

अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

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