हर साल लाखों की हो जाती है मौत
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भारत में खतरा अधिक
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में भारत में सेप्सिस के कारण होने वाली मृत्युदर भी काफी अधिक है। हाल ही में एक बयान में पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव लव वर्मा कहते हैं, सेप्सिस के खतरे पर उतना ध्यान नहीं दिया गया जितना कि आवश्यक था। नीति के दृष्टिकोण से इस मामले में हम पीछे हैं, लेकिन खतरा बढ़ रहा है। इसके लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को विशेष ध्यान देते हुए इसकी रोकथाम के लिए उपायों पर विचार करना होगा। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू, मलेरिया, यूटीआई या यहां तक कि दस्त जैसी बीमारियों के कारण भी सेप्सिस हो सकता है। ऐसे में इससे बचाव के उपायों पर ध्यान देना आवश्यक है।