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विशेषज्ञों की चेतावनी: कैंसर से भी खतरनाक इस बीमारी से रहें सुरक्षित, कोविड के दौर में बढ़ गए हैं मामले

Mon, 20 Sep 2021 04:53 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सेप्सिस के खतरे को पहचानें (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
दुनियाभर में कैंसर को सबसे घातक बीमारियों में से एक माना जाता है। हालांकि हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने एक अन्य बीमारी को इंसानों के लिए इससे भी खतरनाक बताया है। अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि साल 2050 तक सेप्सिस रोग से मरने वालों की संख्या, कैंसर और हृदय रोगों से अधिक हो जाएगी।  आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2017 में दुनिया भर में सेप्सिस के 48.9 मिलियन (4.89 करोड़) से ज्यादा मामले सामने आए जिसमें 1.1 करोड़ से अधिक लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सेप्सिस एक प्रकार की ऐसी घातक बीमारी है जिसमें संक्रमण के खिलाफ होने वाली शरीर की प्रतिक्रिया अपने ही ऊतकों को नुकसान पहुंचाने लगती है। सेप्सिस के कारण लोगों को सेप्टिक शॉक की भी समस्या हो सकती है जिसमें रोगी के ब्लड प्रेशर में तेजी से गिरावट आने लगती है जिससे अंगों के फिलयर और मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।

लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि जिस तरह के पिछले कुछ वर्षों में एंटीबायोटिक दवाओं की अनावश्यक इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, यह सेप्सिस के खतरे को काफी ज्यादा बढ़ा देता है। आइए आगे की स्लाइडों में इस बीमारी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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हर साल लाखों की हो जाती है मौत - फोटो : istock
भारत में खतरा अधिक
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में भारत में सेप्सिस के कारण होने वाली मृत्युदर भी काफी अधिक है। हाल ही में एक बयान में पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव लव वर्मा कहते हैं, सेप्सिस के खतरे पर उतना ध्यान नहीं दिया गया जितना कि आवश्यक था। नीति के दृष्टिकोण से इस मामले में हम पीछे हैं, लेकिन खतरा बढ़ रहा है। इसके लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को विशेष ध्यान देते हुए इसकी रोकथाम के लिए उपायों पर विचार करना होगा। वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू, मलेरिया, यूटीआई या यहां तक कि दस्त जैसी बीमारियों के कारण भी सेप्सिस हो सकता है। ऐसे में इससे बचाव के उपायों पर ध्यान देना आवश्यक है।
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सेप्सिस के कारण हो सकती हैं गंभीर समस्याएं सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सेप्सिस के क्या लक्षण होते हैं?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सेप्सिस एक मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति है। इसमें अलग-अलग समय पर लोगों में विभिन्न प्रकार के लक्षण हो सकते हैं, जिन्हें समझना और तुरंत उपचार के लिए जाना सबसे आवश्यक होता है। इस समस्या का समय रहते निदान करने के लिए लक्षणों को जानना बेहद आवश्यक होता है
  • हल्का बुखार और कंपकंपी की समस्या।
  • मानसिक स्थिति में बदलाव।
  • सांस लेने में कठिनाई या तेजी से सांस लेना।
  • हृदय की गति का बढ़ जाना।
  • ब्लड प्रेशर लो होने की समस्या।
  • त्वचा पर धब्बे बनना। 
  • शरीर में तेज दर्द या बेचैनी की समस्या होना।

 

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कई कारणों से हो सकती है सेप्सिस की समस्या (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
सेप्सिस की समस्या क्यों होती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी प्रकार के संक्रमण जैसे निमोनिया, पेट या किडनी में संक्रमण के कारण सेप्सिस की समस्या ट्रिगर हो सकती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ जनरल मेडिकल साइंसेज के अनुसार, सेप्सिस के मामलों में हर साल हो रही बढ़ोतरी की मुख्य वजह सामने आई हैं।
  • उम्र बढ़ना,उम्रदराज लोगों में सेप्सिस का खतरा अधिक होता है।
  • एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या। आमतौर पर यह तब होता है जब संक्रमण से मुकाबले में एंटीबायोटिक दवाएं काम नहीं कर पाती हैं। 
  • प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करने वाली बीमारियों की बढ़ती संख्या।

 
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बचाव के करें उपाय (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
सेप्सिस से बचाव और उपचार
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यदि समय रहते सेप्सिस का इलाज न किया जाए तो यह समस्या सेप्टिक शॉक और मौत में बदल सकती है। इसके इलाज के लिए डॉक्टर स्थिति की आवश्यकताओं को देखते हुए संक्रमण से लड़ने के लिए एंटीबायोटिक्स और रक्तचाप बढ़ाने वाली दवाएं दे सकते हैं। ब्लड शुगर को स्थिर करने के लिए इंसुलिन देने की भी जरूरत हो सकती है। डॉक्टर कहते हैं सभी लोगों को सेप्सिस से बचाव के उपायों का पालन करना चाहिए।
  • फ्लू, निमोनिया और अन्य संक्रमणों के लिए टीकाकरण जरूर कराएं।
  • स्वच्छता का ध्यान रखें। यदि शीरर में कहीं घाव है तो उसकी उचित देखभाल करे, हाथों की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखें। 
  • सेप्सिस के इलाज की बात आती है तो यहां हर मिनट मायने रखता है। जितनी जल्दी आप इलाज करवाएंगे, परिणाम उतना ही बेहतर होगा।

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स्रोत और संदर्भ: 
Sepsis is a syndromic response to infection

अस्वीकरण नोट: यह लेख विश्व स्वास्थ्य संगठन के सुझावों के अनुसार तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं। 
 
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