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Monkeypox: केरल में एक और व्यक्ति में संक्रमण की पुष्टि, सरकार ने जारी की एडवाइजरी; जानिए क्या करें-क्या नहीं

Sat, 28 Sep 2024 12:56 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मंकीपॉक्स का एक और मामला - फोटो : freepik.com
पिछले कुछ महीनों से दुनियाभर के लिए मंकीपॉक्स (एमपॉक्स) वायरस गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बना हुआ है। भारत में भी इसके मामले अब बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल में शुक्रवार (27 सितंबर) को एमपॉक्स का एक और मामला सामने आया है। राज्य में अब इस संक्रामक रोग के दो और देश में तीन केस हो गए हैं। ये मामला एर्नाकुलम में रिपोर्ट किया गया है, संक्रमित हाल ही में विदेश से लौटा था। बीमारी के चलते एक निजी अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था, जहां जांच के दौरान उसमें संक्रमण की पुष्टि की गई है। 

इससे पहले इसी सप्ताह (23 सितंबर को) केरल के मलप्पुरम जिले में 38 वर्षीय युवक को भी एमपॉक्स संक्रमित पाया गया था, उसमें खतरनाक क्लैड 1बी स्ट्रेन पाया गया था। युवक हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लौटा था। 

देश में बढ़ते मंकीपॉक्स के जोखिमों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को अलर्ट किया है। डॉक्टर्स ने कहा, संक्रमण की समय रहते पहचान करना जरूरी है। ये संक्रामक रोग मुख्यरूप से उन लोगों में अधिक देखा जा रहा है जिन्होंने हाल ही में किसी संक्रमण प्रभावित देश की यात्रा की है। 
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मंकी पॉक्स को लेकर प्रदेश में अलर्ट - फोटो : freepik.com
केरल में अब तक दो लोगों में संक्रमण की पुष्टि

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विदेश से लौटने के बाद युवक ने तेज बुखार की शिकायत की, जिसका निजी अस्पताल में उपचार किया जा रहा था। डॉक्टरों ने उसके शरीर पर छाले देखे जिसके बाद एमपॉक्स की जांच के दौरान उसमें संक्रमण की पुष्टि की गई है। युवक के सैंपल को जीनोम सिक्वेंसिग के लिए भेजा गया है ताकि ये समझा जा सके कि वह किस स्ट्रेन का शिकार है?

गौरतलब है कि इससे पहले केरल में संक्रमित पाए गए व्यक्ति में क्लैड 1बी स्ट्रेन की पुष्टि की गई थी जिसकी प्रकृति को कई मायनों में खतरनाक माना जा रहा है।
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मंकीपॉक्स के स्ट्रेन - फोटो : freepik.com
क्लैड 1बी स्ट्रेन को माना जा रहा है खतरनाक

पिछले कुछ महीनों में मंकीपॉक्स के केस काफी तेजी से बढ़ते हुए देखे गए। अध्ययनों में इसके लिए वायरस के नए स्ट्रेन 'क्लेड 1बी' को प्रमुख कारण पाया गया। इस स्ट्रेन के कारण बढ़ते जोखिमों को देखते हुए ही डब्ल्यूएचओ ने 14 अगस्त को मंकीपॉक्स को स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था। क्लेड-1 संक्रमण के कारण मृत्युदर भी अधिक है। इसकी संक्रामकता अधिक होने के कारण ही कम समय में ये दुनिया के कई देशों में फैल गया है। इसके लक्षणों में एन्सेफलाइटिस, निमोनिया और श्वसन समस्याओं के साथ त्वचा और अधिक गंभीर घाव-छाले होने जैसी जटिलताएं होती हैं। 

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मंकीपॉक्स को लेकर एडवाइजरी जारी - फोटो : freepik.com
सरकार ने जारी की एडवाइजरी

देश में मंकीपॉक्स के बढ़ते खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एडवाइजरी जारी की है, जिसमें देश में एमपॉक्स के प्रसार को रोकने के लिए जरूरी उपायों का पालन करते रहने की सलाह दी गई है। एडवाइजरी में बीमारी, इसके संक्रमण के तरीकों और समय पर रिपोर्टिंग की आवश्यकता के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया गया है।
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मंकीपॉक्स से बचाव के तरीके - फोटो : freepik.com
बचाव के लिए क्या करें-क्या नहीं?

जारी एडवाइजरी में बचाव के उपायों पर सभी लोगों को ध्यान देते रहने की सलाह दी गई है।

क्या करें?
  • राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों से कहा गया है कि वे समुदायों के बीच लोगों में मंकीपॉक्स को लेकर जागरूकता बढ़ाएं।
  • किसी भी संदिग्ध एमपॉक्स रोगी को तुरंत आइसोलेट किया जाना चाहिए।
  • संक्रमण की रोकथाम के लिए कड़े उपाय किए जाने चाहिए।
  • अस्पतालों को संदिग्ध और पुष्टि किए गए रोगियों के लिए पर्याप्त आइसोलेशन और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
  • सुनिश्चित करें कि संदिग्ध एमपॉक्स लक्षण वाले रोगियों के सैंपल निर्दिष्ट प्रयोगशालाओं में भेजे जाएं। 

क्या न करें
  • मंकीपॉक्स से घबराएं नहीं। निवारक उपायों पर स्पष्टता सुनिश्चित करके इसके जोखिमों को कम किया जा सकता है।
  • संदिग्ध मामलों की रिपोर्ट करने में देरी से संक्रमण और फैल सकता है, इसलिए समय न गवाएं।
  • केवल लक्षण वाले रोगियों को ही भर्ती करें ताकि स्वास्थ्य सुविधाओं पर अत्यधिक बोझ न पड़े। 
  • हल्के मामलों को नजरअंदाज न करें। जांच करवाना और संक्रमण को रोकने के लिए प्रयास करते रहना जरूरी है।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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