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मोतियाबिंद का वैज्ञानिकों ने निकाला तोड़, अब सर्जरी नहीं एक आई ड्रॉप से होगा इलाज

Mon, 15 Apr 2019 12:53 PM IST
मोना नारंग लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपनी आंखों की रोशनी को हल्के में लेते हैं। उन्हें लगता है हम सही से पढ़ रहे हैं, लिख रहे हैं, ड्राइव कर रहे हैं, तो इसका मतलब हमारी आंखे बिल्कुल ठीक है, लेकिन जरूरी नहीं ऐसा हो। हमारे आस-पास बहुत सारे लोग हैं, जिन्हें सिर्फ देखने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है। दुनियाभर में 285 मिलियन से ज्यादा लोग हैं जिनकी आंखें कमजोर हैं। फ्रेड होलोज फाउंडेशन के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 32.4 मिलियन लोग आंखों से देख नहीं सकते हैं। इनमें  90% लोग विकासशील देश से हैं और इनमें आधे से ज्यादा लोग मोतियाबिंद के कारण आंखों की रोशनी गंवा बैठे हैं।
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बता दें, दुनियाभर में अंधत्व का प्रमुख कारण मोतियाबिंद है। यह आंखों में होने वाली एक सामान्य बीमारी है, जिसे साइलेंट किलर कहा जाता है। इस बीमारी के बारे में जब तक इंसान को मालूम होता है, तब तक वह अंधा हो चुका होता है। इंडियन जर्नल ऑफ ओफ्थल्मोलॉजी रिपोर्ट 2008 के मुताबिक, भारत में लगभग 50-80 प्रतिशत लोगों को अंधापन मोतियाबिंद की वजह से होता है। इस बीमारी में सबसे खतरनाक चीज यह है कि एक बार अगर किसी की आंखों की रोशनी चली जाती है, तो वह वापस नहीं आती।
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- फोटो : Social Media
मोतियाबिंद के प्रभाव से बचने के लिए सिर्फ एक ही इलाज है वो है आंखों की सर्जरी कराना, जो काफी महंगा भी पड़ता है। ऐसा नहीं कि सिर्फ विकासशील देशों में लोग इस परेशानी से जूझ रहे हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ ओप्थाल्मोलॉजी के अनुसार, अमेरिका में रहने वाले लगभग 22 मिलियन लोगों को मोतियाबिंद की परेशानी है, जो इसके इलाज के लिए महंगे और दर्द भरी सर्जरी का सहारा लेते हैं।

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मोतियाबिंद को महंगे और दर्द भरे इलाज से छुटकारा दिलाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक ऐसी नई आई ड्रॉप इजाद की है जिसके बाद मौजूदा लेजर विजिन करेक्शन (लेसिक) सर्जरी कराने की जरूरत नहीं होगी। यह आई ड्रॉप सीधे आंख में डाला जाएगा और मोतियाबिंद को खत्म कर देगा। इस आई ड्रॉप के आ जाने के बाद सर्जरी की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी।
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आंखों की दर्दनाक सर्जरी से मिलेगी राहत
हालांकि अभी इस आई ड्रॉप का इंसानों पर परीक्षण नहीं किया गया है। अभी इसके क्लीनिकल ट्रायल की तैयारी चल रही है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसके कोई दुष्प्रभाव तो नहीं है। अगर ट्रायल सफल रहता है तो जल्द ही यह आई ड्रॉप बाजार में उपलब्ध होगा, जो सर्जरी की जगह इस्तेमाल किया जाएगा।
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