ऐसे बहुत से लोग हैं जो अपनी आंखों की रोशनी को हल्के में लेते हैं। उन्हें लगता है हम सही से पढ़ रहे हैं, लिख रहे हैं, ड्राइव कर रहे हैं, तो इसका मतलब हमारी आंखे बिल्कुल ठीक है, लेकिन जरूरी नहीं ऐसा हो। हमारे आस-पास बहुत सारे लोग हैं, जिन्हें सिर्फ देखने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है। दुनियाभर में 285 मिलियन से ज्यादा लोग हैं जिनकी आंखें कमजोर हैं। फ्रेड होलोज फाउंडेशन के मुताबिक, दुनियाभर में लगभग 32.4 मिलियन लोग आंखों से देख नहीं सकते हैं। इनमें 90% लोग विकासशील देश से हैं और इनमें आधे से ज्यादा लोग मोतियाबिंद के कारण आंखों की रोशनी गंवा बैठे हैं।