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भारत में मिला एक नया सुपरबग, वैज्ञानिकों ने अगली महामारी को लेकर किया आगाह

Thu, 18 Mar 2021 06:08 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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सुपरबग कैंडिडा ऑरिस - फोटो : self

देश में कोविड-19 के दोबारा से बढ़ रहे मामलों ने जहां एक तरफ स्वास्थ्य विभाग को चिंता में डाल दिया है, वहीं वैज्ञानिकों ने एक और तबाही के बारे में लोगों को आगाह किया है। वैज्ञानिकों को अंडमान द्दीप समूह के आसपास 'कैंडिडा ऑरिस' नाम का एक सुपरबग मिला है, जिसके आधार पर अगली महामारी को लेकर लोगों को चेताया गया है। ताजा जानकारियों के मुताबिक दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ अनुराधा चौधरी के नेतृत्व वाली टीम ने अंडमान द्दीप समूहों के आसपास से पानी और मिट्टी के 48 सैंपल एकत्रित किए। इन सैंपलों के अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों को यह सुपरबग मिला है। आइए जानते हैं कि यह सुपरबग क्यों इतना खतरनाक माना जा रहा है, जिसे विशेषज्ञों ने अगली महामारी का संभावित कारण तक बता दिया है।

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Candida auris Fungus - फोटो : thisisinsider.com

मल्टीड्रग-रेसिसटेंट है यह सुपरबग
शोध के दौरान विशेषज्ञों ने पाया है कि यह सुपरबग मल्टीड्रग-रेसिसटेंट हो सकता है। सरल भाषा में समझें तो मल्टीड्रग-रेसिसटेंट होने का मतलब है कि इसपर कई प्रकार की दवाओं का कोई प्रभाव नहीं होता है। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के मुताबिक यह सूक्ष्मजीव गंभीर रक्तप्रवाह संक्रमण का कारण बन सकता है। इसके आलावा जिन रोगियों को कैथेटर, फीडिंग ट्यूब या श्वास नलियों की आवश्यकता होती है उनके लिए यह और खतरनाक साबित हो सकता है। 

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patient prescription - फोटो : iStock

शोधकर्ताओं के मुताबिक इस सुपरबग जनित संक्रमण के कारण होने वाले बुखार और ठंड से पहले सामान्यतौर पर कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। चूंकि कई दवाओं का इनपर असर नहीं होता है जिससे लक्षण और गंभीर होते जाते हैं और रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह घाव के माध्यम से शरीर के भीतर प्रवेश करते हैं, इससे पहले ये फंगस लंबे समय तक त्वचा पर जीवित रह सकते हैं। रक्त प्रवाह में प्रवेश करते ही यह कई प्रकार की समस्याओं का कारण बनने लगते हैं। गंभीर मामलों में सेप्सिस की भी समस्या हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में सेप्सिस के कारण हर साल 1 करोड़ से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है।

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candida auris fungus

साल 2009 में जापान में इस फंगस से होने वाली समस्याओं का पहला मामला सामने आया था। ब्रिटेन और अमेरिका में भी इसके गंभीर प्रभावों को देख चुके हैं। चूंकि यह खून के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है ऐसे में इसके लक्षण तेजी से घातक होने शुरू हो जाते हैं। 

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