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Health Alert: दूसरों की गलती से भी आपको हो सकता है कैंसर? कहीं दोस्त ही न बन जाएं सेहत के लिए दुश्मन

Thu, 12 Mar 2026 06:40 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लंग्स कैंसर का मुख्य कारण धूम्रपान है। हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 10-20% लंग्स कैंसर के मरीज ऐसे होते हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया। रिसर्च बताती है कि महिलाओं और एशियाई देशों में यह दर अधिक देखी गई है।
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कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe stock
कैंसर दुनियाभर की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए तेजी से बढ़ता सबसे गंभीर संकट है, जो हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनता है। आंकड़ों से पता चलता है कि हाल के वर्षों में हर साल कैंसर से करीब 96 लाख से  एक करोड़ मौतें दर्ज की गई हैं।

कैंसर से होने वाली मौतों में फेफड़ों का कैंसर सबसे बड़ा कारण है। इसके बाद कोलोरेक्टल और लिवर कैंसर की वजह से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि कैंसर के चलते आने वालों वर्षों में मौत के आंकड़े और भी बढ़ सकते हैं। साल 2050 तक यह आंकड़ा बढ़कर प्रति वर्ष 18 मिलियन (1.8 करोड़) से अधिक हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोशिकाओं के अंदर डीएनए में बदलावों के कारण ये जानलेवा बीमारी होती है। ये आनुवंशिक कारणों से लेकर जीवनशैली से जुड़ी आदतों जैसे तंबाकू, खान-पान में गड़बड़ी, मोटापा और कुछ तरह की पर्यावरणीय स्थितियों की वजह से भी बढ़ रही है। लाइफस्टाइल में सुधार करके आप कैंसर के खतरे को काफी कम कर सकते हैं।

पर क्या आप जानते हैं कि दूसरों की गलती की वजह से भी आपको कैंसर हो सकता है? 
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फेफड़ों का कैंसर - फोटो : Freepik.com
धूम्रपान न करने वालों में लंग्स कैंसर

लंग्स कैंसर यानी फेफड़ों का कैंसर दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है। आमतौर पर माना जाता रहा है कि फेफड़ों का कैंसर सिर्फ धूम्रपान करने वालों को होता है, हालांकि ये खतरा उन लोगों में भी बढ़ रहा है जिन्होंने कभी सिगरेट पी ही नहीं।
 
  • फेफड़ों के कैंसर के कई मामलों में देखा गया है कि लोगों की लाइफस्टाइल तो ठीक है, वो धूम्रपान भी नहीं करते फिर भी उनमें कैंसर हो गया।
  • इसका मतलब है कि आप दूसरों की गलतियों की वजह से भी इस घातक कैंसर की चपेट में आ सकते हैं।
  • दुनियाभर में बड़ी संख्या में नॉन-स्मोकर्स यानी जिन्होंने कभी सिगरेट नहीं पी, उनमें भी लंग्स कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। ये दूसरे के सिगरेट से होने वाले धुएं के संपर्क में आने की वजह से हो सकता है।
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धूम्रपान न करने वालों में फेफड़ों की बीमारी - फोटो : Adobe Stock
कैंसर का बढ़ता जोखिम

डॉक्टर कहते हैं, जब फेफड़ों की कोशिकाओं में असामान्य और अनियंत्रित वृद्धि होने लगती है, तो कैंसर हो सकता है। इसका सबसे बड़ा कारण धूम्रपान है। 
 
  • सिगरेट के धुएं में 70 से अधिक कैंसर पैदा करने वाले रसायन पाए जाते हैं, जो कैंसर को बढ़ा सकते हैं।
  • हालांकि सिर्फ धूम्रपान ही नहीं, सेकेंड हैंड स्मोकिंग यानी दूसरों के धुएं में रहने से भी आपमें इस कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
  • सेकेंड हैंड स्मोकिंग के अलावा वायु प्रदूषण भी एक बड़ा खतरा है। PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण फेफड़ों में जाकर डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

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धूम्रपान के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock Photos
नॉन-स्मोकर्स में भी फेफड़ों का कैंसर

नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने वैश्विक स्वास्थ्य नीति और शहरी नियोजन की अपील की है। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया सैन डिएगो और नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट (एनसीआई) द्वारा किए गए एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पाया गया है कि नॉन-स्मोकर्स में भी फेफड़ों का कैंसर बढ़ रहा है। इसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट करना जरूरी है। 
 
  • आप धूम्रपान नहीं करते हैं पर यदि आपमें कैंसर की फैमिली हिस्ट्री रही है तो भी लंग्स कैंसर को लेकर अलर्ट रहना चाहिए।
  • ऐसे स्थानों पर रहते हैं जहां वायु प्रदूषण का स्तर काफी अधिक बना रहता है या फिर ऐसे कार्यों से जुड़े हैं जहां रसायनों के अक्सर संपर्क में अधिक रहते हैं उनमें भी लंग्स कैंसर होने का खतरा अधिक रहता है। 
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लंग्स कैंसर का जोखिम - फोटो : Freepik.com
फेफड़ों के कैंसर की पहचान क्या है?

फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण आमतौर पर सांस की समस्याओं जैसे होते हैं। हालांकि बीमारी बढ़ने के साथ आपको कई और दिक्कतें हो सकती हैं।
 
  • ऐसी खांसी जो ठीक न हो रही हो या समय के साथ और बिगड़ जाए।
  • खांसी के साथ खून आना या गाढ़े रंग का बलगम आना।
  • सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलना, घरघराहट या सांस लेते समय आवाज आना।
  • लगातार सीने में दर्द बने रहना जो अक्सर गहरी सांस लेने, हंसने या खांसने पर और बढ़ जाता है।
  • बिना किसी वजह के वजन कम होना और बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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