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World Kidney Day 2026: क्रिएटिनिन बढ़ा तो समझिए खतरे में है किडनी, जानिए क्या है इसकी पहचान

Thu, 12 Mar 2026 04:46 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Creatinine Kyu Badhta Hai: किडनी से संबंधित बीमारियों का खतरा दुनियाभर में तेजी से बढ़ता जा रहा है।  जब किडनी सही तरीके से काम करती है तो खून में क्रिएटिनिन का स्तर संतुलित हो जाता है। इसके कई नुकसान हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि हाई क्रिएटिनिन कितना खतरनाक हो सकता है?
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क्रिएटिनिन बढ़ने से किडनी की समस्याएं - फोटो : Freepil.com
आज वर्ल्ड किडनी डे (World Kidney Day) है। दुनियाभर में बढ़ती किडनी की बीमारियों को लेकर लोगों को शिक्षित-जागरूक करने और किडनी से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर अलर्ट करने के उद्देश्य से हर साल मार्च महीने के दूसरे गुरुवार (इस बार 12 मार्च) को विश्व किडनी दिवस मनाया जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किडनी की समस्याएं सभी उम्र के लोगों में तेजी से बढ़ती जा रही हैं। बच्चों में भी किडनी की समस्याओं का खतरा देखा जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, किडनी को हमारे शरीर का फिल्टर कहा जा सकता है। ये खून से गंदगी और अतिरिक्त पानी को छानकर पेशाब के जरिए बाहर निकालती है। अगर किडनी ठीक से काम करना बंद कर दे तो शरीर में विषाक्तता बढ़ने का खतरा रहता है,  यही वजह है कि किडनी का स्वस्थ रहना हमारे लिए बहुत जरूरी है। नियमित अंतराल पर सभी लोगों को किडनी फंक्शन टेस्ट कराते रहना चाहिए ताकि इस अंग की सेहत के बारे में पता चल सके।

किडनी टेस्ट के दौरान अक्सर क्रिएटिनिन लेवल की बात की जाती है, पर ये होता क्या है? आइए इसे समझते हैं।
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किडनी की समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
क्रिएटिनिन के बारे में जान लीजिए

क्रिएटिनिन एक प्रकार का अपशिष्ट पदार्थ है जो शरीर की मांसपेशियों में बनने वाले क्रिएटिन नामक कंपाउंड के टूटने से बनता है। जब हम कोई भी शारीरिक गतिविधि करते हैं, तो मांसपेशियां ऊर्जा का उपयोग करती हैं और उसी प्रक्रिया के दौरान क्रिएटिनिन बनता है।
 
  • यह लगातार खून में बनता रहता है और किडनी इसे खून से छानकर पेशाब के जरिए बाहर निकाल देती है।
  • जब किडनी सही तरीके से काम करती है तो खून में क्रिएटिनिन का स्तर संतुलित होने लगता है।
  • बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन इस बात का संकेत हो सकता है कि किडनी पर्याप्त रूप से खून को फिल्टर नहीं कर पा रही है।
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क्रिएटिनिन की जांच - फोटो : Freepik.com
क्रिएटिनिन कितना होना चाहिए?

खून की जांच के माध्यम से क्रिएटिनिन के लेवल का पता लगाया जाता है। 
  • वयस्क पुरुषों में क्रिएटिनिन का स्तर लगभग 0.7 से 1.3 mg/dL सामान्य है। 
  • महिलाओं में 0.6 से 1.1 mg/dL के बीच इसे नॉर्मल माना जाता है। 
अगर क्रिएटिनिन लगातार बढ़ा हुआ रहता है कि समय रहते डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी हो जाता है। ये जितना हाई रहेगा उसका मतलब किडनी उतने ही खतरे में है। 

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क्रिएटिनिन बढ़ने से क्या होता है? - फोटो : Adobe stock
हाई क्रिएटिनिन से क्या-क्या दिक्कतें होती हैं?

किडनी की फिल्टरिंग क्षमता कमजोर होने से क्रिएटिनिन बढ़ता है। इससे शरीर में यूरिया और अन्य टॉक्सिन जमा होने लगते हैं। 
 
  • डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, अक्सर पेन किलर लेने वाले लोगों और डिहाइड्रेशन की वजह से किडनी को नुकसान पहुंचती है और इससे क्रिएटिनिन हाई हो सकता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे तो क्रॉनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) का खतरा भी बढ़ जाता है।
  • बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन केवल किडनी के अलावा पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। 
  • जब किडनी सही से काम नहीं करती, तो शरीर में तरल और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो जाता है। इससे पैरों, चेहरे या हाथों में सूजन, सांस लेने में तकलीफ और ब्लड प्रेशर बढ़ना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • खून में टॉक्सिन जमा होने से थकान, कमजोरी, मतली, उल्टी, भूख कम लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 
  • कुछ मामलों में पोटैशियम का स्तर गड़बड़ होने से दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है।
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क्रिएटिनिन को कैसे कंट्रोल करें? - फोटो : Freepik.com
क्रिएटिनिन लेवल बढ़ जाए तो क्या करें?

अगर आपका क्रिएटिनिन लेवल अक्सर बढ़ा रहता है, तो डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए ताकि इसकी वजह पता चल सके किडनी में कोई दिक्कत तो नहीं है? दवाओं के अलावा क्रिएटिनिन लेवल को कंट्रोल करने के लिए खान-पान में सुधार करें। 
 
  • प्रोटीन वाली चीजें कम खाएं। इससे किडनी पर पड़ने वाला बोझ कम होता है।
  • डाइट में फाइबर वाली चीजें जैसे ज्यादा फल और सब्जियों की मात्रा बढ़ा लें।
  • ब्लड प्रेशर को ठीक रखने के लिए नमक और प्रोसेस्ड फूड का सेवन कम से कम करें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। रोजाना 2-3 लीटर पानी पीना सेहत को ठीक रखने के लिए जरूरी है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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