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Japanese Encephalitis: कई राज्यों में बढ़े इस जानलेवा रोग के मामले, बच्चों में खतरा सबसे अधिक, ऐसे करें बचाव

Tue, 08 Aug 2023 11:48 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जापानी एनसेफेलिटिस के बारे में जानिए - फोटो : iStock
राजधानी दिल्ली में इन दिनों जहां कंजंक्टिवाइटिस और डेंगू संक्रमण के मामले तेजी से रिपोर्ट किए जा रहे हैं, वहीं कुछ राज्यों में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) का प्रकोप देखने को मिल रहा है, इसे जापानी बुखार के नाम से भी जाना जाता है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक असम में इस वेक्टर जनित बीमारी के कारण इस साल अब तक ग्यारह लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, राज्य भर में कुल 254 लोग इस बीमारी से संक्रमित हैं। असम के स्वास्थ्य मंत्री ने राज्यभर में सभी निवारक उपाय करने की सलाह दी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, राष्ट्रीय राजधानी में पहले से ही कई प्रकार के मच्छर जनित रोगों के मामले देखे जा रहे हैं, ऐसे में यहां जेई का भी जोखिम हो सकता है, सभी लोगों को इससे बचाव के उपाय करते रहने चाहिए। जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले गंभीर और जानलेवा भी हो सकते हैं। 
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जापानी एन्सेफलाइटिस बुखार के जोखिम - फोटो : Pixabay
जापानी इंसेफेलाइटिस के बारे में जानिए

जापानी इंसेफेलाइटिस बुखार संक्रमित मच्छरों के काटने से लोगों में फैलता है। इंसानों के साथ-साथ जानवरों में भी इस संक्रमण का जोखिम हो सकता है। आंकड़ों के मुताबिक हर साल जेई के 50,000 नैदानिक मामले सामने आते हैं, लेकिन ऐसा माना जाता है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है।

10 वर्ष से कम उम्र के बच्चे इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। इसका मृत्युदर भी अधिक माना जाता है, सबसे खतनाक बात यह है कि संक्रमण के शिकार करीब 70% लोगों में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के विकसित होने का खतरा हो सकता है।
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जापानी एन्सेफलाइटिस के लक्षणों के बारे में जानिए - फोटो : iStock
कैसे होते हैं जापानी इंसेफेलाइटिस के लक्षण?

जापानी इंसेफेलाइटिस से पीड़ित व्यक्ति को शुरुआत में हल्के संक्रमण के साथ बुखार और सिरदर्द हो सकता है, अधिक गंभीर मामलों में इसके लक्षणों के बिगड़ने का जोखिम भी अधिक रहता है। संक्रमण बढ़ने की स्थिति में झटके आने, जी मिचलाने-उल्टी, गर्दन में अकड़न और लकवा की भी समस्या हो सकती है। इस संक्रमण की स्थिति में मस्तिष्क में सूजन विकसित होने का जोखिम सबसे अधिक देखा जाता है, जो कई प्रकार की गंभीर समस्याओं के कारण बन सकती है।

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जापानी एन्सेफलाइटिस हो सकती है गंभीर - फोटो : pixabay
जापानी इंसेफेलाइटिस के कारण हो सकती है मौत

मच्छर जनित होने वाले इस रोग के मामले गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के साथ मृत्यु का भी कारण बन सकते हैं। आमतौर पर इस रोग के कारण मृत्युदर 30 फीसदी तक देखा जाता है, बच्चों में इसके गंभीर रूप लेने का खतरा अधिक हो सकता है। कोमा, दौरे पड़ने और लकवा जैसी स्थितियों के कारण क्वालिटी ऑफ लाइफ पर भी नकारात्मक असर देखा जा सकता है।

सभी लोगों को इस रोग से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी जाती है।
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मच्छरों के काटने से बचाव के करें उपाय - फोटो : iStock
जापानी इंसेफेलाइटिस से कैसे रहें सुरक्षित?

डॉक्टर कहते हैं, जापानी इंसेफेलाइटिस चूंकि एक मच्छरजनित रोग है, ऐसे में मच्छरों के काटने से बचाव के उपाय करके इस रोग के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसके लिए वैक्सीन भी उपलब्ध होती हैं जो संक्रमण के जोखिम को कम करने या संक्रमण की  स्थिति में गंभीर रोग के खतरे से बचाने में सहायक हो सकती है। 

इसके अलावा लंबी बाजू वाली शर्ट और पैंट पहनें, घर के आसपास साफ-सफाई रखें जिससे मच्छरों के प्रजनन को रोका जा सके। बच्चों को मच्छरों के काटने से सुरक्षित रखने के उपाय करें क्योंकि उन्हें इस रोग का खतरा अधिक हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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