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Coronavirus: भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित की खास टेक्नोलॉजी, हवा में ही मार देती है कोरोना वायरस

Mon, 01 Mar 2021 07:34 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस को कैसे खत्म किया जाए, इसको लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक अपने-अपने स्तर पर लगातार शोध कर रहे हैं। इस दौरान नई-नई टेक्नोलॉजी भी विकसित की जा रही है। भारतीय वैज्ञानिकों ने भी एक ऐसी टेक्नोलॉजी विकसित की है, जो बंद वातानुकूलित कमरे या हॉल की हवा में मौजूद कोरोना वायरस को मारकर हवा को सुरक्षित बनाती है। केरल स्थित राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (आरजीसीबी) ने इस खास टेक्नोलॉजी 'एयरोलाइज' को प्रमाणित किया है। यह एक पेटेंट वायु विषाणुशानक है जो बंद वातानुकूलित वातावरण में मौजूद वायरस को मारकर हवा को 100 फीसदी स्वस्थ बनाता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (आरजीसीबी) भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत आने वाला राष्ट्रीय स्वायत्त संस्थान है। इस संस्थान ने 'एयरोलाइज' को प्रमाणित कर उसका प्रमाण पत्र भी जारी किया है। एक बयान के मुताबिक, यह टेक्नोलॉजी नुकसानदेह विषाणुओं को न फिल्टर करती है और न जमा करती है, बल्कि हवा में ही मार देती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस खास टेक्नोलॉजी की प्रभावकारिता जांचने के लिए इन्फ्लुएंजा ए, 2009 एच1एन1-स्वाइन फ्लू, कोरोना वायरस ई जीन और कोरोना वायरस एस जीन को विषाणुनाशक में डाला गया। इसके बाद अलग-अलग समय पर हवा के नमूने लेकर आरटी-पीसीआर पद्धति से उसमें वायरस की जांच की गई। इसमें पाया गया कि 'एयरोलाइज' एएसआर 600 वायु विषाणुनाशक इन्फ्लुएंजा ए और स्वाइन फ्लू समेत कोरोना वायरस को 100 फीसदी खत्म करने में कारगर है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
रिपोर्ट्स के मुताबिक, एयरोलाइज 'पैनाज बायोसिक्युरिटी सॉल्यूशन लिमिटिड' का उत्पाद है जो केरल स्टार्टअप मिशन में पंजीकृत है। इसका उत्पादन राज्य के उद्योग विभाग की औद्योगिक संपत्ति में स्थित फैक्ट्री में हुआ है। आरजीसीबी के निदेशक चंद्रभास नारायण ने राज्य सचिवालय में राज्य की स्वास्थ्य मंत्री के. के. शैलेजा को 'एयरोलाइज' का प्रमाण पत्र सौंपा। बयान में कहा गया है कि इस खास टेक्नोलॉजी को भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया है। 
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