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कोरोना जैसी अगली महामारी रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने शुरू किया मिशन 'हंटर'

Thu, 25 Mar 2021 04:16 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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फाइल फोटो

कोविड-19 संक्रमण ने दुनिया के ज्यादातर देशों की स्वास्थ्य व्यवस्था को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञ अब इस दिशा में काम कर रहे हैं कि आने वाले वर्षों मेें इस तरह की किसी दूसरी महामारी से लोगों को सुरक्षित किया जा सके? इसके तहत चमगादड़ों को पकड़पर उनपर अध्ययन किया जा रहा है। विशेषज्ञों की कोशिश है कि इस अध्ययन के आधार पर एक ऐसा सिमुलेशन मॉडल तैयार किया जाए जिससे चमगादड़ जनित भविष्य में होने वाली किसी भी महामारी से दुनिया को सुरिक्षत रखा जा सके। यहां आपको याद दिला दें कि दुनियाभर मेें फैला कोविड-19 वायरस चमगादड़ों से ही उत्पन्न हुआ है।
आइए अगली स्लाइडों में जानते हैं कि इस अभियान के दौरान भविष्य में होने वाली महामारी को रोकने के लिए वैज्ञानिक क्या कर रहे है?

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Bat

यह विशेष प्रकार का शोध फिलीपींस के लागूना प्रांत में किया जा रहा है। इसके लिए यूनिवर्सिटी ऑफ द फिलीपींस लोस के पूरा मॉडल तैयार करने के लिए तीन साल का समय दिया गया है। इस शोध के दौरान रात के समय में चमगादड़ों को पकड़ा जा रहा है। शोधकर्ता चमगादड़ों के मल और लार का सैंपल लेकर उनपर अध्ययन करके इससे होने वाली सभी संभावित बीमारियों की सूची तैयार कर रहे हैं। इसी आधार पर बीमारियों को मापा जाएगा जिससे यह पता चल सके कि यह महामारी का रूप ले सकती हैं या नहीं? विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के अभियान से दुनिया को आने वाले समय में कोरोना जैसी किसी भी महामारी से बचाया जा सकेगा।

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चमगादड़

चमगादड़ों पर ही क्याें हो रहा है अध्ययन
इस तरह के अभियान और शोध के लिए चमगादड़ों को ही क्यों पकड़ा जा रहा है, यह सवाल अहम है। विशेषज्ञों का इस विषय में कहना है कि हाल के वर्षों में खतरनाक और सबसे अधिक बीमारियों के मुख्य जनक चमगादड़ ही रहे हैं। इबोला, सार्स, मिडिल ईस्ट रेस्पिरेट्री सिंड्रोम जैसी कई बीमारियां चमगादड़ों के माध्यम से ही फैली हैं। इस आधार पर इनसे होने वाली अन्य संभावित बीमारियों के बारे मेें जानने की कोशिश की जा रही है।

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चमगादड़ की नई प्रजाति - फोटो : सोशल मीडिया

विशेषज्ञ चमगादड़ों जनित होने वाली बीमारियों पर लंबे समय से शोध कर रहे हैं। ईकोलॉजिस्ट फिलिप आलविओल बताते हैं कि इस अध्ययन के दौरान हम वायरस की प्रकृति के बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं। अगर समय रहते वायरस और उसके फैलने के स्थान के बारे मे पता चल जाए तो उससे होने वाली हानि से हम बड़ी आबादी को सुरक्षित करने की दिशा में काम कर सकते हैं।

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