भारत सहित दुनिया के ज्यादातर हिस्सों से कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामलों में कमी की खबरें सामने आ रही हैं। बेहद संक्रामक माने जा रहे इस वैरिएंट के कम होते केस राहत देने वाले हैं, हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय लापरवाही बरतनी भारी पड़ सकती है। असल में ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर किए जा रहे अध्ययनों में इसके कारण होने वाले रि-इंफेक्शन के मामलों में बढ़ोतरी को लेकर अलर्ट किया गया है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि कोरोना के तमाम वैरिएंट्स की तुलना में ओमिक्रॉन वैरिएंट से रि-इंफेक्शन का खतरा पांच गुना तक अधिक हो सकता है। दुनिया के तमाम देशों से कोविड से पुन: संक्रमित लोगों की संख्या में वृद्धि के मामले भी रिपोर्ट किए जा रहे हैं।
इम्पीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने एक हालिया अध्ययन में बताया कि कोरोना के तमाम वैरिएंट्स की तुलना में ओमिक्रॉन के कारण दोबारा संक्रमण का जोखिम काफी अधिक देखा गया है। जो लोग पहले अन्य वैरिएंट्स से संक्रमित रह चुके हैं, या जिन्हें हाल ही में ओमिक्रॉन का भी संक्रमण हो चुका है, ऐसे लोगों को दोबारा संक्रमण के खतरे को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कोरोना का यह वैरिएंट बेहद संक्रामक है, इससे बहुत बचाव की आवश्यकता है। आइए अध्ययन के बारे में आगे की स्लाइडों में और विस्तार से जानते हैं।