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Study: इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं तो डिमेंशिया का कम हो सकता है खतरा, वृद्ध लोगों में देखे गए बेहतर परिणाम

Thu, 11 May 2023 01:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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इंटरनेट के इस्तेमाल से कम होता है डिमेंशिया का खतरा - फोटो : Pixels
तेजी से दौड़ती-भागती इस दुनिया में इंटरनेट हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। ऑफिस के ईमेल से लेकर सोशल मीडिया पर लोगों से जुड़े रहने तक में यह हमारे लिए काफी आवश्यक बन गया है। इंटरनेट सिर्फ आपको मौजूदा दुनिया से जोड़कर ही नहीं रखता है, यह आपमें डिमेंशिया के जोखिम को कम करने वाला भी एक कारगर तरीका हो सकता है।

हाल ही में जर्नल ऑफ अमेरिकन गेरिएट्रिक्स सोसाइटी में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने बताया कि जो वृद्ध लोग, नियमित इंटरनेट का उपयोग करते हैं, उनमें समय के साथ विकसित होने वाले डिमेंशिया रोग का खतरा कम हो सकता है। वैज्ञानिकों ने अमेरिकी वृद्ध लोगों में नियमित इंटरनेट के उपयोग को वरदान के रूप में उल्लेखित किया है।

डिमेंशिया का जोखिम 60 साल की आयु के बाद काफी बढ़ जाता है, इसमें लोगों के लिए चीजों को याद रखना, निर्णय लेना और समस्याओं का हल निकाल पाना काफी कठिन  हो सकता है।  इंटरनेट आखिर डिमेंशिया रोग के जोखिम को कैसे कम करता है? आइए इस अध्ययन के माध्यम से जानने की कोशिश करते हैं।
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डिमेंशिया का खतरा - फोटो : Pixabay
इंटरनेट और मानसिक स्वास्थ्य विकारों का जोखिम

युवा पीढ़ी हर दिन ऑनलाइन कार्यों में लंबा समय बिताती है, लेकिन अब वृद्ध लोगों पर किए गए अध्ययन से पता चलता है कि नियमित इंटरनेट का उपयोग वास्तव में ऐसे लोगों  के लिए वरदान हो सकता है, जो डिमेंशिया के दीर्घकालिक जोखिम को कम करने वाला पाया गया है।

न्यूयॉर्क शहर स्थित न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ ग्लोबल पब्लिक हेल्थ विभाग द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि इंटरनेट के नियमित उपयोगकर्ताओं ने गैर-नियमित उपयोगकर्ताओं की तुलना में डिमेंशिया के जोखिमों को कम अनुभव किया। 
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डिमेंशिया के जोखिम को जानिए - फोटो : istock
इंटरनेट के उपयोगकर्ताओं की जांच

यह जांचने के लिए कि इंटरनेट का उपयोग डिमेंशिया के जोखिम को कैसे प्रभावित कर सकता है, अध्ययन की टीम ने 18,000 से अधिक अमेरिकी लोगों को शामिल किया। 2002 में जब अध्ययन शुरू हुआ तब सभी की उम्र 50-65 के बीच थी और इनमें डिमेंशिया का खतरा नहीं था। हर दो साल में सभी प्रतिभागियों का टेस्ट किया गया।

अध्ययन के लेखक गवन चो कहते हैं, अध्ययन की शुरुआत में लगभग दो-तिहाई प्रतिभागी नियमित इंटरनेट उपयोगकर्ता थे, जबकि एक तिहाई इससे दूर थे।

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मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में जानिए - फोटो : istock
शोध में क्या पता चला?

अध्ययन के अंत में पाया गया कि करीब 5% प्रतिभागियों में डिमेंशिया विकसित हुआ। 87% से अधिक लोगों को मानसिक रूप से स्वस्थ पाया गया। अधिकांश प्रतिभागियों ने समय के साथ अपनी इंटरनेट आदतों में बदलाव कर लिया। टीम ने निष्कर्ष निकाला कि जो लोग इंटरनेट से अब भी दूर थे उनमें से 10% से अधिक लोगों में इस रोग का जोखिम पाया गया। 

शोधकर्ताओं ने पाया कि इंटरनेट का इस्तेमाल, सोशल आइसोलेशन के जोखिमों को कम करने मदद करता है, डिमेंशिया के लिए यह एक प्रमुख जोखिम कारक रहा है।
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इंटरनेट का इस्तेमाल मानसिक स्वास्थ्य पर असर - फोटो : istock
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?

शोध के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों का कहना कि इंटरनेट हमें एक आभासी दुनिया से जोड़े रखता है, इसके माध्यम से हम नए लोगों से मिलते हैं, नई-नई जानकारियां प्राप्त करते हैं जिससे अल्जाइमर रोग का खतरा कम होता है। यह आपको डिमेंशिया से भी बचाता है। इसके अलावा लोग नियमित शारीरिक गतिविधि, हृदय स्वास्थ्य की देखभाल और पर्याप्त नींद लेने जैसे जीवनशैली की आदतों को अपनाकर संज्ञानात्मक गिरावट के अपने जोखिम को कम कर सकते हैं।


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स्रोत और संदर्भ
Everyday Internet Use by Older Adults Might Help Keep Dementia at Bay

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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