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Health Risk: मोटापा के मामले में भारतीय बच्चे दुनिया में दूसरे स्थान पर, इससे जानलेवा रोगों का हो सकता है खतरा

Sat, 28 Dec 2024 06:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मोटापा से ग्रस्त बच्चों की संख्या के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। एक अनुमान के अनुसार भारत में करीब 8.4% बच्चे मोटपे का शिकार हैं। ये संख्या भविष्य में कई प्रकार की बीमारियों के बढ़ने को लेकर चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है।
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बच्चों में अधिक वजन की समस्या - फोटो : Adobe Stock
मोटापा वैश्विक स्तर पर बढ़ती एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, सभी उम्र के लोगों में इसका खतरा देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी उम्र के लोग मोटापे का शिकार देखे जा रहे हैं और सभी की सेहत के लिए ये स्थिति खतरनाक है।

अध्ययनों में मोटापा को टाइप-2 डायबिटीज से लेकर हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल से लेकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों तक को बढ़ाने वाला पाया गया है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अपने वजन को कंट्रोल में रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की सलाह देते हैं। कहीं आप भी तो अधिक वजन की समस्या का शिकार नहीं हैं?

बच्चों में बढ़ती मोटापा की समस्या को सेहत के नजरिए से काफी गंभीर माना जाता है। अतिरिक्त वजन कम उम्र में ही कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है। कम उम्र में ही मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की स्थिति गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है जिसका क्वालिटी ऑफ लाइफ पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। 

यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी माता-पिता को सलाह देते हैं कि वह सुनिश्चित करें कि बच्चे का वजन बढ़ने न पाए।
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बच्चों में मोटापा - फोटो : Adobe Stock
 भारतीय बच्चों में मोटापे की दिक्कत

आंकड़ों से पता चलता है कि भारतीय बच्चों में मोटापे की दिक्कत काफी तेजी से बढ़ती जा रही है। मोटापा से ग्रस्त बच्चों की संख्या के मामले में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर है। एक अनुमान के अनुसार भारत में करीब 8.4% बच्चे मोटापे का शिकार हैं। ये संख्या भविष्य में कई प्रकार की बीमारियों को लेकर चिंता बढ़ाने वाली है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कुछ दशकों पहले की तुलना में अब बच्चों की शारीरिक सक्रियता काफी कम हो गई है जिसे इस समस्या के लिए सबसे बड़े कारण के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा बच्चों में बढ़ती मोटापे की समस्या के अन्य कारणों पर भी माता-पिता को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
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मोटापा की समस्या - फोटो : Freepik.com
कम उम्र में वजन बढ़ने का कारण

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता कि बचपन में मोटापा बढ़ने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जिसको लेकर सभी माता-पिता को गंभीरता से ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।

बच्चों में शारीरिक गतिविधि की कमी जैसे बाहर कम खेलना, दौड़-भाग में कमी, आउटडोर गेम्स में न हिस्सा लेना इसका प्रमुख कारण तो है ही। इसके अलावा स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताना जैसे मोबाइल-कंप्यूटर पर अक्सर लगे रहना, जंक फूड्स और सॉफ्ट ड्रिक्स का अधिक सेवन, शहरी निवास और पारिवारिक सामाजिक स्थितियां भी वजन को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। 

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अधिक वजन के कई नुकसान - फोटो : Freepik.com
क्या कहती हैं विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में पीडियाट्रिशियन डॉ सुरभि अग्रवाल कहती हैं, बचपन में मोटापे की समस्या के कई प्रकार के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इसके जोखिम सिर्फ शारीरिक स्वास्थ्य समस्याओं तक सीमित नहीं हैं। कम उम्र में वजन बढ़ने की स्थिति भविष्य में अवसाद, चिंता और तनाव जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।

बच्चों के समग्र स्वास्थ्य को ठीक रखने और इस प्रकार की जटिलताओं के जोखिम को कम करने के लिए वजन को कंट्रोल में रखने के लिए प्रयास बहुत आवश्यक हैं। माता-पिता की इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कम उम्र से ही कुछ उपाय करके बच्चे के वजन को कंट्रोल रखा जा सकता है।
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बच्चों का खान-पान - फोटो : freepik.com
बच्चों का वजन बढ़ने से कैसे रोका जाए?

डॉक्टर बताती हैं, कुछ सामान्य सी बातों का ध्यान रखकर न सिर्फ बच्चों के वेट को कंट्रोल रखा जा सकता है साथ ही उन्हें भविष्य में गंभीर बीमारियों से बचाए रखने में भी मदद मिल सकती है।
  • स्वस्थ भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि सबसे आवश्यक है। पूरे परिवार को इसका पालन करना चाहिए ताकि बच्चे उनसे सीख सकें। 
  • नाश्त रखें पौष्टिक- सुबह का नाश्ता दैनिक आहार का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें मौसमी फल-जूस, दूध और डेयरी उत्पादों को शामिल करें।
  • ब्रेड, सैंडविच, पाश्ता जैसे अस्वास्थ्यकर खान-पान बच्चों को कम दें। ये वजन बढ़ाने के साथ लिवर की सेहत को भी प्रभावित करने वाली हो सकती है।
  • सुनिश्चित करें कि आपका बच्चा पर्याप्त नींद ले। कुछ अध्ययनों से संकेत मिलता है कि जिन बच्चों की नींद पूरी नहीं होती है उनमें मोटापे का जोखिम अधिक होता है।
  • बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करें। मोबाइल-कंप्यूटर पर कम समय बिताने से बच्चों का बाहर खेलकूद बढ़ेगा जो संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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