कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान लोगों में कई तरह के गंभीर लक्षण देखने को मिले। कोरोना की पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर के दौरान लोगों को हृदय और फेफड़ों से संबंधित दिक्कतों का सामना काफी अधिक करना पड़ा। चूंकि कोरोना वायरस फेफड़ों को भी अधिक प्रभावित कर रहा था यही कारण है कि लोगों को सांस लेने में दिक्कत और ऑक्सीजन के स्तर के कमी जैसी जटिलताओं का सामना ज्यादा करना पड़ा। कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान शरीर में ब्लड ऑक्सीजन के स्तर का निदान करने के लिए पल्स-ऑक्सीमीटर को सबसे ज्यादा प्रयोग में लाया गया। हालांकि अब हाल के एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि पल्स ऑक्सीमीटर कुछ लोगों में गलत रीडिंग दे सकता है, जिससे उनके लिए समस्या का सही तरीके से निदान कर पाना कठिन हो सकता है।
यूके के नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के वैज्ञानिकों ने बताया है कि डार्क स्किन वाले लोगों में पल्स ऑक्सीमीटर की रीडिंग गलत हो सकती है। ऐसे लोगों में ऑक्सीजन के स्तर की पुष्टि करने के लिए डॉक्टरों के अन्य उपायों को भी प्रयोग में लाना चाहिए। वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्लड ऑक्सीजन की गलत रीडिंग के चलते स्वास्थ्य संबंधित कई तरह की जटिलताएं हो सकती हैं, समय पर ऑक्सीजन के घटते स्तर का पता न चल पाने के कारण लोगों की जान भी जा सकती है, ऐसे में चिकित्सकों को अब विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।