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अध्ययन: पल्स ऑक्सीमीटर को लेकर बड़ा खुलासा, ऐसे लोगों में गलत आ सकती है रीडिंग

Tue, 03 Aug 2021 02:42 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पल्स ऑक्सीमीटर की रीडिंग (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान लोगों में कई तरह के गंभीर लक्षण देखने को मिले। कोरोना की पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर के दौरान लोगों को हृदय और फेफड़ों से संबंधित दिक्कतों का सामना काफी अधिक करना पड़ा। चूंकि कोरोना वायरस फेफड़ों को भी अधिक प्रभावित कर रहा था यही कारण है कि लोगों को सांस लेने में दिक्कत और ऑक्सीजन के स्तर के कमी जैसी जटिलताओं का सामना ज्यादा करना पड़ा। कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान शरीर में ब्लड ऑक्सीजन के स्तर का निदान करने के लिए पल्स-ऑक्सीमीटर को सबसे ज्यादा प्रयोग में लाया गया। हालांकि अब हाल के एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि पल्स ऑक्सीमीटर कुछ लोगों में गलत रीडिंग दे सकता है, जिससे उनके लिए समस्या का सही तरीके से निदान कर पाना कठिन हो सकता है।
यूके के नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) के वैज्ञानिकों ने बताया है कि डार्क स्किन वाले लोगों में पल्स ऑक्सीमीटर की रीडिंग गलत हो सकती है। ऐसे लोगों में ऑक्सीजन के स्तर की पुष्टि करने के लिए डॉक्टरों के अन्य उपायों को भी प्रयोग में लाना चाहिए। वैज्ञानिकों का कहना है कि ब्लड ऑक्सीजन की गलत रीडिंग के चलते स्वास्थ्य संबंधित कई तरह की जटिलताएं हो सकती हैं, समय पर ऑक्सीजन के घटते स्तर का पता न चल पाने के कारण लोगों की जान भी जा सकती है, ऐसे में चिकित्सकों को अब विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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गहरे रंग वाले लोगों में गलत आ सकती है रीडिंग - फोटो : Pixabay
गहरे रंग वाले लोगों में गलत हो सकती है रीडिंग 
द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के विश्लेषण के अनुसार जिन लोगों की त्वचा का रंग गहरा होता है, ऐसे लोगों में पल्स ऑक्सीमीटर रीडिंग के गड़बड़ी की आशंका तीन गुना अधिक हो सकती है। एनएचएस शोधकर्ताओं के मुताबिक कई रिपोर्ट से पता चलता है कि यदि आपकी त्वचा भूरी या काली है तो पल्स ऑक्सीमीटर के सटीक रीडिंग की संभावना कम हो सकती है। ऐसी रंगत वाली त्वचा के लोगों में यह उपकरण ब्लड ऑक्सीजन के वास्तविक स्तर से अधिक रीडिंग दिखा सकता है।
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ऑक्सीमीटर की रीडिंग को लेकर शोध - फोटो : istock
एशिया सहित कई हिस्सों के लिए मुश्किल
एनएचएस रेस एंड हेल्थ ऑब्जर्वेटरी के निदेशक डॉ हबीब नकवी कहते हैं, हमारे लिए स्वास्थ्य देखभाल उपकरणों की संभावित सीमाओं के बारे में जानकारी होना आवश्यक है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ब्लड ऑक्सीजन स्तर की जांच के लिए पल्स ऑक्सीमीटर जैसे उपकरणों की मांग तेजी से बढ़ी, पर रिपोर्टस से एशिया सहित गहरे रंग के त्वचा वाले लोगों में उपकरण के गलत रीडिंग के बारे में पता चला है। चूंकि इस उपकरण के माध्यम से रोगियों के स्वास्थ्य की आसानी से निगरनी करके उन्हें गंभीर खतरे से बचाया जा सकता है, ऐसे में आगे से डॉक्टरों को पल्स ऑक्सीमीटर के साथ ऑक्सीजन की जांच के अन्य उपकरणों के माध्यम से भी स्थिति का निदान करना चाहिए।

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ऑक्सीमीटर को लेकर बड़ा खुलासा - फोटो : Pixabay
पल्स ऑक्सीमीटर की गलत रीडिंग ने बढ़ाई चिंता
इंग्लैंड के रॉयल फार्मास्युटिकल सोसाइटी के निदेशक रवि शर्मा कहते हैं, पल्स ऑक्सीमीटर की इस तरह की विसंगतियों को उजागर करने वाले सबूतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है । यह समीक्षा स्वास्थ्य असमानता के एक क्षेत्र को उजागर करती है, यह स्वीकार्य नहीं है और निर्माताओं को इस बारे में गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। कोरोना के ऐसे भयावह दौर में यह निश्चित ही चिंताजनक विषय है।
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ऑक्सीमीटर से पता चलता है शरीर में ऑक्सीजन का स्तर - फोटो : Social Media
ऑक्सीजन के सही स्तर का पता कैसे लगाएं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक पल्स ऑक्सीमीटर के माध्यम से ऑक्सीजन के स्तर का सटीकता से पता लगाने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। ऑक्सीजन के स्तर की जांच करते समय सुनिश्चित करें कि आप एक आरामदायक स्थिति में बैठे हैं। उंगली पर उपकरण को लगाते समय सुनिश्चित करें कि नाखूनों में कोई नेल पेंट या रंगद्रव्य नहीं है। तर्जनी उंगली से जांच करने को विशेषज्ञ बेहतर मानते हैं। रीडिंग के दौरान हाथों को स्थिर रखें और कम से कम 1 मिनट प्रतीक्षा करें। ऑक्सीमीटर को साफ करना सुनिश्चित करें।


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स्रोत और संदर्भ: 
Racial Bias in Pulse Oximetry Measurement

अस्वीकरण नोट: यह लेख द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। संबंधित विषय के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए अपने चिकित्सक से सलाह लें। 
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