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Office Work: 8-9 घंटे ऑफिस में बैठकर काम करना सेहत के लिए नुकसानदायक, ये तरीका दूर कर देगा आपकी सारी टेंशन

Sun, 16 Aug 2026 10:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ऑफिस में घंटों लगातार बैठे रहना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खड़े होकर काम करना या फिर स्टैंडिंग डेस्क का इस्तेमाल लंबे समय तक बैठने का समय कम करने में मदद कर सकती है।
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लंबे समय तक बैठने के नुकसान - फोटो : Amarujala.com/AI
लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी ने कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। लंबे समय तक बैठे रहना, विशेषकर ऑफिस में डेस्क जॉब करने वालों में काफी आम है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ये एक आदत अपने आप में ही कई बीमारियों का घर है। लंबे समय तक बैठे रहने से सिर्फ हमारी कमर नहीं अकड़ जाती या गर्दन में दर्द ही नहीं होने लगता बल्कि ये आदत शारीरिक निष्क्रियता को बढ़ा देती है। पहले से ही स्वास्थ्य विशेषज्ञ शारीरिक निष्क्रियता को मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, दिल की बीमारियों और कुछ तरह के कैंसर का कारण बताते रहे हैं।

अब सवाल उठता है कि अगर नौकरी ही ऐसी है जिसमें घंटों कंप्यूटर के सामने बैठना पड़ता है तो करें क्या? क्या हर थोड़ी देर में कुर्सी छोड़कर घूमते रहें? या फिर कोई ऐसा तरीका है जिससे काम भी चलता रहे और शरीर को भी लगातार बैठे रहने की सजा न मिले?

ऐसे लोगों के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्टैंडिंग डेस्क को अच्छा विकल्प मानते हैं। खड़े होकर काम करने वाली डेस्क पर आप कुछ समय बैठकर और कुछ समय खड़े होकर काम कर सकते हैं। इससे लंबे समय तक बैठकर बिताया जाने वाला समय कम होता है और आप कई बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं।
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लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
पहले जान लीजिए घंटों बैठे रहने से शरीर पर क्या असर पड़ता है?

लगातार कई घंटे बैठे रहने से सबसे पहले शरीर की गतिविधि बहुत कम हो जाती है। असल में जब हम चलते-फिरते हैं तो हमारी मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं, लेकिन लंबे समय तक कुर्सी पर बैठे रहने से शरीर का यह सक्रिय रहना कम हो जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दिन के लंबे समय तक बैठे रहने जैसी कम सक्रिय जीवनशैली दिल की बीमारी, टाइप-2 डायबिटीज और कुछ तरह के कैंसर का शिकार बना सकती है। डेस्क पर काम करने वालों में एक और समस्या आम है।
 
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स्टैंडिंग डेस्क जॉब - फोटो : Freepik.com
स्टैंडिंग डेस्क से क्या होगा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  खड़े होकर काम करने वाली डेस्क, लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम करने में मददगार हो सकती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे आप लगातार बैठे रहने का समय कम कर सकते हैं।

अगर आप रोज आठ घंटे कंप्यूटर पर काम करते हैं तो इतने समय तक कुर्सी पर बैठे रहने के बजाय काम के कुछ हिस्से खड़े होकर करने लगें, तो लंबे समय तक लगातार बैठने की आदत छूट सकती है।

इसी को लेकर एक अध्ययन में पाया गया कि स्टैंडिंग डेस्क का इस्तेमाल करने वाले ऑफिस कर्मचारियों में समय के साथ दिल की बीमारी, डायबिटीज या मोटापे का खतरा पहले से काफी कम हो गया।


बहुत देर खड़े रहना भी ठीक नहीं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लगातार बैठ कर काम करने के बजाय स्टैंडिंग डेस्क का इस्तेमाल करने से पीठ दर्द कम होता है, खाने के बाद ब्लड शुगर का लेवल अचानक नहीं बढ़ता और दिन भर एक ही जगह बैठकर काम करने का समय भी कम होता है। कुछ समय बैठकर और कुछ समय खड़े होकर काम करने से ब्लड सर्कुलेशन में सुधार होता है, जिससे आप लंबे समय तक काम करते हुए भी एक्टिव और आरामदायक महसूस करते हैं। 
 
  • पोजिशन बदलने से दिन भर कुर्सी पर बैठे रहने के कारण होने वाले पीठ के निचले हिस्से और गर्दन में दर्द से राहत मिलती है। 
  • लंच के बाद बैठने के बजाय खड़े रहकर काम करने से शरीर शुगर को अच्छे से प्रोसेस कर पाता है और ब्लड शुगर का लेवल अचानक नहीं बढ़ता। 
  • उठने-बैठने और शरीर के हिलने-डुलने से थकान दूर होती है और दिमाग अलर्ट रहता है। 
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खड़े होकर काम करने के फायदे - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्टैंडिंग डेस्क  का मतलब ये नहीं है कि आप पूरे दिन खड़े रहकर ही काम करें। अगर ज्यादा देर बैठना ठीक नहीं है तो पूरे दिन खड़े रहना भी सही नहीं है।

हमारे शरीर को लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहना पसंद नहीं है। चाहे आप लगातार बैठे रहें या लगातार खड़े रहें, दोनों ही स्थितियों में परेशानी हो सकती है। लंबे समय तक खड़े रहने से पैरों में थकान और दर्द हो सकता है। कुछ लोगों में कमर की परेशानी भी बढ़ सकती है। इसलिए स्टैंडिंग डेस्क का सही इस्तेमाल यही है कि थोड़ी देर बैठकर काम करें और ज्यादा वक्त खड़े होकर।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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