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चिंता: सफेद बाल सिर्फ बढ़ती उम्र की निशानी नहीं, इन बीमारियों से भी हो सकता है कनेक्शन

Fri, 25 Sep 2026 08:40 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कम उम्र में बाल सफेद होना हमेशा उम्र बढ़ने का सामान्य असर नहीं होता। आनुवंशिकता इसकी बड़ी वजह हो सकती है, लेकिन विटामिन बी12 जैसी पोषण संबंधी कमी, थायरॉइड विकार और कुछ ऑटोइम्यून स्थितियां भी इससे जुड़ी हो सकती हैं।
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सफेद बालों की समस्या - फोटो : Amar Ujala
बालों का सफेद होना आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ होने वाला बदलाव माना जाता है। लेकिन जिस तरह से हमारी लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, इसने कम उम्र वालों में भी ये दिक्कत बढ़ा दी है। 20-30 की उम्र में ही बाल सफेद होने के पीछे आनुवंशिकता या तनाव को भी जिम्मेदार माना जाता है।

असल में बालों का रंग मेलानिन नामक वर्णक से तय होता है ऐसे में इसे बनाने वाली मेलानोसाइट कोशिकाओं की सक्रियता कम होने पर बालों में सफेदी दिखाई देने लगती है। वैसे तो इसमें परिवार की आनुवंशिक प्रवृत्ति की बड़ी भूमिका हो सकती है, लेकिन कुछ प्रकार के पोषक तत्वों की कमी और ऑटोइम्यून या हार्मोन से जुड़ी स्थितियां भी बालों की ये सम्याएं बढ़ाने वाली मानी जाती रही हैं। 

आइए इसके कुछ सामान्य कारणों को जान लेते हैं।
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थायरॉइ़ड की दिक्कत - फोटो : Adobe Stock
थायरॉइड की गड़बड़ी

थायरॉइड हार्मोन शरीर के कई जरूरी कामों को प्रभावित करते हैं और इसका असर त्वचा तथा बालों की सेहत पर भी पड़ सकता है। थायरॉइड से जुड़ी गड़बड़ी के कारण बालों के झड़ने, रूखापन और बालों की बनावट में बदलाव जैसी समस्याएं देखी जा सकती हैं। 
 
  • कुछ अध्ययनों में थायरॉइड विकारों और समय से पहले बाल सफेद होने के बीच भी लिंक पाया गया है। अगर कम उम्र में बाल तेजी से सफेद होने के साथ लगातार थकान, वजन में बदलाव, दिल की धड़कन तेज होने या बाल झड़ने जैसी समस्याएं भी हैं, तो डॉक्ट से सलाह लेना जरूरी है।
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बालों की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
एलोपेसिया एरीटा की समस्या

एलोपेसिया एरीटा एक ऑटोइम्यून स्थिति है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से बालों की जड़ों को प्रभावित करने लगती है, जिसके कारण सिर या शरीर के दूसरे हिस्सों में गोल या पैच के रूप में बाल झड़ सकते हैं। कुछ लोगों में इस स्थिति के कारण बाल सफेद या भूरे दिखाई देने लगते हैं। ये बीमारी बालों का रंग बनाने वाली कोशिकाओं को भी प्रभावित करती हैं। 
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विटामिन बी-12 की कमी का असर - फोटो : Adobe Stock
विटामिन और खनिजों की कमी भी हो सकता है कारण

समय से पहले बाल सफेद होने में आनुवंशिकता की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, लेकिन पोषण से जुड़ी कुछ कमियां भी इसका खतरा बढ़ा सकती हैं। 
 
  • विटामिन बी12 की कमी में समय से पहले बाल सफेद होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। 
  • विटामिन बी12 शरीर में रक्त कोशिकाओं और तंत्रिका तंत्र के सामान्य काम के लिए जरूरी है और इसकी कमी होने पर कई दूसरे लक्षण भी सामने आ सकते हैं। 
  • कुछ शोध में विटामिन डी, कैल्शियम, आयरन, जिंक और कॉपर जैसे पोषक तत्वों की कमी का भी बालों की सेहत पर असर देखा गया है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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