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क्या प्रेग्नेंसी में शारीरिक संबंध बनाने से परहेज करना चाहिए?

Sat, 11 May 2019 07:37 PM IST
प्रशांत राय बीबीसी हिंदी
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दावा: भारत सरकार ने गर्भवती महिलाओं को सलाह दी है कि वो गर्भावस्था के दौरान व्यायाम न करें, अंडे न खाएं, अपनी चाहतें और काम वासना छोड़ दें और अपने कमरे में ख़ूबसूरत तस्वीरें लगाएं।
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हकीकत
इनमें से कुछ सलाह अच्छी हैं, कुछ ख़राब और कुछ बिलकुल ही बकवास। भारत की पारंपरिक और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने वाले आयुष मंत्रालय ने पिछले हफ़्ते 16 पन्ने का एक बुकलेट जारी किया।
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बुकलेट का विषय मां और बच्चे की देखभाल से जुड़ा था। ये तीन साल पुराना है लेकिन बुधवार को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के ठीक पहले जारी किए जाने के बाद से ही सुर्ख़ियों में है। आयुष मंत्रालय के तहत आनी वाली एजेंसी सेंट्रल काउंसिल फॉर योग एंड नैचरोपैथी ने इसे तैयार किया है।

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सरकार की सलाह
बुकलेट में महिलाओं को सलाह दी गई है कि गर्भावस्था के दौरान कौन से योग करने चाहिए और कौन से नहीं। क्या खाना चाहिए और क्या नहीं, क्या पढ़ना चाहिए, साथ में क्या रखना चाहिए और किस तरह की तस्वीरें देखनी चाहिए और भी बहुत कुछ।
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भारत में डॉक्टरों का कहना है कि इस अडवाइजरी में कुछ अच्छी बातें हैं लेकिन इनपर पूरी तरह से अमल करना अक्लमंदी नहीं कहा जाएगा। उदाहरण के लिए खानपान पर दी गई सलाह को लेते हैं।
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बुकलेट में स्तनपान कराने वाली और गर्भवती महिलाओं को अंकुरित अनाज, मसूर की दाल, फल, पत्तीदार सब्जियां, जैसे- पालक, ड्राई फ्रूट्स, जूस और अनाज खाने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि ये सारी बातें बहुत अच्छी हैं।
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- फोटो : shutterstock
इस लिस्ट में उन चीजों का भी जिक्र है, जिनसे बचने की सलाह दी गई है। जैसे-चाय, कॉफी, चीनी, मसाले, मैदा, तली-भुनी चीजें, अंडे और नॉनवेज खाना।

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क्या कहते हैं आलोचक
आलोचकों का कहना है कि ये सलाह भारत की हिंदू राष्ट्रवादी भाजपा सरकार की शाकाहार को बढ़ावा देने की नीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि भारत में मातृ मृत्यु दर दुनिया में सबसे ज़्यादा है और यहां गर्भावस्था में कुपोषण और एनीमिया (शरीर में लोहे की कमी) की समस्या के मद्देनजर ये एक ख़तरनाक सलाह है।

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इस आलोचना के बाद आयुष मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया। इसमें कहा गया कि नॉनवेज आहार छोड़ने की सलाह इसलिए दी गई क्योंकि योग और प्राकृतिक चिकित्सा मांसाहार का पक्ष नहीं लेता। उन्होंने मीडिया पर ये आरोप भी लगाया कि अंडा और मांस पर सलाह को जानबूझ कर उठाया जा रहा है जबकि लिस्ट में वर्णित सेहत के लिए नुकसानदेह दूसरी चीज़ों का जिक्र नहीं किया जा रहा है।

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डॉक्टरों की राय
लेकिन केवल मीडिया ही नहीं बल्कि डॉक्टर भी इस एडवाइजरी पर सवाल उठा रहे हैं। दिल्ली में पेशे से स्त्री रोग विशेषज्ञा सोनिया नाइक कहती हैं, "एक डॉक्टर के तौर पर मैं इस सलाह में कोई मेरिट नहीं देखती कि गर्भवती महिलाओं को अंडा या मांस नहीं खाना चाहिए क्योंकि ये प्रोटीन का सबसे आसान और सस्ता स्रोत है। मेरी सलाह यही है कि जिसे जो पसंद हो, उसे वो खाता रहना चाहिए।"

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आयुष मंत्रालय की ये सलाह खुद भारत सरकार के दूसरे विभाग स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाह से मेल नहीं खाती। हेल्थ मिनिस्ट्री की वेबसाइट पर लिखा है, "अगर मां को आयरन की कमी हो तब भी भ्रूण मां से आयरन लेता है। इसलिए मांस, कलेजी, अंडा, हरा मटर, मसूर की दाल, हरी पत्तीदार सब्जियां खाने के लिए मां को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।"

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कई लोगों को ये सलाह कड़वी गोली की तरह लग सकती है लेकिन इस बुकलेट के आगे के कुछ पैराग्राफ़ आपको अजीबोगरीब भी लग सकते हैं।

योग पर रजामंदी
बुकलेट में कहा गया है, "गर्भवती महिलाओं को काम वासना, गुस्सा, घृणा जैसी भावनाओं से खुद दूर रखना चाहिए। बुरे लोगों के साथ नहीं रहना चाहिए, हमेशा सज्जनों के साथ और शांत माहौल में रहना चाहिए।"

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हालांकि आयुष मंत्रालय ने जोर देकर कहा है कि उसने 'भारत में गर्भवती महिलाओं को गर्भधारण के बाद सेक्स से बचने की सलाह' नहीं दी है लेकिन जानकार कहते हैं कि 'चाहत' और 'काम वासना' से 'खुद को अलग रखने की सलाह' का यही मतलब होता है।

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वैसे स्वास्थ्य मंत्रालय इस मुद्दे पर खामोश है. डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था में सेक्स करने से कोई नुकसान नहीं होता है। डॉक्टर नाइक कहती हैं, "वास्तव में कुछ हार्मोंस के कारण कुछ गर्भवती महिलाओं में सेक्स की चाहत बढ़ जाती है और जब तक हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का मामला न हो, हम उन्हें सेक्स से दूर रहने की सलाह नहीं देते हैं।"
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बुकलेट में एक सलाह ऐसी भी है जिसे लेकर आम तौर पर हर कोई सहमत दिखता है। वह है योग के फ़ायदे. पारंपरिक तौर पर ये माना जाता रहा है कि गर्भवती महिलाओं को ज़्यादा आराम करना चाहिए लेकिन अब डॉक्टर रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ तरह के व्यायाम की सलाह देते हैं।
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