Pregnancy Safety In Air Pollution: दिल्ली-एनसीआर के कई क्षेत्रों में इन दिनों वायु प्रदूषण अपने चरम है, और इसका नकारात्मक असर बच्चों लेकर बुढ़ों तक हर किसी में देखने को मिल रहा है। 400+ एक्यूआई का वायु प्रदूषण, बच्चे, बूढ़े, वयस्क और गर्भवती महिलाओं समेत हर किसी को नुकसान पहुंचाता है। हमने
वायु प्रदूषण के नकारात्मक प्रभाव और
बीमारियों के जोखिम के बारे में बताया है। इसलिए आइए इस लेख में जानते हैं कि ये खतरनाक वायु प्रदूषण गर्भवती महिलाओं को किस तरह प्रभावित कर रहा है और इससे बचने के लिए किस तरह की सावधानियां बरतना जरूरी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक ये प्रदूषण गर्भ में पल रहे शिशु के स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। इसी विषय पर गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर अंजली कुमार ने सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर करके आगाह किया है कि गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में रहना दोहरी चुनौती है।
इस प्रदूषण का सबसे बड़ा खतरा PM2.5 कणों से है, जो रेत के दाने से भी 30 गुना ज्यादा छोटे होते हैं। अपने अत्यंत सूक्ष्म आकार के कारण, ये जहरीले कण सांस के माध्यम से फेफड़ों को पार करके सीधे रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं, और दुख की बात यह है कि ये प्लेसेंटा तक भी पहुंच सकते हैं।
डॉक्टर अंजली ने बताया कि PM2.5 के संपर्क में आने से शिशु का वजन कम हो सकता है, समय से पहले प्रसव का जोखिम बढ़ सकता है, और बचपन में अस्थमा जैसी सांस की बीमारियां होने की आशंका अधिक हो जाती है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि उनकी हर सांस सीधे उनके अजन्मे बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ी है।