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सावधान: गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर बढ़ा तो मां-बच्चे दोनों को खतरा, कौन से लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क?

Mon, 05 Oct 2026 07:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गर्भावस्था में ब्लड प्रेशर बढ़ना मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। कुछ महिलाओं में प्री-एक्लेम्पसिया और एक्लेम्पसिया जैसी गंभीर स्थितियां विकसित हो सकती हैं। लगातार सिरदर्द, नजर में बदलाव, अचानक सूजन या सांस लेने में परेशानी जैसे संकेतों पर तुरंत डॉक्टरी सलाह जरूरी है।
 
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प्रेग्नेंसी में बीपी की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
गर्भावस्था किसी भी महिला के जीवन का बेहद खास समय होता है। इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिनकी वजह से थकान-कमजोरी, उल्टी, चक्कर आने और नींद से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान अपनी सेहत को लेकर खास सावधानी बरतते रहने, अच्छी डाइट और हल्के-फुल्के व्यायाम करते रहने की सलाह देते हैं।

गर्भावस्था के दौरान थकान-कमजोरी जैसी हल्की-फुल्की समस्याएं आम हैं, लेकिन अगर कोई दिक्कत लंबे समय तक बनी रहती है तो इसपर गंभीरता से ध्यान देते रहना जरूरी है। खासकर गर्भावस्था के दौरान ब्लड प्रेशर को लेकर खास सावधानी जरूरी है। प्रेग्नेंसी के दौरान बीपी बढ़ना मां और बच्चे दोनों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

आइए जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में हाई ब्लड प्रेशर कितना खतरनाक हो सकता है और इससे बचाव के लिए क्या उपाय जरूरी है?
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हाई ब्लड प्रेशर की समस्या - फोटो : Freepik.com
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गर्भावस्था में हाई बीपी कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षणों के भी हो सकता है। इसके कारण कुछ महिलाओं में सिरदर्द, आंखों के सामने धुंधला दिखने, घबराहट और बेचैनी महसूस होने जैसे संकेत नजर आ सकते हैं। ऐसे लक्षणों की समय पर पहचान और इलाज से गंभीर जटिलताओं से बचाव किया जा सकता है। इसलिए प्रेग्नेंसी के दौरान नियमित जांच, डॉक्टर की सलाह और बीपी चेक कराते रहना बेहद जरूरी मानी जाती है।

गर्भावस्था में बीपी की समस्या

गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर में रक्त वाहिकाओं और प्लेसेंटा से जुड़े बदलावों को इसका बड़ा कारण माना जाता है। कुछ महिलाओं में पहले से हाई बीपी होता है, जबकि कुछ में 20वें सप्ताह के बाद गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी (प्रीक्लेम्पसिया) हो सकता है। 
 
  • प्री-एक्लेम्पसिया एक अलग गंभीर स्थिति है, जिसमें हाई बीपी के साथ शरीर के दूसरे अंगों पर असर के संकेत भी हो सकते हैं।
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प्रेग्नेंसी में हाई बीपी की समस्या - फोटो : Adobe Stock
गर्भावस्था में बीपी बढ़ने से क्या दिक्कतें होती हैं?

गर्भावस्था में अनियंत्रित हाई बीपी से एक्लेम्पसिया और स्ट्रोक जैसी गंभीर जटिलताओं का जोखिम बढ़ जाता है। 
  • एक्लेम्पसिया, गर्भावस्था के दौरान होने वाली एक अत्यंत गंभीर और जानलेवा स्थिति है, जिसमें प्री-एक्लेम्पसिया (हाई ब्लड प्रेशर और मूत्र में प्रोटीन) से पीड़ित महिला को दौरे आने लगते हैं।
  • हाई बीपी के कारण प्लेसेंटा के समय से पहले अलग होने जैसी समस्याएं भी हो सकती है।

बच्चे पर भी पड़ सकता है असर

मां का ब्लड प्रेशर ज्यादा रहने पर बच्चे तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचने में परेशानी हो सकती है। इससे समय से पहले डिलीवरी और बच्चे का वजन कम होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए गर्भावस्था में बीपी की समस्या को सिर्फ मां की समस्या नहीं मानना चाहिए। इसका असर गर्भ में बच्चे की ग्रोथ और डिलीवरी के समय पर भी पड़ सकता है।
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प्रेग्नेंसी में रखें सेहत का ख्याल - फोटो : Amarujala.com/AI
समय-समय पर लेती रहे डॉक्टर की सलाह

इन्हीं जोखिमों को देखते हुए गर्भावस्था में समय-समय पर डॉक्टर की सलाह लेते रहना जरूरी माना जाता है। 

अगर आपको अचानक कुछ समय से तेज या लगातार सिरदर्द हो रहा है, नजर धुंधली हो गई है, चेहरे या हाथों में सूजन है या सांस लेने में परेशानी हो रही है तो इन लक्षणों को अनदेखा न करें। प्री-एक्लेम्पसिया कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के भी हो सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड प्रेशर और जरूरी जांच कराना जरूरी है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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