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सेहत की बात: कुर्सी से उठते ही आने लगता है चक्कर, आंखों के सामने छा जाता है अंधेरा? कहीं आपको POTS तो नहीं

Tue, 26 Mar 2024 04:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चक्कर आने की समस्या - फोटो : istock
कुछ देर बैठे रहने या सो कर उठते ही क्या आपको भी अक्सर चक्कर आने, आंखों के सामने अंधेरा छा जाने या बेहोशी जैसी समस्या होने लगती है? कुछ स्थितियों में इसे कमजोरी के कारण होने वाली दिक्कत मानी जाती है पर अगर आपको बार-बार ये समस्या बनी रहती है तो सावधान हो जाइए, ये गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी संकेत हो सकता है। मेडिकल में इसे पोस्टुरल ऑर्थोस्टैटिक टैचीकार्डिया सिंड्रोम (पीओटीएस) नामक समस्या के रूप में जाना जाता है।

पीओटीएस, एक ऐसा विकार है जिसमें जब हम खड़े होते हैं तो शरीर का अधिकांश रक्त आपके निचले शरीर में रह जाता है। पूरे शरीर में रक्त के संचार को बढ़ाने के लिए हृदय गति बढ़ जाती है, जिसके कारण इस तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। 

हमारे पूरे शरीर में रक्त का संचार निरंतर होता रहता है, चाहे आप बैठे हों, खड़े हों या लेटे हों। हालांकि जिन लोगों को पीओटीएस की समस्या होती है उनमें खड़े होने पर शरीर के ऊपरी हिस्से में रक्त नहीं पहुंच पाता है। ये स्थिति गंभीर समस्याकारक भी हो सकती है। आइए जानते हैं कि पीओटीएस क्यों होती है और इसके क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं?
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बेहोशी और चक्कर आने की समस्या - फोटो : iStock
ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम की समस्या

जॉन्स हॉप्किंस के विशेषज्ञ कहते हैं, आमतौर हमारे शरीर का ऑटोनोमिक नर्वस सिस्टम हृदय गति और रक्तचाप को संतुलित बनाए रखता है जिससे कि शरीर के सभी हिस्सों में रक्त का संचार ठीक तरीके से होता रह सके। पीओटीएस की समस्या वाले लोगों में रक्त संचार का संतुलन ठीक तरीके से नहीं हो पाता है। इसका मतलब है कि आपका शरीर रक्तचाप को स्थिर नहीं रख पाता है।

इस कारण से जब भी आप खड़े होते हैं तो शरीर का ज्यादातर रक्त निचले हिस्सों में ही रह जाता है और ऊपरी हिस्से में रक्त की कमी हो जाती है।
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तंत्रिकाओं में होने वाली समस्या - फोटो : istock
क्यों होती है इस तरह की दिक्कत?

हर व्यक्ति में पीओटीएस के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि यह एक ऑटोइम्यून विकार है। जब आपको कोई ऑटोइम्यून विकार होता है, तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अज्ञात कारणों से स्वस्थ ऊतकों पर ही अटैक कर देती है। इसका आनुवांशिक जोखिम भी देखा जाता रहा है और ये समस्या किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। विशेषज्ञ कहते हैं, कुछ प्रकार की बीमारियों के कारण भी लोगों में पीओटीएस का खतरा बढ़ता हुआ देखा गया है। 
  • एनीमिया (शरीर में पर्याप्त लाल रक्त कोशिकाओं की कमी)
  • ऑटोइम्यून बीमारियां, जैसे स्जोग्रेन सिंड्रोम या ल्यूपस
  • क्रोनिक फटीग सिंड्रोम
  • मधुमेह की समस्या।
  • मल्टीपल स्क्लेरोसिस रोग
  • कुछ अध्ययनों में कोविड-19 के शिकार लोगों में इस समस्या को देखा गया है।

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हार्ट रेट बढ़ने का कारण - फोटो : istock
कैसे जानें कहीं आपको भी तो नहीं है पीओटीएस  की समस्या?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पीओटीएस में चूंकि रक्त के संचार की समस्या हो जाती है, इसलिए इससे आपके पूरे शरीर का संतुलन बिगाड़ सकता है। सामान्यतौर पर इसके कारण लोगों में चक्कर आने या बेहोशी, धुंधला दिखाई देने, जी मिचलाने-उल्टी, अत्यधिक पसीना आने, थकान महसूस होने की समस्या हो सकती है। 

ये रक्तचाप के अधिक या कम होने या फिर दिल की धड़कन के तेज या धीमी होना का भी कारण बन सकती है। कुछ लोगों के हाथों और पैरों का रंग  भी असामान्य होने लग सकता है। यदि रक्त हृदय से नीचे बना रहता है इससे चेहरा पीला पड़ने या हाथों का रंग बैंगनी होने की भी दिक्कत हो सकती है।
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खून के संचार को कैसे रखें ठीक - फोटो : istock
पीओटीएस की समस्या का उपचार और बचाव

पीओटीएस का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, पर कुछ सहायक चिकित्सा विधियों से इसके कारण होने वाली समस्याओं को कम किया जा सकता है। रक्त के संचार को ठीक रखने के लिए डॉक्टर कुछ दवाएं दे सकते हैं। इसके अलावा रक्त के संचार से संबंधित समस्याओं के लिए लाइफस्टाइल में सुधार करने की सलाह दी जाती है। नियमित व्यायाम करना इसमें आपके लिए मददगार हो सकता है। रक्तचाप और हृदय गति को ठीक बनाए रखने में आहार की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।

अगर आपको भी पीओटीएस की समस्या का अनुभव होता है तो इस बारे में डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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