फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Postpartum Depression: अधिकतर महिलाओं को होती है यह समस्या, जानिए इसके लक्षण से लेकर बचाव तक विस्तार से

Sun, 31 Jul 2022 04:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला , नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
प्रसवोत्तर अवसाद का खतरा - फोटो : Pixabay
मातृत्व को संसार का सबसे बड़ा सुख माना जाता है। यह नई जिम्मेदारियों का समय भी होता है, जिसके साथ कई तरह की शारिरिक और मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति में बदलाव भी आ जाता है। बच्चे के जन्म के उत्साह और खुशी से लेकर भय और चिंता तक, प्रसव काल कई तरह की भावनात्मक चुनौतियों वाला समय माना जाता है। इसी वजह से अक्सर महिलाओं में  पोस्टपार्टम डिप्रेशन की समस्या देखने को मिलती है।

इस अनुभव को बेबी ब्लू के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें मिजाज में बदलाव, चिंता और सोने में कठिनाई, नींद की कमी और चिड़चिड़ापन जैसी कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं।

आमतौर पर प्रसव के बाद पहले दो से तीन दिनों के भीतर ही इस तरह के अनुभव होने शुरू हो सकते हैं, वहीं कुछ महिलाओं में ऐसी दिक्कतें लंबे समय तक भी बनी रह सकती हैं, जिसपर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता होती है।  प्रसवोत्तर अवसाद या पोस्टपार्टम डिप्रेशन, कोई  कमजोरी नहीं है, बल्कि महिलाओं में यह काफी सामान्य है। इस दौरान उनके विशेष ख्याल रखने की आवश्यकता होती है। आइए महिलाओं के जीवन से जुड़ी पोस्टपार्टम डिप्रेशन की इस समस्या को विस्तार से समझते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
प्रसवोत्तर अवसाद के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay
पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्यों होता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक पोस्टपार्टम डिप्रेशन का कोई एक कारण नहीं है, यह कई तरह के शारीरिक और भावनात्मक समस्याओं के संयोजन के कारण होने वाली समस्या है। बच्चे के जन्म के बाद आपके शरीर में हार्मोन (एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन) के स्तर में बदलाव को इसका प्रमुख कारण माना जाता है। इस स्थिति में थायरॉयड ग्रंथि द्वारा उत्पादित हार्मोन्स का भी स्तर तेजी से गिरने लगता है जिसके कारण थकावट, सुस्ती और उदासी महसूस हो सकती है। इसके अलावा नवजात शिशु की देखभाल को लेकर बढ़ी आपकी चिंता को भी पोस्टपार्टम डिप्रेशन का कारण माना जाता है। 
विज्ञापन

3 of 5
प्रसवोत्तर अवसाद के लक्षण क्या होते हैं? - फोटो : iStock
पोस्टपार्टम डिप्रेशन में क्या समस्याएं होती हैं?

पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण एक महिला से दूसरी में अलग हो सकते हैं, यह मुख्यरूप से स्थिति के कारकों पर निर्भर करता है। सामान्यतौर पर अवसाद में इस तरह की समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। 
  • बच्चे के साथ भावनात्मक संबंध बनाने में कठिनाई महसूस होना।
  • भूख न लगना या सामान्य से अधिक खाना।
  • अनिद्रा या बहुत अधिक सोना।
  • अत्यधिक थकान या ऊर्जा में कमी।
  • उन गतिविधियों में कम रुचि और आनंद लेना, जो आप पहले पसंद किया करते थे।
  • चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ना।
  • स्पष्ट रूप से सोचने, ध्यान केंद्रित करने या निर्णय लेने की क्षमता में कमी महसूस होना।
  • बेचैनी, गंभीर चिंता और पैनिक अटैक।

4 of 5
अवसाद को कैसे कम किया जाता है? - फोटो : Istock
पोस्टपार्टम डिप्रेशन को कैसे ठीक किया जाता है?

यदि प्रसव के बाद आपको भी इस तरह की समस्याओं का अनुभव होता है तो इस बारे में किसी चिकित्सक से सलाह जरूर ले लेनी चाहिए। यदि यह समस्याएं थायरॉयड या किसी अंतर्निहित बीमारी के कारण हो रही है तो इसमें इलाज की आवश्यकता होती है। पोस्टपार्टम डिप्रेशन के सामान्य लक्षणों के लिए मनोचिकित्सा (टॉक थेरेपी या मानसिक स्वास्थ्य परामर्श/काउंसिलिंग) और दवा या दोनों की जरूरत हो सकती है। इस स्थिति में उपचार न लेने से समस्याओं के बढ़ने का जोखिम होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
पोस्टपार्टम डिप्रेशन में क्या करें? - फोटो : istock
पोस्टपार्टम डिप्रेशन में इन बातों का रखें ध्यान

पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षणों को ठीक करने के लिए उपचार के साथ-साथ आपको अपनी जीवनशैली में भी बदलाव करने की आवश्यकता होती है। इसके लिए दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि को शामिल करें। इसके साथ पर्याप्त आराम करने की भी कोशिश करें। स्वस्थ भोजन करें और शराब-धूम्रपान जैसे नशे से बचें। प्रसव के बाद महसूस होने वाली भावनात्मक समस्याओं के बारे में परिवार और दोस्तों से बात करें। सकारात्मक सोच रखें इससे परेशानी से जल्द निकलने में मदद मिलती है। 


----------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें