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अध्ययन: पोस्ट कोविड के हो सकते हैं 200 से अधिक प्रकार के लक्षण, कहीं आपको भी तो नहीं है ऐसी दिक्कत?

Sat, 13 Nov 2021 01:51 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पोस्ट कोविड सिंड्रोम की समस्या - फोटो : iStock
देश में कोरोना संक्रमण के मामलों और मृत्युदर में पिछले कुछ दिनों से उतार-चढ़ाव जारी है। कई देशों में एक बार फिर से कोरोना के मामलों में आया उछाल लोगों की चिंता का बढ़ाने वाला है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों ने वैक्सीन की दोनों डोज ले ली हैं, उनमें कोरोना के गंभीर संक्रमण और इसके कारण होने वाली जटिलताओं का जोखिम कम होता है। कोरोना के केस में उछाल के साथ कुछ लोगों में पोस्ट कोविड की जटिलताएं अभी भी बनी हुई देखी जा रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके कुछ लोगों में कुछ महीनों तक पोस्ट कोविड के लक्षण बने रह सकते हैं, हालांकि अगर यह लंबे समय तक रहते हैं, तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह लेना बहुत आवश्यक हो जाता है।

पोस्ट कोविड या लॉन्ग कोविड का मतलब कोरोना से ठीक हो चुके लोगों में लंबे समय तक कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का बने रहना है। कोरोना से रिकवरी के बाद थकान और कमजोरी होना सामान्य है, हालांकि कुछ अन्य गंभीर लक्षणों का समय पर इलाज आवश्यक हो जाता है। आइए आगे की स्लाइडों में ऐसे ही कुछ पोस्ट कोविड लक्षणों के बारे में जानते हैं, जिनको लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।
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लॉन्ग कोविड की समस्या - फोटो : iStock
किन्हें होता है पोस्ट कोविड का ज्यादा खतरा?
अमर उजाला से बातचीत में डॉ विक्रमजीत सिंह (डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन) बताते हैं, कोरोना की दूसरी लहर ने संक्रमितों के कई अंगों को गंभीर रूप से प्रभावित किया। यही कारण है कि रिकवरी के बाद भी लंबे समय, यहां तक कि कुछ लोगों में छह महीने से एक साल तक भी, कुछ लक्षण बने रह सकते हैं।

पोस्ट कोविड की समस्याओं का सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों में देखा जा रहा है जिन्हें कोरोना के इलाज के दौरान गंभीर संक्रमण के चलते आईसीयू में भर्ती होना पड़ा था। इसके अलावा कमजोर इम्यूनिटी और कोमारबिडिटी वाले लोगों में भी कुछ लक्षण लंबे समय तक बने रह सकते हैं। 
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थकान और कमजोरी की समस्या - फोटो : iStock
पोस्ट कोविड के हो सकते हैं 200 से अधिक लक्षण
थकान, कमजोरी और कुछ लोगों को सीने में दर्द जैसे पोस्ट कोविड के लक्षणों के बारे में आपने भी सुना होगा। वहीं लैंसेट जर्नल ईक्लिनिकल मेडिसिन प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि पोस्ट कोविड के एक-दो नहीं 200 से अधिक प्रकार के लक्षण हो सकते हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि पोस्ट कोविड के कारण कुछ लोगों में सुनाई न देने, त्वचा में खुजली, मासिक धर्म चक्र में बदलाव, यौन समस्या, सीने में दर्द, याददाश्त की कमजोरी और साफ दिखाई न देने जैसे लक्षण भी देखे जा रहे हैं। यह लक्षण लंबे समय तक रह सकते हैं, ऐसे में इसका समय पर निदान और इलाज आवश्यक होता है।

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हो सकता है नींद संबंधी विकार - फोटो : Pixabay
ऐसे लक्षणों पर भी ध्यान दें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना से ठीक होने के बाद लोगों में छह महीने से अधिक समय तक खांसी, तनाव और नींद की समस्याएं देखने को मिल रही हैं। डॉक्टरों के मुताबिक रिकवरी के बाद कुछ हफ्तों तक पोस्ट कोविड के लक्षण बने रहना सामान्य है, हालांकि यदि यह 6 महीने से आपको परेशान कर रहे हैं, तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।
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कोविड रिकवरी के बाद बरतें सावधानी - फोटो : iStock
कोविड से ठीक हो चुके लोग इन बातों का ध्यान रखें
डॉ विक्रमजीत सिंह बताते हैं, कोविड से ठीक हो चुके लोगों को 90 दिनों बाद टीकाकरण अवश्य करा लेना चाहिए, इससे भविष्य में कोरोना के गंभीर संक्रमण का खतरा कम हो जाता है। इसके अलावा कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन करते रहना सभी के लिए आवश्यक है। हमेशा इस बात को ध्यान में रखें कि वायरस अब भी हमारे आसपास मौजूद है, इससे बचाव जरूरी है। इसके अलावा यदि आपमें रिकवरी के 3-6 महीने बाद तक भी कुछ लक्षण बने रहते हैं तो इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।  


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों और विशेषज्ञों के सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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