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Women Health: पीसीओएस, पीसीओडी और पीएमओएस में क्या अंतर है? आसान भाषा में समझिए तीनों को

Sat, 16 May 2026 08:07 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट बनने लगते हैं। अब इसे पीएमओएस यानी पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम नाम दिया गया है। आखिर क्या है इन दोनों में अंतर? 
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पीसीओएस अब पीएमओएस - फोटो : Amarujala.com/AI
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओओस) दुनियाभर में महिलाओं में रिपोर्ट की जाने वाली हार्मोनल समस्या रही है, जो मेटाबॉलिज्म, प्रजनन क्षमता और हार्मोन्स को प्रभावित करती है। इस समस्या के कारण पीरियड्स के अनियमित होने, चेहरे या शरीर पर अत्यधिक बाल उगने, मुंहासे और वजन घटाने या गर्भधारण करने में कठिनाई देखी जाती रही है।

कई एक्सपर्ट्स लंबे समय से यह तर्क दे रहे थे कि यह नाम अधूरा और गुमराह करने वाला है। सिर्फ ओवरीज नाम आने की वजह से, इस समस्या से जुड़ी मेटाबॉलिक, हार्मोनल, प्रजनन और मानसिक चुनौतियों पर कम ध्यान दिया जाता है। इस क्रम में अब बड़ा बदलाव आया है। मलेशिया स्थित मोनाश यूनिवर्सिटी की अगुवाई में दुनियाभर में किए गए बड़े और अहम प्रयास के बाद, अब पीसीओएस को 'पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम' (पीएमओएस) नाम दिया गया है।

पीएमओएस से मिलते-जुलते दो शब्द पीसीओएस और पीसीओडी भी काफी चर्चा में रहे हैं। आइए इन तीनों के बारे में जानते हैं और समझते हैं कि तीनों में क्या अंतर है?
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महिलाओं में हार्मोनल समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com
पीसीओएस का नाम बदलकर पीएमओएस क्यों रखा गया है?

नया नाम 'पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम', इस बीमारी की जटिल और कई अंगों से जुड़ी प्रकृति को दर्शाने के लिए रखा गया है। 
 
  • 'द लैंसेट' में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय सहमति के अनुसार, पुराने नाम में ओवेरियन सिस्ट (अंडाशय में गांठ) पर जरूरत से ज़्यादा जोर दिया जा रहा था, जबकि सच्चाई यह है कि इस बीमारी से पीड़ित कई महिलाओं में सिस्ट बनते ही नहीं हैं। इसके बजाय, इस विकार में एंडोक्राइन सिस्टम, मेटाबॉलिज्म और अंडाशय के कामकाज में गड़बड़ियां हो सकती हैं।
  • यह बदलाव भारत के लिए खास तौर पर अहम है, जहां पीएमओएस लाखों महिलाओं को प्रभावित करता है।
  • ये मोटापा, डायबिटीज, बांझपन और मानसिक स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली समस्या है।

आइए पीसीओएस, पीसीओडी और पीएमओएस के बारे में जान लेते हैं।
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पीसीओएस की समस्या क्या है? - फोटो : Freepik.com
पहले पीसीओएस के बारे में जानिए

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) हार्मोन से जुड़ी एक स्वास्थ्य समस्या है, जिसके प्रजनन की उम्र वाली महिलाओं में दिखाई देने लगते हैं। 
 
  • अगर आपको पीसीओएस है तो हो सकता है कि आपके पीरियड्स बहुत कम या अनियमित हों।
  •  इसके अलावा, आपके शरीर पर पुरुषों की तरह बाल भी उग सकते हैं, जिसे हिर्सुटिज्म कहा जाता है। शरीर में एंड्रोजन हार्मोन बहुत ज्यादा बढ़ जाने के कारण ऐसा होता है।
  • महिलाओं में पीसीओएस के कारण  ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट भी बनने लगते हैं। 
  • यह मुख्य रूप से खराब लाइफस्टाइल, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी से जुड़ी मानी जाती है।

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मासिक धर्म की समस्या - फोटो : Freepik.com
पीसीओडी क्या है?

पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें महिलाओं की ओवरी सामान्य से अधिक अपरिपक्व अंडे बनाने लगती है। 
 
  • समय के साथ ये अंडे छोटे-छोटे सिस्ट में बदल जाते हैं। इसके कारण ओवरी का आकार बढ़ सकता है और हार्मोन असंतुलन शुरू हो जाता है।
  • इसके कारण हार्मोनल असंतुलन,विशेष रूप से एण्ड्रोजन (पुरुष हार्मोन) का स्तर बढ़ जाता है।
  • पीसीओडी की स्थिति में अनियमित पीरियड्स, वजन बढ़ने, मुंहासे और प्रजनन संबंधी समस्याएं होती हैं।
  • पीसीओडी भी मुख्य रूप से लाइफस्टाइल से जुड़ी समस्या है। ज्यादा जंक फूड खाना, शारीरिक गतिविधि में कमी, तनाव और मोटापे को इसका कारण माना जाता है।
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मासिक धर्म की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
अब पीएमओएस के बारे में जानिए

पीएमओएस यानी पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम कोई अलग समस्या नहीं है। इसे पीसीओएस का नाम बदलकर रखा गया है। 
 
  • विशेषज्ञ मानते हैं कि इसमें शरीर के कई हार्मोन सिस्टम और मेटाबॉलिक प्रक्रियाएं शामिल होती हैं, इसलिए इसे ज्यादा व्यापक रूप से समझने के लिए पीएमओएस शब्द का उपयोग किया जाता है।
  • पीएमओएस में “पॉलीएंडोक्राइन” का मतलब है कई हार्मोन ग्रंथियों का प्रभावित होना, जबकि “मेटाबॉलिक” शरीर की ऊर्जा और शुगर मेटाबॉलिज्म से जुड़ा है। 
  • यानी इस स्थिति में इंसुलिन, थायरॉयड, एड्रिनल हार्मोन और प्रजनन हार्मोन सभी प्रभावित हो सकते हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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