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Office Work: विशेषज्ञों की सलाह 4-डे वर्किंग कल्चर अपनाएं कंपनियां, इस जानलेवा समस्या से निपटने के लिए जरूरी

Sat, 16 May 2026 08:07 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की रिपोर्ट बताती है कि रोजाना लंबे समय तक बैठने वालों में हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे का खतरा अधिक हो सकता है। ऑफिस जॉब करने वालों में इसका जोखिम और बढ़ जाता है। इन्हीं खतरों को देखते हुए अब विशेषज्ञ सप्ताह में चार वर्किंग डे करने की सलाह दे रहे हैं।
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ऑफिस में लंबे समय बैठे रहना हो सकता है खतरनाक - फोटो : Amarujala.com/AI
सुबह जल्दी उठकर ऑफिस पहुंचना, घंटों कुर्सी पर बैठकर लैपटॉप की स्क्रीन से चिपके रहना, मीटिंग्स का दबाव और देर रात तक काम, ये सब मौजूदा समय का आम वर्किंग कल्चर बन गया है। नौकरी की डिमांड के हिसाब से ये जरूरी भी है, पर क्या आप जानते हैं कि ये आदतें आपकी सेहत के लिए इतने बड़े खतरे को न्योता दे रही हैं जिसका ज्यादातर लोगों को अंदाजा तक नहीं होता है।

विशेषज्ञ कहते हैं, लॉन्ग वर्किंग ऑवर्स यानी दिन में 8-10 घंटे काम और लगातार बैठे रहने की आदत धीरे-धीरे शरीर को बीमार बना रही है। लिहाजा मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, तनाव, डिप्रेशन, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याएं अब युवाओं में तेजी से बढ़ती देखी जा रही हैं।

अध्ययनों से पता चलता है कि रोजाना 8-10 घंटे तक लगातार बैठकर काम करने वालों में मोटापे का खतरा कहीं ज्यादा देखा जा रहा है। इसके अलावा ऑफिस के काम के चलते बढ़ता स्क्रीन टाइम और शारीरिक गतिविधि कम होने से शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता घटती है। ये सभी गंभीर बीमारियों को बढ़ाने वाली मानी जाती हैं। इन्हीं जोखिमों को कम करने के लिए अब विशेषज्ञ पांच की जगह चार-दिवसीय कार्य सप्ताह की सलाह दे रहे हैं।

आइए जानते हैं इसके पीछे का क्या तर्क है और क्या ये वास्तव में फायदेमंद साबित हो सकता है?
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मोटापा कम करने के तरीके - फोटो : Adobe stock photos
मोटापा और बीमारियों को कम करने के लिए सप्ताह में 4 दिन काम

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कर्मचारियों में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं, विशेषतौर पर मोटापे के खतरे को देखते हुए हफ्ते में 5 की जगह 4 वर्किंग डे करने पर विचार किया जाना चाहिए। कमर पर बढ़ती चर्बी और तनाव के स्तर को कम करने की दिशा में ये बदलाव काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं पर बीमारियों का बोझ काफी कम किया जा सकता है।
 
  • एक नए शोध में पाया गया है कि जिन देशों में काम करने के घंटे यानी कि वर्किंग ऑवर्स ज्यादा होते हैं, वहां कर्मचारियों में मोटापे की दर भी सबसे ज्यादा देखी जाती है।
  • भले ही ऐसे लोगों का खान-पान ठीक हो पर लंबे समय तक काम करने के चलते मोटापे का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञ अब इन खतरों को देखते हुए यूके में हफ्ते में चार दिन काम शुरू करने के लिए सरकार पर फिर से दबाव डाल रहे हैं। दावा है कि यह मोटापे की बढ़ती दरों को कम करने में मददगार हो सकता है।
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सप्ताह में चार दिन काम करने का चलन - फोटो : Freepik.com
कई देश पहले से अपना रहे हैं 4-डे वर्किंग कल्चर

ऐसी पहली बार नहीं है जब 4-डे वर्किंग कल्चर की मांग उठी है।
 
  • संयुक्त अरब अमीरात में संघीय सरकार और कई निजी क्षेत्र 4.5 दिन के छोटे कार्य-सप्ताह (जो शुक्रवार को दोपहर में समाप्त होता है) पर काम करते हैं। 
  • इसके अलावा, शारजाह ने स्थानीय सरकारी कर्मचारियों के लिए अनिवार्य 4-दिन का कार्य-सप्ताह लागू किया है। 
  • जापान में भी सरकार ने कंपनियों को स्वेच्छा से 4-दिन का कार्य-सप्ताह अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया है, ताकि काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बेहतर हो सके।
  • हालांकि विशेषज्ञों की इस सलाह पर आलोचकों का कहना है कि पांच दिन की सैलरी पर चार दिन काम करने का नियम बनाना टिकाऊ नहीं है। इससे इनकम कम हो जाती है।

तो क्या सच में  4-डे वर्किंग प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकता है और इससे सेहत को लाभ हो सकता है? 

इस विषय को लेकर ऑस्ट्रेलियाई रिसर्चर्स का मानना है कि ऐसा हो सकता है। उन्होंने पाया है कि सालाना काम के घंटों में सिर्फ 1 प्रतिशत की कमी करने से मोटापे की दर में 0.16 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है। इससे दिल की बीमारी, डायबिटीज, डिमेंशिया, कुछ खास तरह के कैंसर का खतरा भी कम किया जा सकता है।

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मोटापा कम करने के तरीकों पर जोर - फोटो : Adobe stock
अध्ययन में क्या पता चला?

इस रिपोर्ट को इस्तांबुल में 'यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी' में पेश किया गया। इसमें साल 1990 से 2022 के बीच 33 देशों में काम करने के तरीकों और मोटापे की दरों की तुलना की।

अमेरिका, मेक्सिको और कोलंबिया जैसे देश जहां आम तौर पर काम के घंटे ज्यादा होते हैं, वहां मोटापे की दर नॉर्डिक देशों (डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन) की तुलना में ज्यादा हैं, जहां काम के दिन कम होते हैं।

यूके मोटापे की दर के मामले में नौवें स्थान पर रहा, लेकिन काम के घंटों के मामले में 24वें स्थान पर, जहां एक औसत वयस्क साल में 1,505 घंटे काम करता है। भारत में अभी भी ज्यादातर कंपनियां 6 जबकि कुछ 5 वर्किंग डे पर काम करती हैं। 
 
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4-डे वर्किंग कल्चर कितना कारगर? - फोटो : freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने यह निष्कर्ष निकाला कि पूरा समय ऑफिस में निकल जाने के कारण लोगों के पास जिम-व्यायाम का समय नहीं निकल पाता और काम से जुड़ा तनाव भी मोटापे को बढ़ाता जा रहा है। काम के घंटों में 20 प्रतिशत की कटौती, यानी चार दिन का हफ्ता इस खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।

डॉ. प्रदीप कोराले-गेदारा कहते हैं,  काम के घंटे कई तरीकों से मोटापे को बढ़ावा दे सकते हैं।
 
  • लंबे समय तक काम करने से तनाव वाला हार्मोन 'कोर्टिसोल' बढ़ सकता है, जिसका संबंध वजन बढ़ने से है।
  • जब लोगों की जिंदगी ज्यादा संतुलित होती है, तो उन्हें तनाव कम होता है, वे ज्यादा पौष्टिक खाने पर ध्यान दे पाते हैं और ज्यादा समय शारीरिक गतिविधियों के लिए निकाल पाते हैं।
  • इससे मोटापे का खतरा तो कम होता ही है साथ ही मोटापे के कारण होने वाली डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, हृदय रोग जैसी बीमारियों का जोखिम भी घटता है।

 4-डे वर्किंग कल्चर फायदेमंद हो सकता है, लेकिन क्या संस्थाएं इसे लागू करती हैं, ये बड़ा सवाल है।




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स्रोत:
Work time reduction via a 4-day workweek finds improvements in workers’ well-being



अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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