सुबह जल्दी उठकर ऑफिस पहुंचना, घंटों कुर्सी पर बैठकर लैपटॉप की स्क्रीन से चिपके रहना, मीटिंग्स का दबाव और देर रात तक काम, ये सब मौजूदा समय का आम वर्किंग कल्चर बन गया है। नौकरी की डिमांड के हिसाब से ये जरूरी भी है, पर क्या आप जानते हैं कि ये आदतें आपकी सेहत के लिए इतने बड़े खतरे को न्योता दे रही हैं जिसका ज्यादातर लोगों को अंदाजा तक नहीं होता है।
विशेषज्ञ कहते हैं, लॉन्ग वर्किंग ऑवर्स यानी दिन में 8-10 घंटे काम और लगातार बैठे रहने की आदत धीरे-धीरे शरीर को बीमार बना रही है। लिहाजा मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, तनाव, डिप्रेशन, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याएं अब युवाओं में तेजी से बढ़ती देखी जा रही हैं।
अध्ययनों से पता चलता है कि रोजाना 8-10 घंटे तक लगातार बैठकर काम करने वालों में मोटापे का खतरा कहीं ज्यादा देखा जा रहा है। इसके अलावा ऑफिस के काम के चलते बढ़ता स्क्रीन टाइम और शारीरिक गतिविधि कम होने से शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता घटती है। ये सभी गंभीर बीमारियों को बढ़ाने वाली मानी जाती हैं। इन्हीं जोखिमों को कम करने के लिए अब विशेषज्ञ पांच की जगह चार-दिवसीय कार्य सप्ताह की सलाह दे रहे हैं।
आइए जानते हैं इसके पीछे का क्या तर्क है और क्या ये वास्तव में फायदेमंद साबित हो सकता है?