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Heart Health: क्या लगातार खांसी आते रहना भी हृदय रोगों का संकेत है? कब हो जाना चाहिए सावधान, जानिए सबकुछ

Sun, 22 Jun 2025 07:12 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हृदय रोग के लक्षणों और जोखिम कारकों पर ध्यान देते रहना, डॉक्टर से नियमित सलाह लेते रहना जरूरी है, ये आपको हृदय से संबंधित समस्याओं से बचाए रखने में मददगार हो सकता है।
  • क्या लगातार खांसी आते रहना भी हार्ट की समस्याओं का संकेत है?
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खांसी और हृदय रोगों की समस्या - फोटो : Adobe Stock
Cough and Heart Disease: हृदय स्वास्थ्य की समस्याएं दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही हैं, बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी इसका शिकार हो रहे हैं। ये मृत्यु का प्रमुख कारण भी है जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को सावधान करते रहे हैं।

डॉक्टर्स कहते हैं, कम उम्र से ही अगर लाइफस्टाइल और खानपान को ठीक रख लिया जाए तो हृदय से संबंधित समस्याओं के जोखिमों को कम किया जा सकता है।

हृदय रोग के लक्षणों और जोखिम कारकों पर ध्यान देते रहना, डॉक्टर से नियमित सलाह लेना जरूरी है, ये आपको हृदय से संबंधित समस्याओं से बचाए रखने में मददगार हो सकता है। क्या लगातार खांसी आते रहना भी हार्ट की समस्याओं का संकेत है? अगर ये सवाल आपके मन में भी है तो आइए इसका जवाब ढूंढने की कोशिश करते हैं।
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खांसी और हदय रोगों का संबंध - फोटो : Adobe Stock
क्या आप भी लगातार खांसी से परेशान हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लगातार खांसी आते रहने की समस्या सिर्फ फेफड़े नहीं, दिल की बीमारियों के लिए भी जिम्मेदार हो सकती है, इसलिए इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।

आमतौर पर जब भी हमें खांसी होती है, तो हम इसे सर्दी-जुकाम, एलर्जी या फेफड़ों की समस्या मान लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लगातार खांसी आना आपके दिल की किसी गंभीर बीमारी का इशारा भी हो सकता है? 

कई अध्ययन इस बात की तरफ इशारा करते हैं कि हृदय की कार्यक्षमता कमजोर होना और दिल में किसी बीमारी के विकसित होने के कारण भी कई लोगों में क्रॉनिक खांसी आने की समस्या देखी जाती रही है।
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हार्ट से संबंधित समस्याओ का जोखिम - फोटो : Adobe stock photos
हृदय रोग और लगातार खांसी का संबंध

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  हृदय की समस्याओं के कारण आपके दिल की रक्त को पंप करने की क्षमता पर सीधा असर होता है। जब दिल ठीक से खून पंप नहीं कर पाता, तो फेफड़ों में तरल जमा होने लग जाता है, इसे पल्मोनरी कंजेशन कहा जाता हैं। इसी तरल के जमावट के कारण खांसी, सांस फूलने और सीने में भारीपन जैसी समस्याएं होने लग जाती हैं। 

इसी को लेकर जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के एक अध्ययन से पता चलता है कि हार्ट फेलियर के मरीजों में शुरुआती लक्षणों में खांसी, थकान और सांस लेने में कठिनाई देखी गई। यही कारण है कि लगातार या लंबे समय से बने रहने वाली खांसी की दिक्कत को अनदेखा नहीं करना चाहिए।

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हृदय रोग के लक्षणों को पहचानिए - फोटो : Freepik.com
इन संकेतों पर भी दीजिए ध्यान

वहीं ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि खांसी रात में बढ़े, लेटने पर ज्यादा होती हो या कफ के साथ खून आता हो तो आपको और भी सावधान हो जाना चाहिए। ये कंजेस्टिव हार्ट फेलियर या किसी अन्य गंभीर समस्या का भी संकेत हो सकता है।

हृदय की समस्याओं से जुड़ी खांसी के कुछ खास संकेत होते हैं, ये रात में या लेटते वक्त बढ़ जाता है। खांसी के साथ सांस फूलना, खांसी के बाद में थकावट महसूस होना, खांसी के साथ छाती में दबाव या हल्का दर्द महसूस होते रहना हृदय से संबंधित समस्याओं का संकेत हो सकता है। ऐसी दिक्कतों में तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।
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हृदय रोग और इसके जोखिम कारक - फोटो : Freepik.com
हर खांसी हृदय रोग का कारण ही नहीं

डॉक्टर कहते हैं, हर बार लगातार खांसी होते रहना जरूरी नहीं है कि हृदय की समस्या से ही संबंधित है, ऐसी दिक्कतें टीबी में भी देखी जाती है। लेकिन अगर खांसी के साथ दिल से जुड़े अन्य लक्षण दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज करना खतरे से खाली नहीं है।

दो हफ्ते से अधिक समय से आपको ये दिक्कत बनी हुई है तो डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।



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स्रोत
Can a Cough Be Related to Heart Issues


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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