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Diabetes Risk: पेट की चर्बी से लेकर पीसीओएस तक, ये गलतियां बढ़ा सकती हैं आपका ब्लड शुगर

Mon, 17 Aug 2026 07:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कम उम्र में भी डायबिटीज का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह सिर्फ खराब खानपान या खराब लाइफस्टाइल नहीं है, बल्कि परिवार में डायबिटीज का इतिहास, पेट की चर्बी, पीसीओएस, इंसुलिन रेजिस्टेंस और कुछ आनुवंशिक कारण भी हो सकते हैं।
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डायबिटीज के खतरे को जानिए - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। आंकड़ों से पता चलता है कि दुनियाभर में 58 करोड़ से अधिक वयस्क डायबिटीज का शिकार हैं, यानी हर 9 में से लगभग 1 व्यक्ति को यह बीमारी है। इतना ही नहीं विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि साल 2050 तक यह संख्या 853 मिलियन (85 करोड़) से भी ज्यादा तक पहुंच सकती है। कभी उम्र बढ़ने के साथ होने वाली ये बीमारी अब कॉलेज जाने वाले युवाओं से लेकर नौकरी करने वाले 20-30 साल के वयस्कों में भी देखी जा रही है। 

डायबिटीज का नाम सुनते ही सबसे दिमाग में मीठी चीजें खाने से होने वाली समस्या सामने आती है। हालांकि हर बार इसकी वजह सिर्फ मिठाई, चीनी या खराब खानपान ही नहीं होती। कई बार शरीर के अंदर चल रही ऐसी गड़बड़ियां भी डायबिटीज का कारण बन सकती हैं, जिनके बारे में अक्सर हमें पता तक नहीं होता। 

परिवार में किसी को डायबिटीज है, वजन बहुत ज्यादा बढ़ा रहता है या पेट के आसपास जमा चर्बी जमा है तो ये स्थितियां भी आपको शुगर का मरीज बनाने वाली हो सकती हैं।
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डायबिटीज का आनुवांशिक जोखिम - फोटो : Freepik.com
परिवार में डायबिटीज है तो हो जाएं सावधान

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार आनुवांशिता, टाइप-2 डायबिटीज का बड़ा कारण मानी जाती है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो ये बीमारी किसी को भी हो सकती है पर अगर माता-पिता, भाई-बहन या परिवार के करीबी सदस्यों को टाइप-2 डायबिटीज है, तो आपको जोखिम ज्यादा हो सकता है। इतना ही नहीं अगर आप देखने में बिल्कुल फिट भी हैं और डायबिटीज की फैमिली हिस्ट्री रही है तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। 
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डायबिटीज का बढ़ता जोखिम - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ राहुल अवस्थी कहते हैं, बहुत से लोग इस बात से बिल्कुल अनजान होते हैं कि अगर आप कम सोते हैं, पानी कम पीते हैं या खाना स्किप करते हैं तो ये सभी आदतें भी आपके ब्लड शुगर को बढ़ा सकती हैं। ये सिर्फ डायबिटीज से पीड़ित नहीं, सामान्य लोगों के लिए भी खतरा है। कई बार साधारण आदतें शुगर लेवल को बिगाड़ सकती हैं, जिनको लेकर भी सभी लोगों को सावधानी बरतते रहना चाहिए।
 
  • वजन बढ़ना, टाइप-2 डायबिटीज के प्रमुख जोखिमों में शामिल है। शरीर में अतिरिक्त चर्बी बढ़ने पर इंसुलिन के काम करने का तरीका प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि कम उम्र के लोगों में भी ये बीमारी तेजी से बढ़ती जा रही है।

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पीसीओएस और डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम

महिलाओं में पीसीओएस यानी पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम भी इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या को बढ़ाने वाली हो सकती है। जब शरीर इंसुलिन का ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो अग्न्याशय को ज्यादा इंसुलिन बनाना पड़ सकता है और समय के साथ ब्लड शुगर बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है।

पीसीओएस की शिकार महिलाओं को टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को लेकर सावधानी बरतते रहना चाहिए। गौरतलब है कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम को अब पॉलीएंडोक्राइन मेटाबोलिक ओवेरियन सिंड्रोम के नाम से जाना जाता है।
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नींद की कमी का डायबिटीज पर असर - फोटो : Freepik.com
इन आदतों को लेकर भी बरतें सावधानी
 
  • 7 घंटे से कम नींद लेने वालों में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ने और शुगर लेवल बिगड़ने की आशंका ज्यादा होती है। अच्छी नींद डायबिटीज मैनेजमेंट का अहम हिस्सा है।
  • इंटरमिटेंट फास्टिंग कुछ लोगों के लिए काम कर सकती है। बिना गाइडेंस के फास्टिंग से स्ट्रेस हार्मोन एक्टिव होते हैं, जिससे शुगर लेवल फ्लक्चुएट करने लगते हैं।
  • ग्लूकोज बढ़ने पर पेशाब की मात्रा बढ़ती है, जिससे शरीर में पानी की कमी होती है। ऐसे में ब्लड शुगर और बिगड़ सकता है इसलिए पानी पीते रहना चाहिए।
  • बिना सही डाइट लिए, बहुत इंटेंस वर्कआउट कर रहे हैं, तो इससे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल बढ़ सकता है। इससे शुगर लेवल कम होने की बजाय उल्टा बढ़ जाता है। 
  • हमेशा तनाव में रहना डायबिटीज को और बिगाड़ सकता है। जब आप तनाव में होते हैं, तो शरीर में ऐसे हार्मोन एक्टिव हो जाते हैं जो ग्लूकोज लेवल को ऊपर ले जाते हैं।
  • कई लोग रात को देर से खाना खाते हैं और तुरंत सो जाते हैं। इससे शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी कम होती है व शुगर लेवल बढ़ने लगता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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