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Parkinson’s Disease: इस बीमारी में शरीर पर नहीं रह जाता है कंट्रोल, अपने आप ही हिलने लगते हैं हाथ-पैर

Sun, 09 Jul 2023 07:18 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पार्किंसंस रोग के लक्षण - फोटो : iStock
क्या अक्सर बैठे-बैठे आपका भी हाथ या पैर तेजी से कांपने लगता है? शरीर को बेहतर तरीके से कंट्रोल करने में दिक्कत होती है? कहीं यह पार्किसंस डिजीज के कारण तो नहीं? पार्किंसंस डिजीज को प्रगतिशील विकार के रूप में जाना जाता है जो तंत्रिका तंत्र और तंत्रिकाओं द्वारा नियंत्रित शरीर के हिस्सों को प्रभावित करती है। जहां पहले तंत्रिकाओं के माध्यम से जब आप चाहें तब हाथों-पैरों को हिला-डुला सकते थे, वहीं पार्किंसंस रोग की स्थिति में यह क्रियाएं अनियंत्रित रूप से होती रह सकती हैं।

अमेरिकल एसोसिएशन ऑफ न्यूरोलॉजिकल सर्जन्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह रोग मस्तिष्क के उस हिस्से की तंत्रिका कोशिकाओं में समस्या के कारण होती है जो गति को नियंत्रित करता है। इस रोग में ये नर्व सेल्स या तो डेड हो जाती हैं या खराब हो जाती हैं, जिससे डोपामाइन नामक एक महत्वपूर्ण रसायन के उत्पादन की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

अध्ययनों से पता चला है कि डोपामाइन-उत्पादक कोशिकाओं की 80 प्रतिशत या उससे अधिक हानि वाले रोगियों में पार्किंसंस के लक्षण विकसित होते हैं। डोपामाइन आपको खुश महसूस कराने वाले न्यूरोट्रांसमिटर्स में से एक है।
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पार्किंसंस रोग के जोखिम कारक - फोटो : iStock
पार्किंसंस रोग के बारे में जानिए

एक अनुमान के मुताबिक हर साल पार्किंसंस रोग के 60,000 नए मामलों का निदान किया जाता है। यह स्थिति आमतौर पर 55 वर्ष की आयु के बाद विकसित होती है हालांकि 30-40 वर्ष के लोगों को भी ये प्रभावित कर सकती है। पार्किंसंस रोग कुल मिलाकर बहुत आम है। यह सबसे आम मोटर (गति-संबंधी) मस्तिष्क रोग भी है।

जैसे-जैसे पार्किंसंस रोग बढ़ता है, इसके लक्षण भी बढ़ने लग जाते हैं। बीमारी के बाद के चरणों में अक्सर आपके मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है जिससे डिमेंशिया जैसे लक्षण और अवसाद का भी खतरा होता है।
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हाथों में झुनझुनी-कंपकपी की समस्या - फोटो : istock
पार्किंसंस रोग के लक्षण

पार्किंसंस रोग शरीर में कई प्रकार की समस्याओं का कारण बन सकती है।
  • कंपकंपी या हाथ-पैर और जबड़े का अनैच्छिक रूप से हिलना। 
  • मांसपेशियों में अकड़न, कंधों या गर्दन में दर्द सबसे आम है।
  • मानसिक कौशल या प्रतिक्रिया के समय में कमी।
  • पलकों के झपकने की गति में कमी।
  • अस्थिर चाल या संतुलन में दिक्कत होना।
  • अवसाद या डिमेंशिया का जोखिम।

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पार्किंसंस रोग के जोखिमों के बारे में जानिए - फोटो : iStock
क्यों होता है पार्किंसंस रोग?

शोधकर्ताओं ने पाया कि पार्किंसंस रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में कई बदलाव होते हैं, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि ये बदलाव क्यों होते हैं। 

यदि आपके परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही है तो आपमें भी इसका जोखिम हो सकता है। इसके अलावा महिलाओं की तुलना में पुरुषों में पार्किंसंस रोग विकसित होने की आशंका अधिक होती है। कुछ शोध में पाया गया है कि जो लोग विषाक्त पदार्थों के संपर्क में अधिक रहते हैं उनमें भी इसके होने का जोखिम हो सकता है।
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पार्किंसंस रोग का हो सकता है इलाज - फोटो : iStock
पार्किंसंस रोग का इलाज और बचाव

पार्किंसंस रोग के रोगियों की स्थिति के आधार पर दवाइयों और थेरपी के माध्यम से इसके लक्षणों को नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने का प्रयास किया जाता है।

पार्किंसंस रोग आनुवंशिक कारणों से या अप्रत्याशित रूप से होता है। ऐसे में आप इसके विकसित होने के जोखिम को भी कम नहीं कर सकते। हालांकि कुछ  शोधों से पता चला है कि नियमित एरोबिक व्यायाम से पार्किंसंस रोग का खतरा कम हो सकता है।
 
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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