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जानना जरूरी: कम उम्र से ही ये उपाय आपको स्तन कैंसर से रख सकते हैं सुरक्षित, ये दो आदतें सबसे बड़ी दुश्मन

Sun, 09 Jul 2023 05:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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स्तन कैंसर के जोखिम को कैसे कम करें? - फोटो : istock
स्तन कैंसर, वैश्विक स्तर पर महिलाओं में तेजी से बढ़ते कैंसरों में से एक है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में 35 साल से कम उम्र की महिलाओं के स्तन कैंसर की चपेट में आने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इसके लिए आनुवांशिक कारकों के साथ मोटापा और गतिहीन जीवनशैली को जिम्मेदार माना जा रहा है।

ग्लोबोकैन 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिवर्ष भारत में 1.78 लाख से अधिक महिलाओं में स्तन कैंसर का निदान किया जाता है, इतनी बढ़ती संख्या काफी गंभीर सूचक है।

ब्रेस्ट कैंसर, स्तन की कोशिकाओं में असामान्य वृद्धि की समस्या है। इसमें स्तनों में गांठ या दर्द की दिक्कत हो सकती है। यह घातक स्थिति है जो हर साल दुनियाभर में लाखों महिलाओं के मौत का कारण बनती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 20 से अधिक उम्र की सभी महिलाओं को स्तन की जांच करते रहना और इससे बचाव के उपाय करना बहुत जरूरी है।
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फाइबर वाली चीजों के लाभ - फोटो : istock
हार्वर्ड के अध्ययन में क्या पता चला?

स्तन कैंसर के जोखिमों को कैसे कम किया जा सकता है, इस बारे में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन महिलाओं के आहार में फाइबर की अधिकता अधिक होती है उनमें इस प्रकार के कैंसर का जोखिम कम देखा गया है। शुरुआती वयस्कता में अधिक डाइट्री फाइबर वाली चीजें खाने वाली महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा 12% -19% कम पाया गया।

किशोरावस्था के दौरान फाइबर का अधिक सेवन स्तन कैंसर के 16% और रजोनिवृत्ति से पहले इसके खतरे को 24% तक कम कर सकती है। 
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स्तन कैंसर के जोखिमों के बारे में जानिए - फोटो : iStock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

लेखकों ने अनुमान लगाया कि अधिक फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ खाने से रक्त में एस्ट्रोजन के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है, जो स्तन कैंसर के खतरे को कम कर देती है। हार्वर्ड चेन स्कूल में महामारी विज्ञान और पोषण के प्रोफेसर फ्रेडरिक जॉन स्टेयर कहते हैं, पहले के कई अन्य अध्ययनों से हम जानते हैं कि स्तनों के ऊतक, विशेष रूप से बचपन और किशोरावस्था के दौरान कार्सिनोजेन से प्रभावित होते हैं। इस अवधि के दौरान अगर आहार का ध्यान रखा जाए तो इससे भविष्य में कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।

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विटामिन-डी की कमी भी हो सकती है खतरनाक - फोटो : Pixabay
विटामिन-डी की कमी बढ़ा देती है जोखिम

इसके अलावा एक अन्य शोध से पता चलता है कि जिन महिलाओं में विटामिन-डी का स्तर कम होता है उनमें स्तन कैंसर का खतरा अधिक हो सकता है। विटामिन-डी, सामान्य स्तन कोशिकाओं में वृद्धि को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती और स्तन कैंसर कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने में सक्षम है। जिसका मतलब है कि अगर कम उम्र से ही लड़कियों के आहार में विटामिन-डी की बेहतर मात्रा को सुनिश्चित किया जाए तो इससे स्तन कैंसर के खतरे से बचा जा सकता है। 
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धूम्रपान के कारण स्तन कैंसर का खतरा - फोटो : Pixabay
ये आदतें सबसे बड़ी दुश्मन

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, वैसे तो स्तन कैंसर को बढ़ाने वाले कई जोखिम कारक हो सकते हैं, पर जिन आदतों को सबसे खतरनाक माना जा रहा है उनमें तंबाकू-शराब का सेवन और शारीरिक निष्क्रियता प्रमुख है। तम्बाकू का उपयोग स्तन कैंसर के उच्च जोखिम से जुड़ा हुआ है, खासकर युवा महिलाओं में ये गंभीर जोखिम कारक है। इसी प्रकार अध्ययनों में पाया गया कि जो महिलाएं रोजाना शराब पीती हैं, भले ही इसकी मात्रा कम हो, उनमें स्तन कैंसर होने का खतरा 20% अधिक हो सकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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