पेनकिलर दवा कैसे करती है असर?
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इंटरनल मेडिसिन के डॉक्टर उत्कर्ष सिन्हा बताते हैं, कई ब्रांड्स पैरासिटामोल दवा को 500 mg, 650 mg जैसे अलग-अलग डोज में बनाती हैं और ये ओवर-द-काउंटर आसानी से मिल जाती है। हालांकि अलग-अलग लोगों पर उनके लक्षणों के आधार पर अलग डोज की जरूरत होती है। यही कारण है कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही इसका सेवन करना चाहिए।
हल्की समस्या में अधिक डोज लेने से ये किडनी-लिवर जैसे अंगों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा देती है। लंबे समय तक पेनकिलर लेते रहने से लिवर-किडनी फेलियर तक का खतरा हो सकता है।
पैरासिटामोल का मेटाबॉलिज्म मुख्य रूप से लिवर में होता है यानी जब आप ये दवा लेते हैं तो ये लिवर में टूटती है। सामान्य मात्रा में तो यह सुरक्षित रहती है, लेकिन अध्ययनों में पाया गया है कि प्रतिदिन 4 ग्राम से अधिक मात्रा लेने से ये लिवर पर दबाव बढ़ाने वाली हो सकती है। यही कारण है कि ज्यादातर स्थितियों में डॉक्टर दो-तीन गोली से अधिक सेवन से मना करते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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