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Mental Health: जेन-जी में बढ़ रही स्ट्रेस-एंग्जाइटी की समस्या, जानिए इसमें पैनिक पाउच कैसे करता है मदद

Tue, 16 Jun 2026 07:47 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कई बार एंग्जायटी या घबराहट बिना किसी चेतावनी के शुरू हो जाती है और आप खुद को असहाय महसूस करने लगते हैं। ऐसे समय में पैनिक पाउच एक छोटे इमरजेंसी मेंटल हेल्थ किट की तरह काम करता है। ये है क्या और कैसे काम करता है?
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स्ट्रेस की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
तेजी से बदलती दुनिया, बढ़ती प्रतिस्पर्धा, सोशल मीडिया का दबाव और भविष्य की अनिश्चितताएं- आज की युवा पीढ़ी (Gen-Z) कई तरह के मानसिक तनावों का सामना कर रही है। ऐसे माहौल में मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए युवाओं ने एक नया और व्यावहारिक तरीका अपनाया है, जिसे ‘पैनिक पाउच’ कहा जा रहा है।

यह एक छोटा-सा इमरजेंसी किट होता है, जिसमें ऐसी चीजें रखी जाती हैं, जो तनाव, घबराहट या एंग्जायटी के समय व्यक्ति को भावनात्मक सहारा देने और मन को शांत करने में मदद करती हैं।
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मानसिक तनाव का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe Stock
क्या है यह जेन-जी का 'पैनिक पाउच'?

कई बार एंग्जायटी या घबराहट बिना किसी चेतावनी के शुरू हो जाती है और आप खुद को असहाय महसूस करने लगते हैं। ऐसे समय में पैनिक पाउच एक छोटे इमरजेंसी मेंटल हेल्थ किट की तरह काम करता है। इसमें ऐसी चीजें रखी जाती हैं, जो आपका ध्यान वर्तमान क्षण पर केंद्रित करने और मन को भटकाने में मदद करें।

यह कैसे काम करता है? जब भी आपको पैनिक अटैक या भारी तनाव महसूस हो, आप इस पाउच को खोलते हैं। इसमें मौजूद चीजें आपकी ज्ञानेन्द्रियों (सेंसरी ऑर्गन्स) को एक्टिव करती हैं, जिससे दिमाग तुरंत शांत होने लगता है।


पैनिक पाउच में क्या-क्या रख सकते हैं आप?

इस किट में ऐसी वस्तुएं शामिल की जाती हैं जो मन को शांत करें और सुरक्षा का अहसास दिलाएं। आप अपनी पसंद के अनुसार इसे कस्टमाइज कर सकते हैं।
  • कोई खास परफ्यूम, इत्र या लैवेंडर एसेंशियल ऑयल (जो नसों को शांत करे)।
  • मोटिवेशनल नोट: खुद के लिखे प्रेरणादायक संदेश या सकारात्मक विचार।
  • स्ट्रेस बॉल: तनाव कम करने के लिए स्ट्रेस बॉल या कोई फिजेट टॉय।
  • छोटी डायरी और पेन: घबराहट के वक्त अपने विचारों को पन्नों पर उतारने के लिए।
  • हेडफोन: पसंदीदा संगीत, मंत्र या कोई शांत करने वाली पॉडकास्ट सुनने के लिए।
  • च्युइंगम या मिंट: च्युइंगम चबाने से भी एंग्जायटी का स्तर कम होता है।
  • प्रियजन की तस्वीर: किसी ऐसे व्यक्ति या पालतू जानवर की फोटो, जो आपको सुरक्षित महसूस कराए।
  • यादों का तोहफा: सकारात्मक यादों से जुड़ी कोई भी छोटी वस्तु।
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मानसिक स्वास्थ्य की समस्या - फोटो : Freepik.com
युवाओं में क्यों बढ़ रही है इसकी लोकप्रियता?

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं आज एक वैश्विक चिंता बन चुकी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया का हर आठवां व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार से प्रभावित है, जिनमें चिंता और तनाव  प्रमुख हैं।

अंतरराष्ट्रीय सर्वे बताते हैं कि जेन-जी में तनाव के लक्षण सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं। राहत की बात यह है कि भारत में भी इसे लेकर जागरूकता बढ़ी है। युवा अब केवल समस्याओं पर रोते नहीं हैं, बल्कि उनके व्यावहारिक समाधान (Practical Solutions) तलाश रहे हैं। पैनिक पाउच इसी बदलती सोच का हिस्सा है।

छोटा-सा कदम, लेकिन बड़ा असर

लगातार तनाव में रहने से न केवल मानसिक बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। इससे हृदय रोग, उच्च रक्तचाप (High BP) और कमजोर इम्यूनिटी का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, समय पर तनाव को संभाल लेने से आपकी एकाग्रता और काम करने की क्षमता बेहतर होती है।

मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए हमेशा बड़े उपायों की जरूरत नहीं होती, कभी-कभी यह छोटा सा 'पैनिक पाउच' भी आपको बड़ी मुश्किल से निकाल सकता है।
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मेंटल हेल्थ कैसे ठीक रखें? - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

जाने-माने मनोचिकित्सक डॉ. ओम प्रकाश कहते हैं, तनाव को नियंत्रित रखना हमारे पूरे शरीर के लिए बहुत आवश्यक है। अत्यधिक तनाव से अनिद्रा, उच्च रक्तचाप और कार्यक्षमता में कमी जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
 
  • तनाव नियंत्रित रहने से निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होती है।
  • पैनिक पाउच जैसी कोशिशों के साथ-साथ नियमित व्यायाम, 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और ध्यान को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
  • जब भी ज्यादा परेशान हों, परिवार और मित्रों के साथ समय बिताएं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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