हृदय रोग और दिल के धड़कनों की समस्या
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पेसमेकर की जरूरत कब होती है?
डॉक्टर बताते हैं, पेसमेकर केवल उन लोगों को लगाया जाता है जिनके दिल की धड़कन सामान्य रूप से काम नहीं कर रही होती।
ब्रैडीकार्डिया की स्थिति में जब दिल की धड़कन 60 बीट प्रति मिनट या इससे कम हो जाती है और शरीर खुद इसे कंट्रोल नहीं कर पाता है तो ये उपकरण लगाया जा सकता है। धड़कन कम होने से मरीज को चक्कर, थकान, सांस लेने में तकलीफ और बेहोशी जैसी समस्या हो सकती है।
हार्ट ब्लॉकेज जैसी स्थिति में जब हृदय के ऊपरी और निचले हिस्से के बीच विद्युत संकेत बहुत धीमे पहुंचते हैं तो इससे दिल की पंपिंग क्षमता पर असर पड़ता है, ऐसी स्थिति में भी पेसमेकर लगाने की सलाह दी जा सकती है।
इसके अलावा जिन मरीजों को अचानक हार्ट अटैक या दिल की धड़कन रुकने का खतरा अधिक होता है, उन्हें भी पेसमेकर लगाया जाता है।