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Obesity Health Risk: वजन बढ़ने से हार्ट के साथ लिवर-किडनी पर भी पड़ता है प्रभाव, जान लें इसके पीछे का विज्ञान

Fri, 06 Feb 2026 01:33 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Impact of Weight Gain on Heart : अधिकतर लोगों को ये मालूम होगा कि शरीर का वजन संतुलित रखना चाहिए, इससे आप अच्छे और आकर्षक दिखते हैं। मगर ये बहुत कम लोगों को मालूम है कि मोटापा न सिर्फ आपके लुक को बल्कि आपके शरीर के आंतरिक अंगों को भी प्रभावित करता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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मोटापा - फोटो : Adobe stock photos
Obesity And Chronic Kidney Disease Link: मोटापा केवल शरीर की बनावट में बदलाव नहीं है, बल्कि यह एक जटिल मेटाबॉलिक स्थिति है जो शरीर के हर महत्वपूर्ण अंग को प्रभावित करती है। जब शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होती है, तो यह केवल त्वचा के नीचे ही नहीं, बल्कि आंतरिक अंगों के आसपास भी जमा होने लगती है, जिसे 'विसरल फैट' कहा जाता है। 

विज्ञान के अनुसार, फैट कोशिकाएं सक्रिय रूप से ऐसे रसायन छोड़ती हैं, जो पूरे शरीर में क्रोनिक इन्फ्लेमेशन पैदा करते हैं। बढ़ा हुआ वजन हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालता है क्योंकि उसे अधिक ऊतकों तक खून पंप करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है, जिससे धीरे-धीरे हृदय की दीवारें मोटी होने लगती हैं और उसकी क्षमता प्रभावित होती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ कहते हैं कि मोटापा दबे पांव शरीर में कई बीमारियों को घर करता है।
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हार्ट अटैक - फोटो : Adobe Stock Photo
हृदय स्वास्थ्य और मोटापे का सीधा संबंध
अतिरिक्त वजन ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है और नसों में कोलेस्ट्रॉल जमा होने की प्रक्रिया को तेज कर देता है। इससे धमनियां संकरी हो जाती हैं, जिससे एथेरोस्क्लेरोसिस और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा मोटापे के कारण 'स्लीप एपनिया' जैसी स्थिति पैदा होती है, जो ऑक्सीजन के लेवल को कम कर हृदय पर तनाव बढ़ाती है, जिससे समय से पहले हार्ट फेलियर की आशंका बढ़ जाती है।
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लिवर - फोटो : adobe stock images
फैटी लिवर
लिवर शरीर का इंजन है, लेकिन मोटापे के कारण इसमें वसा का संचय होने लगता है, जिसे 'नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज' कहते हैं। यह वसा लिवर में सूजन पैदा करती है, जो धीरे-धीरे 'लिवर सिरोसिस' या 'लिवर फेलियर' का कारण बन सकती है। जब लिवर वसा से भर जाता है, तो इसकी विषाक्त पदार्थों को साफ करने की क्षमता कम हो जाती है, जो पूरे मेटाबॉलिज्म को बिगाड़ देती है।

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किडनी में पथरी की शिकायत - फोटो : Adobe Stock
किडनी पर बढ़ता फिल्टरेशन का बोझ
मोटापा सीधे तौर पर किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है। शरीर के बढ़े हुए हिस्से की जरूरतों को पूरा करने के लिए किडनी को अधिक खून फिल्टर करना पड़ता है, जिसे 'हाइपरफिल्ट्रेशन' कहते हैं। लंबे समय तक अधिक दबाव रहने से किडनी की सूक्ष्म फिल्टरिंग इकाइयां प्रभावित हो जाती हैं। इसके साथ ही मोटापा डायबिटीज और हाई बीपी का मुख्य कारण है, जो अंत में क्रोनिक किडनी डिजीज की ओर ले जाता है।

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अच्छी जीवनशैली अपनाएं - फोटो : Adobe Stock
अच्छी जीवनशैली ही है एकमात्र बचाव
मोटापे के विज्ञान को समझकर यह स्पष्ट है कि वजन कम करना केवल सौंदर्य के लिए नहीं, बल्कि अच्छे सेहत और आंतरिक अंगों की सुरक्षा के लिए भी बहुत जरूरी है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद के माध्यम से आप इन गंभीर जोखिमों को कम कर सकते हैं। समय रहते वजन पर नियंत्रण पाने से न केवल हृदय सुरक्षित रहता है, बल्कि लिवर और किडनी भी स्वस्थ रहता है।

स्रोत और संदर्भ
Critical Correlation Between Obesity and Cardiovascular Diseases and Recent Advancements in Obesity

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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