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Korean Game Addiction: कैसे पहचानें बच्चे को गेम की लत है या नहीं? विशेषज्ञ से जानें किशोरों का मनोविज्ञान

Thu, 05 Feb 2026 07:56 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Online Game Addiction Symptoms: ऑनलाइन गेमिंग की वजह से तीन मासूम बहनों से जब उनके पिता ने फोन छीना तो उन्होंने नौंवी मंजिल से छलांग लगाकर जान दे दी। इस हृदयविदारक घटना के बाद देशभर के लोगों में ये सवाल है कि क्या ऑनलाइन गेमिंग की लत इतनी खराब हो सकती है? इसी विषय पर विशेषज्ञ जो बताया वो आपको भी जानना चाहिए।
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बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग की लत का दुष्प्रभाव - फोटो : Amar Ujala
Impact Of Online Gaming On Teen Mental Health: गाजियाबाद के टीलामोड़ इलाके में 3 फरवरी की देर रात एक ऐसी झकझोर देने वाली घटना घटी, जिसने आज के डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिता के मोबाइल छीनने पर भारत सिटी सोसायटी की नौवीं मंजिल से तीन सगी बहनों (16, 14 और 12 वर्ष) ने कूदकर अपनी जान दे दी। पुलिस जांच में एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें बच्चियों के कोरियन कल्चर और ऑनलाइन गतिविधियों से प्रभावित होने का संकेत मिला है।

इस घटना ने एक बार फिर 2016 के 'ब्लू व्हेल' गेम जैसी भयावह यादें ताजा कर दी हैं। बताया जा रहा है कि बच्चियां 'कोरियन लव गेम' जैसे डिजिटल आकर्षण के चंगुल में थीं। यह त्रासदी केवल एक कानूनी मामला नहीं है, बल्कि किशोरों के उस मानसिक स्वास्थ्य की चेतावनी है, जहां वर्चुअल दुनिया की लत उनके जीवन पर हावी हो रही है। 

ये सब देखने के बाद दिमाग में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं, जैसे- कोई ऑनलाइन गेम बच्चों के लिए कैसे जानलेवा बन जाता है?, माता-पिता अपने बच्चों में कैसे ऑनलाइन गेम के लत को पहचानें? लक्षण खतरनाक होने पर सबसे पहले क्या करें? इन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब जानने के लिए हमने गुड़गांव के निजी अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. आशीष मित्तल से बात की। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
 
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बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग की लत का दुष्प्रभाव - फोटो : Amar Ujala
किशोरों में कब आती है सुसाइडल टेंडेंसी?
डॉक्टर मित्तल के अनुसार, किशोरावस्था के बच्चों का मस्तिष्क पूरी तरह विकसित नहीं होता, ऐसे में जब उन्हें गेम की लत लगती है तो उनके लिए गेम ही असल दुनिया बन जाती है। इस उम्र में बच्चे किसी वर्चुअल रोल मॉडल से अपनी पहचान जोड़ लेते हैं। ऐसे में जब उन्हें गेम खेलने से रोका जाता है तो वे अपनी पहचान खोने का गहरा खालीपन महसूस करते हैं।

इस स्थिति में बच्चे 'डिल्यूजन्स' यानी वास्तविकता से परे भ्रम और 'ओवर वैल्यूड आइडियाज' का शिकार हो जाते हैं, जहां उन्हें अपना विचार या गेम का टास्क जीवन से भी बड़ा लगने लगता है। तर्क शक्ति की कमी होने के कारण वे इस मानसिक दबाव को सहन नहीं कर पाते, जो उन्हें सुसाइड जैसे आत्मघाती कदम की ओर धकेलता है।

गाजियाबाद के तीनों लड़कियों के सुसाइड वाले केस में देखें तो एक न्यूज एजेंसी से बातचीत के दौरान लड़कियों के पिता ने बताया कि उनकी बेटियां इस गेम और कोरियाई संस्कृति के प्रति इस कदर जुनूनी थीं कि वे इसे अपनी जान से ऊपर मानने लगी थीं। यह बच्चों में डिल्यूजन और ओवरवैल्यूड आइडियाज का एक सबसे अच्छा उदाहरण है।
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बच्चों में ऑनलाइन गेमिंग की लत का दुष्प्रभाव - फोटो : Amar Ujala
माता-पिता कैसे पहचानें लत के खतरनाक लक्षण?
माता-पिता को बच्चे की डिजिटल गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। डॉ. मित्तल के अनुसार, अगर फोन छीनने पर बच्चा हिंसक हो जाए, आप पर हाथ उठाए या अत्यधिक गुस्सा करे, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है। 
  • हिंसक व्यवहार और गुस्सा: फोन छीनने या गेम बंद करने पर बच्चे का अत्यधिक गुस्सा करना, चिड़चिड़ा हो जाना और यहां तक कि माता-पिता पर हाथ उठाना या मारपीट करना।
  • गहरा अवसाद और अकेलापन: मोबाइल पास न होने पर बच्चे का बुरी तरह उदास हो जाना और उसे आसपास की किसी भी गतिविधि या खेल में रुचि न रहना।
  • दैनिक दिनचर्या और खान-पान में लापरवाही: गेम में इस कदर खो जाना कि बच्चा समय पर नहाना, अपनी पसंद का खाना खाना और व्यक्तिगत स्वच्छता जैसी जरूरी चीजों को भी नजरअंदाज करने लगे।

 

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बच्चों में बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग की लत - फोटो : AI
क्या बच्चों को फोन नहीं देना ही सही तरीका है?
आज के दौर में बच्चों से मोबाइल पूरी तरह छीनना संभव नहीं है, क्यों उसी फोन से बच्चे कई अच्छी चीजें भी सीखते हैं, दुनिया से देखते हैं और समझते हैं। मगर 'डिजिटल सेफ्टी' रखना बहुत जरूरी है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह है कि बच्चों का स्क्रीन टाइम 'टाइम बाउंड' होना चाहिए।

बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग के बदले आउटडोर एक्टिविटीज के लिए प्रोत्साहित करें। बच्चों को तकनीक के फायदों के साथ उसके डार्क साइड के बारे में भी बताएं, ताकि उसमें सही और गलत की समझ डेवेलप हो।

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मोबाइल फोन का अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik
अगर बच्चे को ऑनलाइन गेमिंग की लत है तो क्या करें?
अगर आपको पता चले कि बच्चा किसी खतरनाक गेम का शिकार हो चुका है, तो अचानक मोबाइल छीनकर उसे पैनिक न करें। धीरे-धीरे उसका रूटीन ठीक करने पर काम करें और बातचीत के जरिए उसका विश्वास जीतें। धीरे-धीरे उसका स्क्रीन टाइम कम करें।

डॉ. मित्तल सुझाव देते हैं कि अगर बच्चा बहुत अधिक चिड़चिड़ा या आक्रामक हो रहा है, तो बिना देरी किए किसी प्रोफेशनल साइकोलॉजिस्ट या मनोचिकित्सक से मिलना चाहिए। चिकित्सीय परामर्श उसे इस मानसिक दलदल से बाहर निकाल सकता है।

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बच्चों में क्यों होती है ऑनलाइन गेमिंग की लत - फोटो : Freepik.com
ऐसी घटनाओं के पीछे का मूल कारण?
इस तरह की घटनाओं के पीछे माता-पिता और बच्चों के बीच बढ़ता 'कम्युनिकेशन गैप' एक बड़ी वजह है। जब घर में बातचीत कम होती है, तो बच्चे लोनलीनेस (अकेलापन) महसूस करते हैं और उस खालीपन को भरने के लिए ऑनलाइन दुनिया का सहारा लेते हैं। बच्चों के साथ दोस्त बनकर बात करना और उन्हें यह अहसास दिलाना कि वे किसी भी परिस्थिति में उनके साथ हैं, बच्चों को किसी भी तरह के गलत कदम से बचा सकता है।

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ऑनलाइन गेम्स के बढ़ती लत - फोटो : Freepik.com
'गेमिंग एडिक्शन को भी ड्रग एडिक्शन की तरह'
डॉ. आशीष मित्तल ने बताया कि गेमिंग एडिक्शन भी बिल्कुल ड्रग एडिक्शन की तरह ही एक गंभीर लत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इसे मानसिक विकार माना है। गाजियाबाद की घटना एक सबक है कि हमें अपने बच्चों के हाथों में सिर्फ गैजेट्स नहीं देने हैं, बल्कि उन्हें मानसिक रुप से मजबूत भी बनना है। समय रहते पहचान और विशेषज्ञ की मदद से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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